ट्रंप की धमकी से बिगड़ा माहौल, सिर्फ 80 मिनट ही चली अमेरिका-ईरान वार्ता
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गलीबाफ ने वार्ता के दौरान ट्रंप की टिप्पणियों पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी धमकियों का तेहरान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और ईरान अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।

बर्जेनस्टाक : US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित शांति वार्ता रविवार को स्विट्जरलैंड के बर्जेनस्टाक में शुरू हुई, लेकिन पहले ही दौर में इस पर संकट के बादल मंडराने लगे। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और विभिन्न विवादों पर आगे की बातचीत का रास्ता तैयार करना था। हालांकि, करीब 80 मिनट चली शुरुआती बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयान ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। ट्रंप की टिप्पणियों के विरोध में ईरानी प्रतिनिधिमंडल बैठक छोड़कर बाहर निकल गया और उसने सामूहिक फोटो सत्र में भी हिस्सा नहीं लिया। हालांकि, एक रिपोर्ट के अनुसार वार्ता पूरी तरह विफल नहीं हुई है, बल्कि फिलहाल इसे अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
14 बिंदुओं वाले मसौदे पर होनी थी तकनीकी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाले प्रारंभिक समझौता मसौदे के तकनीकी पहलुओं पर अगले 60 दिनों तक चर्चा की योजना थी। इन वार्ताओं का उद्देश्य अंतिम समझौते तक पहुंचना था। लेकिन इसी दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त बयान देते हुए कहा कि यदि तेहरान लेबनान में हिजबुल्ला की गतिविधियों को नियंत्रित नहीं करता, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरानी चेतावनी पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर इस रणनीतिक मार्ग को बंद करने की कोशिश की गई तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा।
यूरेनियम संवर्धन पर बयान से और बढ़ा विवाद
तनाव उस समय और बढ़ गया जब ट्रंप ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरानी नेतृत्व को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए, अन्यथा अमेरिका कठोर कदम उठा सकता है। इस बयान के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता में विरोध दर्ज कराया और बातचीत को रोक दिया।
ईरान ने कहा- धमकियों से नहीं पड़ता कोई असर
ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गलीबाफ ने वार्ता के दौरान ट्रंप की टिप्पणियों पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी धमकियों का तेहरान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और ईरान अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। गलीबाफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि अगर अमेरिकी दबाव और धमकियां प्रभावी होतीं, तो वाशिंगटन आज जिस स्थिति का सामना कर रहा है, वहां नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरान की सशस्त्र सेनाएं अलग तरीके से जवाब देने के लिए तैयार हैं।
वार्ता टूटी नहीं, अस्थायी रूप से रोकी गई
हालांकि कुछ रिपोर्टों में प्रतिनिधिमंडल के बहिष्कार की बात कही गई, लेकिन ईरान की फार्स समाचार एजेंसी ने दावा किया कि दोनों पक्ष अपने-अपने स्तर पर आंतरिक चर्चा के लिए लौटे हैं। आगे की रणनीति और प्रस्तावों पर विचार करने के लिए वार्ता को अस्थायी रूप से रोका गया है। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल इसे वार्ता का पूर्ण विफल होना नहीं माना जा रहा है और आने वाले दिनों में बातचीत फिर शुरू होने की संभावना बनी हुई है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने की ईरान के संयम की सराहना
वार्ता के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के संयम की सराहना की। उन्होंने कहा कि ईरान का रवैया यह दर्शाता है कि वह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। शहबाज शरीफ ने इस अवसर पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भी प्रशंसा करते हुए उन्हें शांति स्थापित करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला नेता बताया।
उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल हुए शामिल
अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर वार्ता में शामिल हुए। वहीं ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष एम.बी. गलीबाफ के नेतृत्व में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, अली बाघेरी कानी और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती मौजूद रहे। इसके अलावा कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुलरहमान अल थानी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रोसी भी बैठक में शामिल हुए।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बाजारों में बढ़ी चिंता
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती तनातनी का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली एजेंसियों के मुताबिक रविवार को इस मार्ग से किसी जहाज के गुजरने की पुष्टि नहीं हुई, जबकि अमेरिका का दावा है कि पिछले 24 घंटों में 67 जहाज इस रास्ते से निकले हैं। तनाव के चलते खाड़ी देशों के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दबाव देखने को मिल सकता है।


