पश्चिम एशिया में बढ़ा अमेरिकी सैन्य जमावड़ा, कतर के बेस पर पैट्रियट मिसाइलों की तैनाती, ईरान भी हाई अलर्ट पर
हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि कतर स्थित अल-उदीद एयर बेस पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को मोबाइल लॉन्चरों पर तैनात किया गया है।

वॉशिंगटन/दोहा/तेहरान। ईरान के साथ बढ़ती तनातनी और समानांतर रूप से जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपने सैन्य जमावड़े को तेज कर दिया है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि कतर स्थित अल-उदीद एयर बेस पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को मोबाइल लॉन्चरों पर तैनात किया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ओमान में परोक्ष परमाणु वार्ताओं को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है, लेकिन जमीन पर सैन्य तैयारियां भी समानांतर रूप से बढ़ती दिख रही हैं। अल-उदीद बेस पश्चिम एशिया में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है और क्षेत्रीय अभियानों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां की गतिविधियों में हालिया बढ़ोतरी ने संकेत दिया है कि अमेरिका संभावित हमले या जवाबी कार्रवाई दोनों परिस्थितियों के लिए तैयारी कर रहा है।
मोबाइल लॉन्चरों पर पैट्रियट की तैनाती
पहले जहां पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को सेमी-स्टैटिक (अर्ध-स्थिर) लॉन्चर स्टेशनों पर रखा जाता था, वहीं अब इन्हें मोबाइल ट्रकों पर तैनात किया गया है। यह बदलाव रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। मोबाइल लॉन्चर हमले की स्थिति में तेजी से स्थान बदल सकते हैं और लक्ष्य भेदने या मिसाइल रक्षा के लिए तुरंत सक्रिय किए जा सकते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका संभावित ईरानी मिसाइल हमले की आशंका को गंभीरता से ले रहा है या फिर किसी आपात स्थिति में आक्रामक प्रतिक्रिया के विकल्प खुले रखना चाहता है।
फॉरेंसिक इमेजरी विश्लेषक विलियम गुडहिंद ने जनवरी और फरवरी की शुरुआत में ली गई सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना के आधार पर बताया कि अल-उदीद क्षेत्र में विमानों और सैन्य उपकरणों की गतिविधियां बढ़ी हैं। तस्वीरों में एम983 हैवी एक्सपेंडेड मोबिलिटी टैक्टिकल ट्रक (HEMTT) पर एमआईएम-104 पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती स्पष्ट दिखी है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के एक प्रवक्ता ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
एयरबेस पर विमानों की बढ़ी मौजूदगी
एक फरवरी को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में अल-उदीद बेस पर आरसी-135 टोही विमान, तीन सी-130 हरक्यूलिस, 18 केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर और सात सी-17 ग्लोबमास्टर विमान दिखाई दिए। इसके अलावा एचईएमटीटी ट्रकों पर 10 एमआईएम-104 पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती दर्ज की गई। दो फरवरी की तस्वीरों में जॉर्डन के मुवफ्फक एयरबेस पर 17 एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान, आठ ए-10 थंडरबोल्ट और चार अज्ञात हेलीकॉप्टर देखे गए। यह तैनाती संकेत देती है कि अमेरिका ने न केवल रक्षात्मक बल्कि आक्रामक क्षमता भी मजबूत की है। पश्चिम एशिया में अमेरिका के अन्य प्रमुख सैन्य अड्डे इराक, जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, तुर्किये और हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया में स्थित हैं। इन ठिकानों के जरिए अमेरिका पूरे क्षेत्र में त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया देने में सक्षम है।
कूटनीति और सैन्य रणनीति साथ-साथ
दिलचस्प बात यह है कि यह सैन्य सक्रियता ऐसे समय सामने आई है जब पिछले शुक्रवार ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष परमाणु वार्ता हुई। दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका “डुअल ट्रैक” नीति पर चल रहा है—एक ओर कूटनीतिक समाधान की कोशिश, दूसरी ओर सैन्य दबाव बनाए रखना। इससे बातचीत की मेज पर अपनी स्थिति मजबूत रखने का प्रयास किया जा रहा है।
ईरान ने भी बढ़ाई तैयारी
दूसरी ओर ईरान ने भी अपनी सैन्य तैयारियों को तेज करने का दावा किया है। तेहरान का कहना है कि गत जून में दो सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद उसने अपने मिसाइल भंडार को फिर से तैयार कर लिया है। ईरान ने भूमिगत मिसाइल परिसरों का निर्माण किया है, जिनमें केर्मानशाह, सेमनान और खाड़ी तट के पास के ठिकाने शामिल हैं। इन अड्डों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे हवाई हमलों से सुरक्षित रह सकें और अचानक जवाबी कार्रवाई कर सकें। 27 जनवरी की सैटेलाइट तस्वीरों में ईरानी नौसेना का ड्रोन वाहक पोत ‘आईआरआईएस शाहिद बघेरी’ बंदर अब्बास से लगभग पांच किलोमीटर दूर समुद्र में तैनात दिखा। 10 फरवरी को भी यह पोत उसी स्थान पर मौजूद था, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान समुद्री मोर्चे पर भी सक्रिय है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
जनवरी से बढ़ता तनाव
जनवरी में ईरान में हुए व्यापक सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बाद स्थिति और जटिल हो गई। आर्थिक बदहाली, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर देशभर में प्रदर्शन हुए। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत की खबरें आईं। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान की कार्रवाई की आलोचना की, जिससे दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई। क्षेत्रीय युद्ध की आशंका भी जताई जाने लगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार ईरान को चेतावनी दी है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी युद्धपोत ईरान की ओर बढ़ रहे हैं और “बुरी चीजें” हो सकती हैं। यह बयान क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने वाला माना गया।
ईरानी राष्ट्रपति की माफी और पश्चिम पर आरोप
इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के लिए पीड़ितों से माफी मांगी है। यह बयान 1979 की इस्लामी क्रांति की वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया गया। हालांकि, उन्होंने प्रदर्शनों को लेकर कथित पश्चिमी दुष्प्रचार की भी निंदा की और कहा कि बाहरी ताकतें देश की स्थिरता को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। ईरान में राजनीतिक अस्थिरता और बाहरी दबाव की यह दोहरी चुनौती क्षेत्रीय समीकरणों को और जटिल बना रही है।
संभावित परिदृश्य
विश्लेषकों के मुताबिक, मौजूदा हालात में तीन संभावित परिदृश्य उभर सकते हैं:
कूटनीतिक सफलता – ओमान में शुरू हुई वार्ता आगे बढ़े और परमाणु समझौते पर कोई नया ढांचा तैयार हो।
सीमित सैन्य झड़प – किसी उकसावे या गलत आकलन के चलते सीमित हवाई या मिसाइल हमले हों।
विस्तृत क्षेत्रीय संघर्ष – यदि प्रत्यक्ष टकराव हुआ तो यह इराक, सीरिया, खाड़ी देशों और यहां तक कि इजराइल को भी प्रभावित कर सकता है।
दुनिया की नजरें टिकी
पश्चिम एशिया एक बार फिर अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद जारी है, तो दूसरी ओर सैन्य तैयारियों में तेजी आई है। कतर के अल-उदीद बेस पर मोबाइल पैट्रियट मिसाइलों की तैनाती और ईरान की जवाबी तैयारी इस बात का संकेत हैं कि दोनों पक्ष किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहते हैं। आने वाले सप्ताह इस क्षेत्र की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं—क्या कूटनीति तनाव कम करेगी या सैन्य तैयारियां किसी बड़े टकराव का संकेत हैं, इस पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।


