ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम का प्रस्ताव ठुकराया, ‘स्थायी अंत’ को लेकर ये हैं शर्तें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बयान जारी करते हुए कहा कि तेहरान किसी तात्कालिक युद्धविराम से संतुष्ट नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान संघर्ष को “अवैध युद्ध” करार देते हुए ईरान ऐसी समाप्ति चाहता है जो दीर्घकालिक शांति की गारंटी दे।

तेहरान। पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह केवल ऐसे समझौते के लिए तैयार होगा, जो युद्ध का “निर्णायक और स्थायी अंत” सुनिश्चित करे। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि अस्थायी युद्धविराम उसकी प्राथमिकता नहीं है, बल्कि वह ऐसे समाधान की तलाश में है जिससे भविष्य में संघर्ष की पुनरावृत्ति न हो।
युद्धविराम नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बयान जारी करते हुए कहा कि तेहरान किसी तात्कालिक युद्धविराम से संतुष्ट नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान संघर्ष को “अवैध युद्ध” करार देते हुए ईरान ऐसी समाप्ति चाहता है जो दीर्घकालिक शांति की गारंटी दे। अराघची ने अमेरिकी मीडिया में आई उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने से इन्कार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान बातचीत से पीछे नहीं हट रहा, बल्कि पहले उन शर्तों को स्पष्ट करना चाहता है जिनके आधार पर कोई ठोस और स्थायी समाधान निकल सके।
वार्ता को लेकर भ्रम, ईरान ने किया खंडन
रायटर की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने कहा कि ईरान ने वार्ता से इनकार नहीं किया है, बल्कि वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बातचीत केवल औपचारिक न हो, बल्कि परिणाम देने वाली हो। इससे पहले ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ ने दावा किया था कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए संकेत दिया है कि वह मौजूदा अमेरिकी प्रस्तावों को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है और निकट भविष्य में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को लेकर भी इच्छुक नहीं है। हालांकि, ईरान के ताजा बयान से यह स्पष्ट होता है कि तेहरान पूरी तरह संवाद से दूर नहीं हुआ है, बल्कि वह अपनी शर्तों को प्राथमिकता दे रहा है।
48 घंटे का युद्धविराम प्रस्ताव ठुकराया
ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका ने एक “मित्र देश” के जरिए ईरान को 48 घंटे के युद्धविराम का प्रस्ताव भेजा था। फार्स समाचार एजेंसी ने दावा किया कि तेहरान ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव ऐसे समय भेजा गया जब कुवैत के बुबियान द्वीप पर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरानी हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया था। फार्स एजेंसी ने यह भी कहा कि ईरान ने इस प्रस्ताव का औपचारिक लिखित जवाब देने के बजाय युद्धक्षेत्र में अपनी कार्रवाई जारी रखकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया।
पाकिस्तान की पहल पर स्थिति साफ
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद कराने की उसकी कोशिशें विफल हो गई हैं। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने ऐसी खबरों को “निराधार” बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति और संवाद बहाली के लिए अपनी कूटनीतिक कोशिशें जारी रखे हुए है। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि बैक-चैनल डिप्लोमेसी अभी भी पूरी तरह बंद नहीं हुई है।
अमेरिकी ठिकानों वाले देश रहें सतर्क
ईरान ने इस बीच क्षेत्रीय देशों के लिए कड़ा संदेश भी जारी किया है। ईरानी सशस्त्र बलों के खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफाघरी ने कहा कि जिन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, उन्हें अमेरिकी बलों की वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अन्यथा ये देश भी संभावित हमलों की जद में आ सकते हैं। ज़ोलफाघरी ने अमेरिकी और इजरायली परिसंपत्तियों पर “कुचल देने वाले हमलों” की बात कही, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
अमेरिका की मंशा पर सवाल
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। एएनआई के अनुसार, उन्होंने हालिया हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें विदेश नीति से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी की मौत हो गई, जबकि उस अधिकारी को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। पेजेशकियान ने कहा कि यह हमला ऐसे समय हुआ जब वह अमेरिकी जनता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इसे अमेरिका की कथित “दोहरे रवैये” का उदाहरण बताया। उन्होंने अपने बयान में कहा, “दुनिया को यह तय करना चाहिए कि संवाद की इच्छा किसकी है और हिंसा का रास्ता कौन चुन रहा है।”
क्षेत्रीय तनाव गहराया, समाधान दूर
मौजूदा घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय और गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका और उसके सहयोगी युद्धविराम के जरिए तत्काल तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं ईरान दीर्घकालिक समाधान पर जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी और अलग-अलग प्राथमिकताएं किसी भी त्वरित समझौते को मुश्किल बना रही हैं।


