अमेरिका ने वेनेजुएला का 65 अरब बैरल तेल कब्जा जमाया, ट्रंप बोले- इतिहास की सबसे बड़ी डील
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस साझेदारी के जरिए वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार से जुड़े उत्पादन पर अमेरिका की बड़ी हिस्सेदारी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस समझौते को दुनिया की सबसे बड़ी डील बताया है।

वॉशिंगटन: US Venezuela oil deal: अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तेल को लेकर एक बड़े समझौते की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस साझेदारी के जरिए वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार से जुड़े उत्पादन पर अमेरिका की बड़ी हिस्सेदारी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस समझौते को दुनिया की सबसे बड़ी डील बताया है। वहीं वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी इसे ऐतिहासिक समझौता करार दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह परियोजना वेनेजुएला में पहले से काम कर रही एक निजी कंपनी के साथ साझेदारी में आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, संबंधित कंपनी का नाम और समझौते की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
अमेरिका को मिलेगा 55 फीसदी हिस्सा
डील की सबसे अहम बात यह है कि साझेदारी से निकलने वाले तेल में अमेरिका को 55 फीसदी हिस्सा मिलने की बात कही गई है। हालांकि इसे सीधे 65 अरब बैरल तेल का अमेरिकी स्वामित्व समझना सही नहीं होगा। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि समझौते के तहत अमेरिका को तेल भंडार पर किस तरह के अधिकार मिलेंगे या 55 फीसदी हिस्सेदारी केवल भविष्य में होने वाले उत्पादन से संबंधित होगी। इसलिए डील की पूरी शर्तें सामने आने के बाद ही अमेरिका के वास्तविक नियंत्रण और आर्थिक लाभ की तस्वीर साफ होगी।
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार
वेनेजुएला के पास 300 अरब बैरल से अधिक का प्रमाणित तेल भंडार होने का दावा किया जाता है, जो दुनिया में सबसे बड़ा है। इस लिहाज से 65 अरब बैरल उसके कुल भंडार का करीब पांचवां हिस्सा बैठता है। भारत से तुलना करें तो देश हर साल करीब 1.6 से 1.7 अरब बैरल कच्चा तेल आयात करता है। इस हिसाब से 65 अरब बैरल भारत की करीब चार दशकों की कच्चे तेल की आयात जरूरत के बराबर है। यही वजह है कि अमेरिका-वेनेजुएला की इस डील को ऊर्जा बाजार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश की योजना
राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के मुताबिक, समझौते के तहत वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों को दोबारा विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में 100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश किए जाने की बात कही गई है। रोड्रिग्ज का दावा है कि इस निवेश से तेल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और वेनेजुएला की सरकार को आने वाले वर्षों में करीब 209 अरब डॉलर टैक्स राजस्व मिल सकता है। सरकार का लक्ष्य देश के विशाल तेल संसाधनों का इस्तेमाल आर्थिक विकास को गति देने के लिए करना है।
तेल भंडार बड़ा, लेकिन उत्पादन कमजोर
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद देश लंबे समय से अपनी उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाया है। आर्थिक संकट, निवेश की कमी, तेल उद्योग के बुनियादी ढांचे की कमजोरी और अमेरिकी प्रतिबंधों ने उत्पादन को प्रभावित किया है। सरकारी तेल कंपनी की कमजोर वित्तीय स्थिति और वर्षों से चले आ रहे आर्थिक एवं राजनीतिक संकट ने भी तेल क्षेत्र की मुश्किलें बढ़ाई हैं। नतीजा यह रहा कि जमीन के नीचे भारी मात्रा में तेल होने के बावजूद उसे निकालने और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की क्षमता सीमित रही।
मादुरो के बाद बदले अमेरिका-वेनिजुएला संबंध
अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदलाव आया। डेल्सी रोड्रिग्ज के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ी और ऊर्जा क्षेत्र सहयोग का प्रमुख केंद्र बन गया। इसके बाद वेनेजुएला ने तेल उद्योग से जुड़े नियमों में बदलाव किए। इन बदलावों से विदेशी कंपनियों के लिए निवेश और उत्पादन में भागीदारी के अधिक अवसर बनने की बात कही गई है।
OPEC के लिए क्यों अहम है डील?
वेनेजुएला OPEC का सदस्य है। अगर नए निवेश के जरिए वहां तेल उत्पादन में बड़ी वृद्धि होती है तो वैश्विक बाजार में अतिरिक्त कच्चा तेल आ सकता है। इससे तेल की कीमतों पर नीचे की ओर दबाव पड़ने की संभावना बन सकती है। OPEC आमतौर पर उत्पादन में बदलाव के जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित करता है। ऐसे में वेनेजुएला का उत्पादन तेजी से बढ़ना संगठन की बाजार रणनीति के लिए चुनौती बन सकता है।


