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AI पर ट्रंप के करीबियों और डेमोक्रेट सीनेटर की एक राय, सैंडर्स-बैनन बोले- विकास की रफ्तार पर लगाम जरूरी

बर्नी सैंडर्स ने एआई को मानवता के सामने उभरती बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के तेजी से विस्तार का असर रोजगार पर पड़ सकता है और आने वाले समय में बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

AI पर ट्रंप के करीबियों और डेमोक्रेट सीनेटर की एक राय, सैंडर्स-बैनन बोले- विकास की रफ्तार पर लगाम जरूरी
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वॉशिंगटन: अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और इसके संभावित प्रभावों को लेकर राजनीतिक मतभेदों के बीच एक असामान्य समानता देखने को मिली। डेमोक्रेटिक सीनेटर बर्नी सैंडर्स और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी रहे स्टीव बैनन ने मंगलवार को एक ही कार्यक्रम में एआई के विकास, रोजगार और सुरक्षा से जुड़े जोखिमों पर चिंता जताई। दोनों ने एआई के विकास की निगरानी और इससे जुड़े सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की जरूरत बताई।

हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एआई को लेकर उठाई जा रही चिंताओं को अलग नजरिए से देखा है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका में एआई कंपनियों की निगरानी और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पहले से ही पर्याप्त कानूनी और नियामकीय व्यवस्था मौजूद है। ट्रंप ने यह भी कहा कि एआई को लेकर लगातार आशंकाएं जताने से चीन को फायदा हो सकता है।

सैंडर्स बोले- मानव नियंत्रण से बाहर हुआ AI तो गंभीर परिणाम

बर्नी सैंडर्स ने एआई को मानवता के सामने उभरती बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के तेजी से विस्तार का असर रोजगार पर पड़ सकता है और आने वाले समय में बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। सैंडर्स ने यह चिंता भी जताई कि यदि एआई सिस्टम मानव नियंत्रण से बाहर चले गए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ प्रस्तावित बैठक के दौरान एआई के विकास को अस्थायी रूप से रोकने या उसकी रफ्तार सीमित करने को लेकर बातचीत की दिशा में प्रयास करने की अपील की।

बैनन ने भी विकास धीमा करने की जरूरत बताई

ट्रंप के पूर्व करीबी सहयोगी स्टीव बैनन ने भी एआई को मौजूदा दौर के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल बताया। उनका कहना था कि एआई के विकास की गति को कुछ समय के लिए धीमा किया जाना चाहिए, ताकि इसके संभावित प्रभावों और जोखिमों को बेहतर तरीके से समझा जा सके। बैनन ने अमेरिकी कांग्रेस की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपने स्तर पर एआई से जुड़े नियम बनाने से रोकने के बजाय उन्हें नियमन के लिए अपने उपाय तय करने की गुंजाइश दी जानी चाहिए।

चिंता सिर्फ नौकरी और सुरक्षा तक सीमित नहीं

अमेरिका में एआई को लेकर सार्वजनिक बहस अब केवल तकनीकी सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। रोजगार, ऊर्जा खपत और डाटा सेंटरों की बढ़ती जरूरत भी चर्चा के विषय बन रहे हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक करीब 7 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों को चिंता है कि एआई आधारित डाटा सेंटरों के विस्तार से बिजली की लागत बढ़ सकती है। एआई मॉडल और उनसे जुड़े डाटा सेंटर बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग क्षमता और ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में तकनीक के विस्तार का असर बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं की लागत पर पड़ने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

ट्रंप ने सुरक्षा चिंताओं को किया खारिज

एआई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इन आशंकाओं को कमतर बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में एआई कंपनियों के लिए पहले से ही कई आपराधिक और नियामकीय कानून मौजूद हैं। ट्रंप ने एआई और डाटा सेंटर उद्योग के खिलाफ चल रही कथित मुहिम को भी नुकसानदेह बताया। उनके मुताबिक, एआई के खिलाफ लगातार चिंता और आलोचना से अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है और इसका लाभ चीन को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई के विकास के लिए अमेरिका को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है और उनके अनुसार उनके प्रशासन के पास ऐसा नेतृत्व मौजूद है।

AI उद्योग के भीतर से भी उठ रही आवाजें

एआई को लेकर चिंता केवल राजनेताओं तक सीमित नहीं है। तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच भी इसके संभावित जोखिमों पर बहस चल रही है। पिछले सप्ताह एंथ्रोपिक के शोधकर्ता जैकब काक्सन के इस्तीफे का भी इस संदर्भ में उल्लेख किया गया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने एआई से मानव सभ्यता के लिए संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ गलत सूचना, साइबर सुरक्षा, दुरुपयोग, रोजगार पर प्रभाव और मानव नियंत्रण से बाहर जाने जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। ऐसे में अमेरिका में एक तरफ तकनीकी विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ सुरक्षा और नियमन को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस भी तेज हो रही है।


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