Top
Begin typing your search above and press return to search.

गौतम अदाणी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग का बड़ा रुख, कहा- अभियोजन कानूनी रूप से कमजोर और कूटनीतिक रूप से नुकसानदेह था

यह जवाब उस समय सामने आया जब अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गरौफिस ने न्याय विभाग से पूछा कि वह इस मामले को स्थायी रूप से समाप्त करने की मांग क्यों कर रहा है। इससे पहले विभाग ने केस समाप्त करने के लिए आवेदन तो दिया था, लेकिन उसमें निर्णय के पीछे के कारणों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया था।

गौतम अदाणी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग का बड़ा रुख, कहा- अभियोजन कानूनी रूप से कमजोर और कूटनीतिक रूप से नुकसानदेह था
X

न्यूयार्क : अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice-DOJ) ने भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी और अन्य सात लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को समाप्त करने के अपने फैसले का अदालत में विस्तृत बचाव किया है। विभाग ने संघीय अदालत में दाखिल 10 पन्नों के दस्तावेज में कहा कि यह अभियोजन कानूनी रूप से कमजोर, कूटनीतिक दृष्टि से नुकसानदेह और वर्तमान प्रशासन की प्रवर्तन (Enforcement) प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था। विभाग का यह भी कहना है कि इस मामले को या तो पहले ही बंद कर दिया जाना चाहिए था या फिर इसे शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था।

अदालत ने मांगा था विस्तृत स्पष्टीकरण

यह जवाब उस समय सामने आया जब अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गरौफिस ने न्याय विभाग से पूछा कि वह इस मामले को स्थायी रूप से समाप्त करने की मांग क्यों कर रहा है। इससे पहले विभाग ने केस समाप्त करने के लिए आवेदन तो दिया था, लेकिन उसमें निर्णय के पीछे के कारणों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया था। न्यायाधीश ने विभाग को निर्देश दिया था कि वह अदालत के समक्ष स्पष्ट करे कि किन कानूनी और प्रशासनिक आधारों पर इस मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। इसके बाद DOJ ने अपना विस्तृत पक्ष अदालत में प्रस्तुत किया।

बाइडन प्रशासन के दौरान दर्ज हुआ था मामला

यह मामला वर्ष 2024 में तत्कालीन बाइडन प्रशासन के दौरान दर्ज किया गया था। उस समय अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया था कि गौतम अदाणी और अन्य आरोपित भारतीय सरकारी अधिकारियों को लगभग 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की कथित रिश्वत देने की योजना में शामिल थे। आरोप यह भी था कि इस कथित योजना के समानांतर निवेशकों के समक्ष भ्रामक जानकारी प्रस्तुत कर अरबों डॉलर का निवेश जुटाने का प्रयास किया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने अमेरिकी निवेशकों से कम से कम 17.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की पूंजी जुटाई थी।

DOJ ने बताया मामला मुख्य रूप से भारत से जुड़ा

अपने ताजा दस्तावेज में अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि यह मूल रूप से भारत से संबंधित मामला है। विभाग के अनुसार, इसमें भारतीय नागरिक, भारत सरकार के अनुबंध और भारत की बिजली व्यवस्था शामिल है। इसलिए यह ऐसा विषय है जिसे भारतीय संस्थाएं स्वयं संभालने में सक्षम हैं। DOJ ने अदालत में कहा कि अमेरिका को हर अंतरराष्ट्रीय कारोबारी विवाद में हस्तक्षेप कर "दुनिया की पुलिस" की भूमिका नहीं निभानी चाहिए। विभाग का तर्क है कि यदि किसी मामले का मुख्य केंद्र किसी दूसरे देश की प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था है, तो उस देश की संस्थाओं को प्राथमिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलना चाहिए।

भारतीय जांच का भी दिया हवाला

अमेरिकी न्याय विभाग ने अपने पक्ष में यह भी कहा कि भारतीय एजेंसियां इस मामले की जांच कर चुकी हैं और अब तक किसी गैरकानूनी गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है। विभाग ने संकेत दिया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अमेरिकी स्तर पर आपराधिक मुकदमे को आगे बढ़ाने का पर्याप्त औचित्य नहीं बनता। हालांकि, दस्तावेज में भारतीय जांच एजेंसियों का नाम या विस्तृत जांच रिपोर्ट का उल्लेख सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया।

निवेशकों को नुकसान नहीं होने का दावा

DOJ ने अदालत में यह भी कहा कि इस मामले में अमेरिकी निवेशकों को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान होने के प्रमाण सामने नहीं आए हैं। विभाग के अनुसार, जिन ऋणों और निवेशों का उल्लेख किया गया था, वे या तो पूरी तरह चुकाए जा चुके हैं या उनका प्रबंधन सामान्य रूप से जारी है। विभाग का कहना है कि अभियोजन के दौरान ऐसे ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिनसे यह साबित हो कि निवेशकों को वास्तविक वित्तीय हानि हुई हो।

धोखाधड़ी के आरोपों पर भी उठाए सवाल

न्याय विभाग ने धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों की कानूनी मजबूती पर भी प्रश्न उठाए। दस्तावेज में कहा गया कि निवेशकों के समक्ष कंपनी द्वारा दिए गए कई बयान सामान्य कॉरपोरेट प्रचार या व्यावसायिक दावों की श्रेणी में आते हैं। ऐसे बयानों को स्वतः आपराधिक धोखाधड़ी का आधार नहीं माना जा सकता। DOJ का तर्क है कि अभियोजन पक्ष के पास ऐसे पर्याप्त कानूनी आधार नहीं थे, जिनके आधार पर आरोपों को अदालत में सफलतापूर्वक सिद्ध किया जा सके।

ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं का भी उल्लेख

न्याय विभाग ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान ट्रंप प्रशासन की प्रवर्तन नीति उन मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित करती है, जिनका सीधा और महत्वपूर्ण प्रभाव अमेरिकी राष्ट्रीय हितों तथा घरेलू कानून व्यवस्था पर पड़ता हो। विभाग के अनुसार, अदाणी प्रकरण इन प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था। इसलिए प्रशासन ने मामले का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद इसे आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया।

मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

गौतम अदाणी भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल हैं और उनका कारोबारी समूह ऊर्जा, बंदरगाह, हवाई अड्डे, लॉजिस्टिक्स और आधारभूत ढांचा जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय है। ऐसे में इस मामले पर अमेरिकी न्याय विभाग का बदला हुआ रुख वैश्विक निवेशकों, वित्तीय बाजारों और भारत-अमेरिका के कारोबारी संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अदालत का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है और वही यह तय करेगा कि इस बहुचर्चित मामले का कानूनी निष्कर्ष क्या होगा।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it