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तेहरान के आसमान में काला धुआं, तेल ठिकानों पर हमलों के बाद ‘जहरीली बारिश’ का खतरा
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि हालिया हमलों के बाद जहरीली एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने की संभावना है, जो लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।

तेहरान: US Iran War: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। रविवार को शहर का आसमान काले धुएं के घने गुबार से ढक गया, जिससे हवा में जहरीले तत्व फैलने की आशंका बढ़ गई है। ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि हालिया हमलों के बाद जहरीली एसिड रेन (अम्लीय वर्षा) होने की संभावना है, जो लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है। बताया जा रहा है कि तेहरान और उसके आसपास स्थित तेल ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए गए, जिसके बाद कई जगहों पर बड़े धमाके हुए और भीषण आग लग गई।
तेल ठिकानों पर हमले के बाद फैला काला धुआं
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार हमलों के बाद तेल प्रतिष्ठानों में लगी आग की लपटें काफी ऊंचाई तक उठती दिखाई दीं। इन विस्फोटों से उठने वाला घना काला धुआं पूरे इलाके में फैल गया, जिससे हवा की गुणवत्ता तेजी से खराब हो गई। शहर के कई हिस्सों में लोगों को सांस लेने में दिक्कत और प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति ने राजधानी के करीब एक करोड़ (10 मिलियन) लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
BREAKING: The people of Tehran woke up to toxic acid rain after the U.S. & Israel bombed oil storage facilities. 10 million people exposed to a serious environmental hazard that causes chemical burns to the skin & damage to the lungs because of war crimes committed by pedophiles. pic.twitter.com/d08EDp8iEI
— Power to the People ☭🕊 (@ProudSocialist) March 8, 2026
‘जहरीली बारिश’ की चेतावनी
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने कहा है कि तेल संयंत्रों में लगी आग और हवा में फैले रासायनिक कणों के कारण बारिश एसिड रेन में बदल सकती है। ऐसी बारिश मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार अम्लीय वर्षा के संपर्क में आने से त्वचा पर केमिकल बर्न हो सकता है, आंखों में जलन और नुकसान हो सकता है, सांस के जरिए शरीर में जाने पर फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि अधिकारियों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
लोगों को घरों में रहने की सलाह
तेहरान में बिगड़ते हालात को देखते हुए रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में लोगों को तेल ठिकानों पर लगी आग से फैलने वाले जहरीले पदार्थों के खतरे के बारे में आगाह किया गया है। अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वे जहां तक संभव हो घर के अंदर ही रहें और प्रदूषित हवा के संपर्क से बचें। इसके अलावा चेतावनी दी गई है कि अगर बारिश होती है तो लोगों को बारिश के तुरंत बाद बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि उस समय हवा और पानी में रासायनिक कणों की मात्रा अधिक हो सकती है।
जहरीले कणों से बचाव के लिए सुझाव
रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने यह भी कहा है कि अगर किसी व्यक्ति ने काले धुएं से निकलने वाले कणों को सांस के जरिए अंदर ले लिया हो, तो कुछ सावधानियां अपनानी चाहिए। इसके तहत लोगों को नमकीन पानी से गरारे करने की सलाह दी गई है, ताकि गले और श्वसन तंत्र में मौजूद हानिकारक कणों को कम किया जा सके। साथ ही मास्क पहनने और खुले स्थानों में जाने से बचने की भी सलाह दी गई है।
हजारों नागरिक ढांचे को नुकसान
रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, हालिया हमलों में देशभर में करीब 10,000 नागरिक ढांचे (सिविलियन स्ट्रक्चर) को नुकसान पहुंचा है। इनमें औद्योगिक प्रतिष्ठान, इमारतें और अन्य बुनियादी ढांचे शामिल बताए जा रहे हैं। स्थानीय मीडिया का दावा है कि युद्ध के दौरान किसी बड़े सिविल इंडस्ट्रियल इलाके को इस तरह निशाना बनाए जाने की यह संभवतः पहली घटना हो सकती है।
लोगों में दहशत का माहौल
तेहरान और आसपास के इलाकों में विस्फोटों के बाद से लोगों में दहशत का माहौल है। आसमान में छाए काले धुएं और संभावित जहरीली बारिश की चेतावनी ने आम नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है। कई लोग घरों में रहने को मजबूर हैं और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं।
बढ़ सकता है पर्यावरणीय संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल संयंत्रों में लगी आग लंबे समय तक जलती रही, तो इसका असर केवल तत्काल प्रदूषण तक सीमित नहीं रहेगा।
इससे वायु गुणवत्ता, जल स्रोतों और पर्यावरण पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। मिडिल ईस्ट में पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच तेहरान में उत्पन्न यह स्थिति अब मानवीय और पर्यावरणीय संकट का रूप भी ले सकती है।
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