अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता को बरकरार रखा, ट्रंप का कार्यकारी आदेश असंवैधानिक
अदालत ने 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में स्पष्ट किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर व्यक्ति संविधान के तहत जन्म से ही अमेरिकी नागरिक है।

वाशिंगटन : USA citizenship law: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) के संवैधानिक अधिकार को बरकरार रखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक घोषित कर दिया, जिसमें अवैध या अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के बच्चों को अमेरिकी नागरिकता से वंचित करने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में स्पष्ट किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर व्यक्ति संविधान के तहत जन्म से ही अमेरिकी नागरिक है। यह फैसला अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की उस मूल भावना को दोहराता है, जिसके तहत अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाले अधिकांश लोगों को नागरिकता का अधिकार प्राप्त होता है।
14वें संशोधन की संवैधानिक व्याख्या
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखते हुए कहा कि राष्ट्रपति का कार्यकारी आदेश संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन केवल कानूनी स्थिति वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता की गारंटी देता है, चाहे उनके माता-पिता की आव्रजन स्थिति कुछ भी हो, कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर। रॉबर्ट्स ने अपने निर्णय में कहा कि गृह युद्ध के बाद तैयार किए गए इस संशोधन का उद्देश्य सभी स्वतंत्र रूप से जन्मे लोगों को समान नागरिक अधिकार प्रदान करना था और आज भी न्यायपालिका उसी संवैधानिक वादे को कायम रखे हुए है।
ट्रंप के आदेश पर पहले भी लगी थी रोक
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान एक कार्यकारी आदेश जारी कर यह व्यवस्था लागू करने की कोशिश की थी कि अमेरिका में अवैध या अस्थायी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता न मिले। हालांकि, इस आदेश को लागू होने से पहले ही कई संघीय निचली अदालतों ने रोक लगा दी थी। इसके कारण यह नीति कभी पूरे अमेरिका में प्रभावी नहीं हो सकी। बाद में ट्रंप प्रशासन ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां अंतिम फैसला सरकार के विरुद्ध आया।
बहुमत और असहमति की अलग-अलग राय
सुप्रीम कोर्ट के छह न्यायाधीशों ने बहुमत से ट्रंप के आदेश को असंवैधानिक माना, जबकि तीन रूढ़िवादी (कंजर्वेटिव) न्यायाधीशों ने इससे असहमति जताई। जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने अपने विस्तृत असहमति नोट में कहा कि 14वें संशोधन का मूल उद्देश्य गृह युद्ध के बाद मुक्त कराए गए अश्वेत नागरिकों को समान अधिकार देना था। उनके अनुसार समय के साथ इस संशोधन की ऐसी व्याख्या की गई, जो मूल विधायी मंशा से अलग है। उन्होंने लिखा कि अदालत का यह फैसला संवैधानिक इतिहास की एक नई और विवादित व्याख्या को आगे बढ़ाता है।
आव्रजन नीति पर पड़ेगा व्यापक प्रभाव
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका की आव्रजन नीति और नागरिकता कानूनों पर दूरगामी प्रभाव डालेगा। जन्मजात नागरिकता का सिद्धांत लंबे समय से अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने इसे एक बार फिर मजबूत कानूनी संरक्षण प्रदान किया है। इस निर्णय के बाद भविष्य में किसी भी प्रशासन के लिए केवल कार्यकारी आदेश के जरिए जन्मजात नागरिकता के अधिकार को सीमित करना कठिन माना जा रहा है।
प्रवासी समुदाय ने किया फैसले का स्वागत
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के पूर्व व्हाइट हाउस सलाहकार अजय भुटोरिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय अमेरिका के मूल लोकतांत्रिक मूल्यों और "अमेरिकन ड्रीम" की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन लाखों प्रवासी परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने वर्षों से अमेरिका के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान दिया है। उनके अनुसार अदालत ने यह सुनिश्चित किया है कि संविधान के तहत दिया गया नागरिकता का अधिकार सुरक्षित बना रहे।
संविधान की मूल भावना को मिली मजबूती
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अमेरिकी संवैधानिक इतिहास के महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि जन्मजात नागरिकता का सिद्धांत केवल एक प्रशासनिक नीति नहीं, बल्कि संविधान द्वारा संरक्षित मौलिक अधिकार है। इस फैसले से न केवल लाखों प्रवासी परिवारों को राहत मिली है, बल्कि यह भी संदेश गया है कि संवैधानिक अधिकारों में बदलाव केवल कार्यकारी आदेशों के माध्यम से नहीं किया जा सकता।


