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ईरान के करीब पहुंचा अमेरिका का सबसे विध्वंसक युद्धपोत, ट्रंप की धमकी पर तेहरान की चेतावनी- उंगलियां ट्रिगर पर हैं
अमेरिकी विध्वंसक युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन अपने पूरे स्ट्राइक ग्रुप के साथ ईरान के करीब बढ़ रहा है। इसी बीच इस्राइल भी संभावित ‘सरप्राइज वॉर’ की तैयारी में जुटा हुआ बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक बार फिर सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर माहौल को और गरमा दिया है।

वाशिंगटन/ तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान की शक्तिशाली रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) के कमांडर ने इस्राइल और अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान की ताकत को कम आंकने की भूल न की जाए, क्योंकि “हमारी उंगली ट्रिगर पर है।” यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी विध्वंसक युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन अपने पूरे स्ट्राइक ग्रुप के साथ ईरान के करीब बढ़ रहा है। इसी बीच इस्राइल भी संभावित ‘सरप्राइज वॉर’ की तैयारी में जुटा हुआ बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक बार फिर सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर माहौल को और गरमा दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अमेरिका वास्तव में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है, या फिर यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है?
यूएसएस अब्राहम लिंकन
अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को दुनिया के सबसे ताकतवर जंगी बेड़ों में गिना जाता है। यह अकेला जहाज नहीं, बल्कि अपने साथ एक पूरा ‘कैरियर स्ट्राइक ग्रुप’ लेकर चलता है। इस समूह में गाइडेड मिसाइल क्रूजर, अत्याधुनिक विध्वंसक जहाज, परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बियां और सप्लाई जहाज शामिल होते हैं। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यूएसएस अब्राहम लिंकन समुद्र में चलता-फिरता एक विशाल सैन्य अड्डा है। इस पर अमेरिका के सबसे घातक लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं, जो जल, थल और नभ—तीनों मोर्चों पर एक साथ हमला करने में सक्षम हैं। यही वजह है कि इसे अमेरिका के दुश्मनों के लिए ‘काल’ कहा जाता है। अमेरिकी रणनीतिक हलकों में यह भी दावा किया जाता है कि अगर यह कैरियर पूरी ताकत से हमला करे, तो वह अकेले ही ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, ईरान ऐसे दावों को मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा बताता रहा है।
ट्रंप की धमकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार ईरान को चेतावनी दे चुके हैं कि सैन्य कार्रवाई का विकल्प पूरी तरह खुला है। उन्होंने यहां तक कहा था कि जरूरत पड़ी तो ईरान को “नक्शे से मिटा दिया जाएगा।” इन बयानों के पीछे अमेरिका की अत्याधुनिक सैन्य ताकत को बड़ा कारण माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के पास कम से कम ऐसे पांच घातक हथियार हैं, जिनका ईरान के पास फिलहाल कोई प्रभावी जवाब नहीं है। इनमें सबसे अहम हैं स्टेल्थ बॉम्बर बी-2, टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें और अत्याधुनिक लड़ाकू विमान।
बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर
अमेरिकी स्टेल्थ बॉम्बर बी-2 को दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर भीतर तक घुस सकता है। ईरान–इस्राइल संघर्ष के दौरान अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। उस समय ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम और रडार इन बॉम्बर्स का पता लगाने में पूरी तरह नाकाम रहे थे। इससे यह साफ हो गया था कि बी-2 से निपटना ईरान के लिए बेहद मुश्किल, बल्कि लगभग असंभव है। इससे भी बड़ी बात यह है कि अमेरिका में 52 नए बी-2 बॉम्बर तैयार किए जा रहे हैं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर तैयारी इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन के दिमाग में किसी बड़े संघर्ष की आशंका या योजना चल रही है।
अमेरिकी स्टेल्थ बॉम्बर बी-2 को दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर भीतर तक घुस सकता है। ईरान–इस्राइल संघर्ष के दौरान अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। उस समय ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम और रडार इन बॉम्बर्स का पता लगाने में पूरी तरह नाकाम रहे थे। इससे यह साफ हो गया था कि बी-2 से निपटना ईरान के लिए बेहद मुश्किल, बल्कि लगभग असंभव है। इससे भी बड़ी बात यह है कि अमेरिका में 52 नए बी-2 बॉम्बर तैयार किए जा रहे हैं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर तैयारी इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन के दिमाग में किसी बड़े संघर्ष की आशंका या योजना चल रही है।
टॉमहॉक मिसाइल: दूर से तबाही का हथियार
अगर बात अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल की जाए, तो यह ईरान के लिए और भी घातक साबित हो सकती है। ये मिसाइलें सैकड़ों किलोमीटर दूर से दागी जा सकती हैं और बेहद सटीक निशाने के लिए जानी जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टॉमहॉक मिसाइलें ईरान के सैन्य ठिकानों, परमाणु सुविधाओं और कमांड सेंटरों को कुछ ही घंटों में पंगु बना सकती हैं। यही वजह है कि यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे कैरियर के ईरान के करीब पहुंचने को हल्के में नहीं लिया जा रहा।
ईरान के भीतर उथल-पुथल और बाहरी दबाव
ईरान में हाल के महीनों में अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। दिसंबर के अंत में शुरू हुए इन प्रदर्शनों ने ईरानी नेतृत्व को हिला कर रख दिया था। हालांकि, सख्त कार्रवाई के जरिए सरकार ने इस आंदोलन को दबा दिया। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस दमन अभियान में हजारों लोग मारे गए। इन कार्रवाइयों में आईआरजीसी की अग्रिम भूमिका बताई जाती है। यही संगठन 1979 की इस्लामी क्रांति की रक्षा के लिए बनाया गया था और आज भी अंदरूनी व बाहरी खतरों से निपटने में सबसे अहम ताकत माना जाता है।
आईआरजीसी कमांडर की खुली चेतावनी
आईआरजीसी के कमांडर जनरल मोहम्मद पकपूर ने इस्राइल और अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वे इतिहास और हालिया युद्धों से सबक लें। उन्होंने कहा कि 12 दिन के “थोपे गए युद्ध” से ईरान ने बहुत कुछ सीखा है और अब पहले से कहीं ज्यादा तैयार है। पकपूर ने कहा, “हमारी उंगली ट्रिगर पर है और हम शीर्ष कमांडर-इन-चीफ के आदेशों को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ये आदेश हमारे जीवन से भी ज्यादा प्रिय हैं।” उनका इशारा सीधे तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ओर था। यह बयान एक लिखित संदेश के रूप में जारी किया गया, जिसे आईआरजीसी के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित किया गया।
आईआरजीसी पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध
आईआरजीसी को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरा मतभेद है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका समेत कई देशों ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है और इस पर प्रतिबंध लगाए हैं। ये देश यूरोपीय संघ और ब्रिटेन से भी इसी तरह के कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। ईरान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है और आईआरजीसी को अपनी संप्रभुता और सुरक्षा का रक्षक बताता है।
युद्ध की आहट या दबाव की रणनीति?
यूएसएस अब्राहम लिंकन की तैनाती, ट्रंप की धमकियां और ईरान की आक्रामक चेतावनियों ने मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका को और गहरा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या अमेरिका वास्तव में सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है, या यह सिर्फ ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की रणनीति है? फिलहाल संकेत यही हैं कि दोनों पक्ष ताकत दिखाने की होड़ में हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि ऐसे हालात में एक छोटी सी चूक भी बड़े युद्ध का कारण बन सकती है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह तनाव कूटनीति के जरिए ठंडा पड़ेगा या फिर मध्य पूर्व एक और बड़े संघर्ष की आग में झुलसने वाला है।
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