अमेरिका-ईरान ने एक-दूसरे पर फिर किए हमले, पांच लोगों की मौत
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जर्मनी के ऑग्सबुर्ग शहर में हुआ विस्फोट, दो लोग घायल
दक्षिणी जर्मनी के ऑग्सबुर्ग शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन के पास बुधवार, 2 सितंबर की सुबह हुए एक धमाके में दो लोग मामूली रूप से घायल हो गए. पुलिस के अनुसार यह धमाका किसी अज्ञात वस्तु में हुआ. धमाके से आस-पास की खिड़कियों के शीशे टूट गए और घायलों की सुनने की क्षमता में मामूली नुकसान हुआ है.
धमाके के कारणों और परिस्थितियों का अभी तक पता नहीं चल सका है. पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि मामले की जांच के लिए बवेरियन स्टेट क्रिमिनल पुलिस ऑफिस के विस्फोटक विशेषज्ञ मौके पर मौजूद हैं. पुलिस ने स्टेशन को पूरी तरह से सील कर दिया है. एहतियात के तौर पर स्टेशन से चलने वाली सभी ट्रेन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है.
ईरान में ईंधन की किल्लत, फ्यूल स्टेशनों पर लग रहीं लंबी लाइनें
युद्ध की वजह से हुए नुकसान, आयात पर लगी पाबंदियों और अमेरिका के नए आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान के लिए ईंधन की आपूर्ति सीमित कर दी है, जिसके चलते देश के फ्यूल स्टेशनों पर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं. ईरान के विभिन्न शहरों में ड्राइवर शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें ईंधन भरवाने के लिए लाइन में घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है.
कराज शहर के एक निवासी ने डीडब्ल्यू को बताया कि कुछ फ्यूल स्टेशनों पर एक व्यक्ति को अधिकतम पांच लीटर ईंधन खरीदने की ही अनुमति है. उन्होंने कहा, “कल मैं कई स्टेशनों पर गया. कुछ बंद थे, कुछ के पास पेट्रोल नहीं था और बाकी के बाहर बेहद लंबी लाइनें लगी थीं.” उन्होंने बताया कि वे अगले दिन सुबह छह बजे गए लेकिन तब भी उन्हें लंबी लाइन मिली.
ईरान में डीजल भरवाना और अधिक मुश्किल हो गया है. ट्रक ड्राइवरों का कहना है कि प्रमुख शहरों में फ्यूल स्टेशनों पर एक किलोमीटर से भी लंबी लाइनें मिल सकती हैं, जिससे उन्हें पर्याप्त ईंधन भरवाने के लिए रात भर इंतजार करना पड़ता है. इससे उनकी आमदनी भी प्रभावित हो रही है. एक ड्राइवर ने कहा, "हमारी पूरी जिंदगी या तो डीजल लाइन में या फिर सड़क पर ही बीतती है."
ईरान हर दिन लगभग 1.5 करोड़ लीटर पेट्रोल की कमी का सामना कर रहा है. अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी के चलते उसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने में मुश्किल आ रही है. वहीं, उसका घरेलू उत्पादन इतना नहीं है कि पूरी मांग की भरपाई की जा सके. इस बीच पेट्रोल में 0.5 फीसदी मेथेनॉल मिलाने पर भी विवाद हो रहा है. आलोचकों का आरोप है कि इससे ईंधन की गुणवत्ता कम हो रही है.
भारत अपनी सौर ऊर्जा क्षमता का पूरा उपयोग क्यों नहीं कर पा रहा है
इस साल गर्मी के महीनों में भारत में बिजली की मांग अपने सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई क्योंकि लोग गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनर जैसे उपकरणों का अधिक इस्तेमाल कर रहे थे. इसके बावजूद कई स्वच्छ ऊर्जा उत्पादकों को अपना उत्पादन सीमित करने के लिए कहा गया क्योंकि देश में ग्रिड की क्षमता से अधिक स्वच्छ बिजली उपलब्ध थी.
सरकारी आंकड़ों और एनर्जी थिंक टैंक एम्बर की रिसर्च के अनुसार, पिछले 15 महीनों में भारत ने सौर ऊर्जा उत्पादन में लगभग 11 टेरावॉट-घंटे की कटौती की. इतनी बिजली से एक करोड़ घरों को बिजली की आपूर्ति की जा सकती थी. भारत में इस साल अत्यधिक गर्मी और कमजोर मानसून की वजह से बिजली की मांग बढ़ गई थी, इसके बावजूद देश की सौर ऊर्जा क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाया.
कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए भारत सरकार तेजी से स्वच्छ ऊर्जा खासतौर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है. हालांकि, ट्रांसमिशन, भंडारण क्षमता और जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा से स्वच्छ ऊर्जा पर शिफ्ट होने में आ रही तकनीकी दिक्कतों के चलते भारत अपनी पूरी स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है. विशेषज्ञ इसे भारत के ऊर्जा परिवर्तन के लिए अगली बड़ी चुनौती बता रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि अब सिर्फ सोलर और विंड फार्म बनाने से काम नहीं चलेगा. भारत को अब अधिक ट्रांसमिशन लाइनों की जरूरत है, ताकि बिजली को देशभर में एक जगह से दूसरी जगह पर भेजा जा सके. बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की जरूरत है ताकि स्वच्छ ऊर्जा को जरूरत पड़ने तक स्टोर करके रखा जा सके और एक लचीले पावर सिस्टम की जरूरत है जो स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन के हिसाब से खुद को ढाल सके.
जर्मनी खरीदेगा इस्राएल की 'लोरा' मिसाइल, ऐसा क्या खास है इस मिसाइल में?
जर्मन नौसेना प्रवक्ता के अनुसार एक युद्धपोत ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में इस्राएल के 'लोरा' मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण किया है. इस गुप्त सैन्य अभियान के बाद अब जर्मनी 500 किलोमीटर से अधिक रेंज वाली इन मिसाइलों को खरीदने की तैयारी तेज करेगा.
परीक्षण के लिए आयरलैंड और आइसलैंड के बीच समुद्र में दो जर्मन फ्रिगेट तैनात किए गए थे. नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल यान क्रिश्चियन काक ने बताया कि बैलिस्टिक मिसाइल के सफल प्रक्षेपण ने नौसैनिक इतिहास रचा है. उन्होंने कहा कि यह सिस्टम जर्मन जहाजों पर सफलतापूर्वक तैनात किया जा सकता है. इसकी क्षमता पुरानी सभी मिसाइलों से अधिक है.
'लोरा' इस्राएल में विकसित और निर्मित एक बैलिस्टिक मिसाइल है. इसका लॉन्चर जहाजों पर तेजी से तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है. यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद शुरू किए गए रक्षा कार्यक्रमों के तहत इस मिसाइल प्रणाली की खरीद की जाएगी. इसका मुख्य उद्देश्य मॉस्को को हमलों से रोकना और जर्मनी की रक्षा तैयारियों को मजबूत करना है.
हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा: यूएन
संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन की एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि हिमालय क्षेत्र में भविष्य में ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा है. इसके चलते ना सिर्फ जलविद्युत ऊर्जा पर संकट छा जाएगा बल्कि नदियों के तटों के पास रहने वाले लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं. यूएन की सहायक महासचिव कन्नी विग्नराजा ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि लाखों की संख्या में लोग इस खतरे से प्रभावित हो सकते हैं.
शोधकर्ताओं ने साल 2020 में नेपाल, चीन और भारत में 47 संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियर झीलों की पहचान की थी. बाद में अनुमान लगाया गया कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. कन्नी विग्नराजा ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर फ्लड के साथ-साथ ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा भी बढ़ रहा है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के चलते ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज हो गई है.
नेपाल में पिछले हफ्ते विनाशकारी बाढ़ भी एक ग्लेशियर के कुछ हिस्सों के टूटकर गिरने की वजह से आई थी. इस बाढ़ में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है. नेपाल के 10 से अधिक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी इसकी चपेट में आए. इन परियोजनाओं की सुरंगों में भी बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाए जाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन अभी तक कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है.
जर्मनी ने असफल ड्रोन हमले के लिए रूस को ठहराया जिम्मेदार, पुतिन ने दिया जवाब
जर्मनी ने मंगलवार, 1 सितंबर को आरोप लगाया कि अगस्त में लाइपजिग-हाले हवाई अड्डे पर हुए असफल ड्रोन हमले के लिए रूस जिम्मेदार है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जर्मनी के इस आरोप को "गंभीर भूल" करार दिया है. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन के बाद किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में पुतिन ने जर्मनी के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने सबूतों को गढ़ा हुआ बताते हुए कहा कि चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की सरकार का रुख घरेलू राजनीति से प्रेरित है.
जर्मनी के गृह मंत्री आलेक्जांडर दोबरिंट के अनुसार पुलिस जांच और खुफिया जानकारी इसी ओर इशारा करती हैं. 4 अगस्त को हवाई अड्डे के सुरक्षा क्षेत्र में विस्फोटकों से लैस एक ड्रोन मिला था, जिससे उड़ानों को रोकना पड़ा था.
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने जवाब में कड़े कदमों की घोषणा की है. इसके तहत 18 सितंबर को बॉन में रूस का वाणिज्य दूतावास बंद कर दिया जाएगा. साथ ही बर्लिन स्थित 'रूसी हाउस' सांस्कृतिक संस्थान की लीज भी समाप्त कर दी जाएगी.
अमेरिका-ईरान के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव, दोनों देशों ने किए हमले
अमेरिका और ईरान ने एक बार फिर एक-दूसरे पर सैन्य हमले किए हैं. अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने मंगलवार, 1 सितंबर को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एयर डिफेंस, रडार सिस्टम और अन्य ठिकानों पर हमले किए. जवाब में ईरान ने भी जॉर्डन और इराक में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया. ईरानी मीडिया के मुताबिक हमले बहरीन में भी हुए हैं.
ईरान के मुताबिक अमेरिका के एक हमले में एक शादी समारोह की जगह पर पांच लोगों की मौत हुई और दर्जनों नागरिक घायल हुए. वहीं जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसी 13 मिसाइलों में से 10 को मार गिराया. बहरीन ने भी ईरानी ड्रोनों को नष्ट करने का दावा किया है.
जॉर्डन में किसी अमरीकी सैनिक के मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई है. दो अमेरिकी अधिकारियों ने हताहतों की खबरों को खारिज किया है. उत्तरी इराक के एरबिल में अमेरिकी ठिकानों पर हमले की बात भी अमेरिका या इराक ने नहीं स्वीकारी है. जुलाई के बाद दोनों देशों के बीच यह सबसे गंभीर सैन्य टकराव है.


