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वॉशिंगटन पोस्ट ने की बड़े पैमाने पर छंटनी, शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर भी बाहर

ईशान थरूर पिछले 12 वर्षों से वाशिंगटन पोस्ट से जुड़े थे और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नियमित स्तंभ लिखते थे। छंटनी की जानकारी साझा करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे आज वाशिंगटन पोस्ट से निकाल दिया गया है। मेरे साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी और कई अन्य शानदार सहकर्मी भी निकाले गए हैं। ”

वॉशिंगटन पोस्ट ने की बड़े पैमाने पर छंटनी, शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर भी बाहर
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वाशिंगटन। करीब डेढ़ सौ वर्षों के इतिहास और खोजी पत्रकारिता की मजबूत परंपरा के लिए पहचाने जाने वाले अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट ने भारी वित्तीय घाटे के चलते 300 पत्रकारों और कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय, मेट्रो, संपादन और खेल डेस्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। छंटनी की इस लहर में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और अंतरराष्ट्रीय मामलों के वरिष्ठ स्तंभकार ईशान थरूर भी शामिल हैं। अखबार प्रबंधन के इस कदम ने वैश्विक मीडिया जगत में चिंता पैदा कर दी है। वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों ने इसे अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता के लिए एक कठिन दौर की शुरुआत बताया है।

ईशान थरूर ने कहा—“दिल टूट गया”

ईशान थरूर पिछले 12 वर्षों से वाशिंगटन पोस्ट से जुड़े थे और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नियमित स्तंभ लिखते थे। छंटनी की जानकारी साझा करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे आज वाशिंगटन पोस्ट से निकाल दिया गया है। मेरे साथ अधिकांश अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी और कई अन्य शानदार सहकर्मी भी निकाले गए हैं। मैं अपने न्यूजरूम और उन बेमिसाल पत्रकारों के लिए बहुत दुखी हूं जिन्होंने वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अखबार की सेवा की।” उन्होंने एक अन्य पोस्ट में खाली न्यूजरूम की तस्वीर साझा करते हुए लिखा—“एक बुरा दिन।” इस घटनाक्रम पर शशि थरूर ने गहरा दुख जताया और इसे बेहद पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि ईशान ने लंबे समय तक पेशेवर प्रतिबद्धता के साथ काम किया और इस तरह का फैसला निराशाजनक है।

वरिष्ठ पत्रकारों की भी छुट्टी

छंटनी से प्रभावित पत्रकारों में खोजी पत्रकार विल हॉब्सन, यरुशलम ब्यूरो प्रमुख गेरी शिह, काहिरा ब्यूरो प्रमुख क्लेयर पार्कर, यूक्रेन संवाददाता लिजी जॉनसन और बर्लिन ब्यूरो प्रमुख आरोन वीनर जैसे नाम शामिल हैं। गेरी शिह ने कहा कि वे “मिडिल ईस्ट टीम के बाकी सदस्यों और दिल्ली से बीजिंग, कीव और लैटिन अमेरिका तक के अधिकांश साथियों” के साथ विदा ले रहे हैं। वहीं क्लेयर पार्कर ने इसे अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता के लिए “एक दुखद दिन” बताया। इन पत्रकारों ने अपने संदेशों में सहकर्मियों के प्रति गर्व, पेशे के प्रति प्रतिबद्धता और भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की।

10 करोड़ डॉलर के घाटे का असर

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में बताया कि आर्थिक दबाव के चलते यह कठोर निर्णय लेना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, वाशिंगटन पोस्ट को हाल के वर्षों में भारी घाटे का सामना करना पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 में अखबार को लगभग 7 करोड़ डॉलर और 2024 में करीब 10 करोड़ डॉलर का घाटा हुआ। यही नहीं, डिजिटल और प्रिंट दोनों प्लेटफॉर्म पर पाठकों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस ने वर्ष 2013 में वाशिंगटन पोस्ट का अधिग्रहण किया था। उनके स्वामित्व में अखबार ने डिजिटल विस्तार की दिशा में कई प्रयास किए, लेकिन हालिया आर्थिक संकट ने इसकी स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सर्कुलेशन और डिजिटल पाठकों में गिरावट

‘अलायंस फॉर ऑडिटेड मीडिया’ के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में अखबार का दैनिक प्रिंट सर्कुलेशन एक लाख प्रतियों से भी नीचे आ गया। पिछले पांच वर्षों में सर्कुलेशन में करीब 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी स्थिति उत्साहजनक नहीं रही। 2021 में जहां दैनिक सक्रिय यूजर्स की संख्या लगभग तीन करोड़ थी, वहीं 2023 के मध्य तक यह घटकर करीब सवा दो करोड़ रह गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार का समर्थन न करने के निर्णय के बाद डिजिटल सेक्शन से लगभग ढाई लाख सब्सक्राइबर कम हो गए। इसे भी राजस्व में गिरावट का एक कारण माना जा रहा है।

संपादकीय ढांचे में बड़े बदलाव

आर्थिक संकट के चलते अखबार ने अपने कई विभागों में कटौती की है। कथित तौर पर बुक्स सेक्शन बंद कर दिया गया है, ‘पोस्ट रिपोर्ट्स’ पॉडकास्ट रद्द कर दिया गया है और मेट्रो तथा अंतरराष्ट्रीय कवरेज को सीमित किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संपादक पीटर फिन ने भी टीम का सामना करने के बजाय स्वयं को छंटनी में शामिल करने का अनुरोध किया। इसे संपादकीय जिम्मेदारी की एक असामान्य लेकिन उल्लेखनीय मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय डेस्क में कटौती से वैश्विक घटनाओं की गहन रिपोर्टिंग पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

ऐतिहासिक विरासत पर संकट की छाया

वाशिंगटन पोस्ट अमेरिकी पत्रकारिता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 1970 के दशक में इसी अखबार ने ‘वाटरगेट स्कैंडल’ का खुलासा किया था, जिसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को इस्तीफा देना पड़ा था। खोजी पत्रकारिता की इस विरासत ने अखबार को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई। हालांकि बदलते मीडिया परिदृश्य, डिजिटल प्रतिस्पर्धा और घटती विज्ञापन आय ने पारंपरिक मीडिया संस्थानों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। वाशिंगटन पोस्ट की मौजूदा स्थिति इसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा मानी जा रही है।

बदलावों का संकेत

300 पत्रकारों की छंटनी केवल एक संस्थान का आंतरिक निर्णय नहीं, बल्कि वैश्विक मीडिया उद्योग में चल रहे बदलावों का संकेत है। अंतरराष्ट्रीय कवरेज में कटौती और अनुभवी पत्रकारों की विदाई ने पत्रकारिता की गुणवत्ता और विविधता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वाशिंगटन पोस्ट किस तरह अपनी आर्थिक चुनौतियों से उबरता है और अपनी ऐतिहासिक पत्रकारिता की विरासत को किस रूप में आगे बढ़ाता है।


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