ईरान का कुवैत में अमेरिकी बेस पर हमला, ओमान तट पर जहाज निशाने पर
मंगलवार सुबह कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को कम से कम तीन ड्रोन से निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह हमला ईरान की आईआरजीसी से जुड़ा था।

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता से पहले पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंगलवार सुबह ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े कथित ड्रोन हमलों और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एक अलग घटना ने क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके पास समझौते का "आखिरी मौका" है।
कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमले का दावा
मंगलवार सुबह कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को कम से कम तीन ड्रोन से निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह हमला ईरान की आईआरजीसी से जुड़ा था। हालांकि, इस घटना को लेकर अमेरिका, कुवैत या ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। साथ ही किसी प्रकार के नुकसान या हताहत होने की भी पुष्टि नहीं हुई है। स्वतंत्र स्रोतों से भी इस दावे का सत्यापन नहीं हो सका है।
ओमान के तट के पास मालवाहक जहाज पर हमला
इसी बीच ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने जानकारी दी कि ओमान के तट के निकट एक मालवाहक जहाज किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया। एजेंसी ने घटना की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रोजेक्टाइल किसने दागा और घटना के पीछे किसका हाथ हो सकता है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं।
ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी
इन घटनाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के साथ जारी बातचीत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन ईरानी नेतृत्व का रवैया विरोधाभासी रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के सामने अब केवल दो विकल्प हैं—समझौता या उसके परिणामों का सामना करना। उन्होंने कहा कि यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बयान
ट्रंप ने अपने संदेश में होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि यह सामरिक समुद्री मार्ग अमेरिकी नियंत्रण में है और वहां नौसैनिक गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में नौवहन से जुड़े प्रतिबंधों और नाकेबंदी जैसे मुद्दे ईरान के व्यवहार पर निर्भर करेंगे। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और विभिन्न देशों की नौसेनाएं वहां अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत गतिविधियां संचालित करती हैं। ट्रंप के इस दावे पर कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय पुष्टि सामने नहीं आई है।
ईरान ने बातचीत से किया इनकार
ट्रंप के बयान से पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने एक साक्षात्कार में कहा था कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी नई बातचीत की प्रक्रिया नहीं चल रही है। उन्होंने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच औपचारिक वार्ता का दावा सही नहीं है। यही विरोधाभासी बयान दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक अनिश्चितता को और बढ़ाते हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव का असर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर प्रभाव डाल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता आगे नहीं बढ़ती या सुरक्षा घटनाएं बढ़ती हैं, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर दोनों देशों की अगली कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियों पर बनी हुई है।


