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'ट्रंप को कीमत चुकानी पड़ेगी', ईरान के शीर्ष अधिकारी लारीजानी की अमेरिका को खुली चेतावनी

लारीजानी, जो ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के करीबी माने जाते हैं, ने कहा कि ईरान पर हुए हमलों को भुलाया नहीं जाएगा और देश अपनी रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, “हम अपने नेता और अपने लोगों के खून का बदला जरूर लेंगे। ट्रंप को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

ट्रंप को कीमत चुकानी पड़ेगी, ईरान के शीर्ष अधिकारी लारीजानी की अमेरिका को खुली चेतावनी
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तेहरान/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान के वरिष्ठ नेता और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने नेताओं और नागरिकों की मौत का बदला जरूर लेगा और इसके लिए ट्रंप को कीमत चुकानी पड़ेगी। लारीजानी, जो ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के करीबी माने जाते हैं, ने कहा कि ईरान पर हुए हमलों को भुलाया नहीं जाएगा और देश अपनी रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, “हम अपने नेता और अपने लोगों के खून का बदला जरूर लेंगे। ट्रंप को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

अमेरिका-ईरान-इस्राइल टकराव के बीच आया बयान

लारीजानी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। हाल के दिनों में दोनों पक्षों की ओर से कई हमले और जवाबी हमले किए गए हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है। लारीजानी ने दावा किया कि ईरान अमेरिकी और इस्राइली ठिकानों को निशाना बना रहा है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इस्राइल का मकसद ईरान की राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करना और देश को विभाजित करना है।

अमेरिका पर ‘वेनेजुएला जैसी स्थिति’ बनाने का आरोप

ईरानी नेता ने अमेरिका पर यह भी आरोप लगाया कि वह ईरान में वेनेजुएला जैसी राजनीतिक स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है। लारीजानी के अनुसार वाशिंगटन ऐसी रणनीति अपना रहा है जिससे ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा हो और वहां की सरकार कमजोर पड़े। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति का उद्देश्य ईरान की राजनीतिक और सैन्य ताकत को कमजोर करना है, लेकिन ईरान इसके सामने झुकने वाला नहीं है।

ट्रंप का पलटवार: “कौन हैं लारीजानी, मुझे परवाह नहीं”

लारीजानी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन धमकियों को खारिज कर दिया। ट्रंप ने सीबीएस न्यूज़ से बातचीत में कहा कि उन्हें लारीजानी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और उनके बयान से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं पता कि वह क्या कह रहे हैं और वह कौन हैं। मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान पहले ही इस संघर्ष में कमजोर पड़ चुका है। ट्रंप ने दोहराया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहेंगे और तेहरान को अंततः “बिना शर्त आत्मसमर्पण” करना पड़ेगा।

क्षेत्रीय ठिकानों को लेकर चेतावनी

लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में खाड़ी क्षेत्र के देशों को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश अमेरिका को अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करने की अनुमति देता है, तो ईरान के पास जवाबी कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। उन्होंने लिखा, जब दुश्मन इस क्षेत्र में मौजूद ठिकानों से हम पर हमला करता है, तो हम जवाब देते हैं और आगे भी देते रहेंगे।

अमेरिकी सैनिकों को पकड़ने का दावा

इससे पहले लारीजानी ने एक और दावा किया था जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी। उन्होंने कहा कि ईरान ने कई अमेरिकी सैनिकों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें ईरानी जेलों में रखा गया है। हालांकि अमेरिका ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। अमेरिकी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक है और यह ईरान की गलत सूचना फैलाने की कोशिश का हिस्सा है।

हताहतों के आंकड़ों पर भी विवाद

लारीजानी ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका युद्ध में मारे गए अपने सैनिकों की वास्तविक संख्या छिपा रहा है। उनके अनुसार अमेरिकी हमलों और झड़पों में 500 से अधिक अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, जबकि वाशिंगटन इससे कहीं कम संख्या बता रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका धीरे-धीरे मरने वालों की संख्या बढ़ाता है और कई बार मौतों को दुर्घटनाओं या अन्य कारणों से जोड़ देता है।

क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका

विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच इस तरह के तीखे बयान पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को और जटिल बना सकते हैं। ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ते टकराव का असर पहले ही खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक राजनीति पर पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम हो पाता है या यह संघर्ष और बड़े सैन्य टकराव का रूप लेता है।

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