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अमेरिकी सेना की इराक से पूरी वापसी का ऐलान, 23 साल बाद खत्म होगा सैन्य अभियान

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका को इराक में बड़ी संख्या में सैनिक रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध अब केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा, तेल और कारोबार के क्षेत्र में भी मजबूत हो चुके हैं।

अमेरिकी सेना की इराक से पूरी वापसी का ऐलान, 23 साल बाद खत्म होगा सैन्य अभियान
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वॉशिंगटन/बगदाद: अमेरिका ने इराक से अपनी सैन्य मौजूदगी पूरी तरह खत्म करने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने व्हाइट हाउस में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि अमेरिकी सेना 30 सितंबर 2026 तक इराक से पूरी तरह वापस लौट जाएगी। इस फैसले के साथ वर्ष 2003 में शुरू हुआ अमेरिका का इराक सैन्य अभियान करीब 23 साल बाद समाप्त हो जाएगा। हालांकि, दोनों देशों ने साफ किया है कि सुरक्षा सहयोग, आर्थिक संबंध और व्यापारिक साझेदारी आगे भी जारी रहेगी।

ट्रंप बोले- अब स्थायी सैनिकों की जरूरत नहीं

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका को इराक में बड़ी संख्या में सैनिक रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध अब केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा, तेल और कारोबार के क्षेत्र में भी मजबूत हो चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो अमेरिका इराक की मदद करेगा, लेकिन वहां स्थायी सैन्य तैनाती बनाए रखना अब जरूरी नहीं है। वहीं, इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने भी पुष्टि की कि सितंबर के अंत तक अमेरिकी सैनिकों की वापसी पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां इराक में निवेश और व्यापारिक गतिविधियां पहले की तरह जारी रखेंगी।

2024 के समझौते के तहत हो रही वापसी

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अनुसार, सैनिकों की वापसी अमेरिका और इराक के बीच वर्ष 2024 में हुए समझौते का हिस्सा है। इस समझौते में अमेरिका के नेतृत्व वाले इस्लामिक स्टेट (IS) विरोधी सैन्य मिशन को धीरे-धीरे समाप्त करने का फैसला किया गया था। समझौते के बाद अमेरिका ने इराक में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार कम की। बड़ी संख्या में सैनिक वापस बुलाए गए और कई सैन्य ठिकाने खाली कर दिए गए।

2003 में शुरू हुआ था अमेरिकी अभियान

अमेरिका ने मार्च 2003 में इराक पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। उस समय तत्कालीन इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सरकार को हटाने के लिए अभियान चलाया गया था। अमेरिका ने दावा किया था कि इराक के पास बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियार मौजूद हैं, लेकिन बाद में ऐसे हथियारों के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले। 2007 में इराक में अमेरिकी सैनिकों की संख्या अपने चरम पर पहुंच गई थी। उस समय वहां करीब 1.70 लाख से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात थे। इसके बाद 2011 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए समझौते के तहत ज्यादातर अमेरिकी लड़ाकू सैनिक इराक से वापस लौट गए थे। हालांकि, कुछ सैनिक सुरक्षा सहयोग और दूतावास की सुरक्षा के लिए मौजूद रहे।

ISIS के उभार के बाद फिर लौटी अमेरिकी सेना

2014 में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद इराक सरकार के अनुरोध पर अमेरिका ने दोबारा सैन्य अभियान शुरू किया। इस अभियान का उद्देश्य इस्लामिक स्टेट को कमजोर करना और इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षित करना था। 2021 तक इस्लामिक स्टेट अपने कब्जे वाले अधिकांश बड़े क्षेत्रों से बाहर हो चुका था।

करीब 2500 सैनिकों से शुरू हुई थी नई तैनाती

2024 के समझौते तक इराक में लगभग 2500 अमेरिकी सैनिक प्रशिक्षण और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी संख्या घटाई गई और अब वहां केवल सीमित संख्या में सैन्य सलाहकार मौजूद हैं। 30 सितंबर को अंतिम सैनिकों की वापसी के साथ अमेरिका का इराक में सैन्य अभियान औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

आतंकवाद के खिलाफ अभियान में निभाई अहम भूमिका

पिछले वर्षों में अमेरिकी सैनिकों का मुख्य काम इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देना और आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियानों में सहयोग करना था। अमेरिका ने इराकी सेना की क्षमता बढ़ाने, खुफिया सहयोग देने और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहायता की। जैसे-जैसे इराकी सुरक्षा बल मजबूत हुए, अमेरिका ने अपनी भूमिका को सलाहकार स्तर तक सीमित कर दिया।


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