UN महासचिव की रेस में यूएई की लाना नुसेइबेह की एंट्री, अब आठ उम्मीदवारों के बीच मुकाबला
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना को करीब 80 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक इस वैश्विक संस्था के शीर्ष पद पर नौ पुरुष महासचिव रह चुके हैं। अब तक किसी महिला को यह जिम्मेदारी नहीं मिली है। इसी वजह से इस बार महिला महासचिव नियुक्त करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र (UN) के अगले महासचिव के चयन की प्रक्रिया लगातार दिलचस्प होती जा रही है। इस पद के लिए जारी मुकाबले में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपनी विदेश मामलों की राज्यमंत्री लाना नुसेइबेह को उम्मीदवार के रूप में नामित किया है। बुधवार को हुई इस घोषणा के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस के उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। गुटेरस का मौजूदा कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त होने वाला है। ऐसे में नए महासचिव के चयन को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। नुसेइबेह की उम्मीदवारी ऐसे समय सामने आई है, जब सुरक्षा परिषद में पहले से मौजूद उम्मीदवारों को लेकर सहमति बनती नहीं दिख रही। हालिया अनौपचारिक मतदान में कुछ प्रमुख उम्मीदवारों को परिषद के कम से कम दो स्थायी सदस्यों की ओर से नकारात्मक वोट मिलने की बात सामने आई है। इससे महासचिव पद की दौड़ में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
सुरक्षा परिषद की सहमति बनना सबसे बड़ी चुनौती
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन में सुरक्षा परिषद की भूमिका बेहद अहम होती है। परिषद की सिफारिश के बाद महासभा महासचिव की नियुक्ति करती है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस हैं। इन देशों के पास वीटो का अधिकार है, इसलिए किसी उम्मीदवार को स्थायी सदस्यों का विरोध झेलना पड़ता है तो उसकी राह मुश्किल हो सकती है। नुसेइबेह के सामने भी यही चुनौती होगी। उन्हें केवल व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने पर ही ध्यान नहीं देना होगा, बल्कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच स्वीकार्यता भी बनानी होगी। मौजूदा उम्मीदवारों को लेकर सामने आए नकारात्मक संकेत यह दिखाते हैं कि इस बार चयन प्रक्रिया में कूटनीतिक बातचीत और राजनीतिक सहमति निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
कौन हैं लाना नुसेइबेह?
लाना नुसेइबेह यूएई की वरिष्ठ राजनयिक हैं और फिलहाल विदेश मामलों की राज्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वह संयुक्त राष्ट्र में यूएई की स्थायी प्रतिनिधि रह चुकी हैं। इस पद पर उनका 11 साल का कार्यकाल 2024 में पूरा हुआ था, जिसके बाद उन्हें मंत्री बनाया गया। संयुक्त राष्ट्र में काम करने के लंबे अनुभव के कारण उन्हें बहुपक्षीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली की समझ रखने वाली उम्मीदवार के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, महासचिव पद की दौड़ में अनुभव के साथ-साथ सदस्य देशों का राजनीतिक समर्थन भी महत्वपूर्ण होगा। नुसेइबेह योग में भी रुचि रखती हैं। संयुक्त राष्ट्र में यूएई की स्थायी प्रतिनिधि रहते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से जुड़े समारोहों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ने के उद्देश्य से वह मंत्री पद छोड़ रही हैं।
रेबेका ग्रीनस्पैन और राफेल ग्रासी भी मैदान में
महासचिव पद के लिए अन्य प्रमुख उम्मीदवारों में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) की प्रमुख रेबेका ग्रीनस्पैन, गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिरकेट और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रासी शामिल हैं। हालिया अनौपचारिक मतदान में इन तीनों उम्मीदवारों को भी सुरक्षा परिषद के कम से कम दो स्थायी सदस्यों के नकारात्मक वोट मिलने की जानकारी दी गई है। ऐसे संकेतों से स्पष्ट है कि किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में सर्वसम्मति बनना फिलहाल आसान नहीं दिख रहा। नए उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से देशों के बीच समर्थन जुटाने की कोशिशें और तेज हो सकती हैं।
क्या इस बार संयुक्त राष्ट्र को मिलेगी पहली महिला महासचिव?
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना को करीब 80 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक इस वैश्विक संस्था के शीर्ष पद पर नौ पुरुष महासचिव रह चुके हैं। अब तक किसी महिला को यह जिम्मेदारी नहीं मिली है। इसी वजह से इस बार महिला महासचिव नियुक्त करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। महिला उम्मीदवारों की मौजूदगी इस चयन प्रक्रिया को एक नया आयाम देती है, लेकिन अंतिम फैसला सदस्य देशों की सहमति और सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर निर्भर करेगा। नुसेइबेह समेत सभी उम्मीदवारों के लिए चुनौती यही होगी कि वे अपने अनुभव, नेतृत्व क्षमता और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं के आधार पर व्यापक समर्थन हासिल करें। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य किस उम्मीदवार पर सहमत होते हैं और क्या इस बार संयुक्त राष्ट्र को अपने इतिहास की पहली महिला महासचिव मिल पाती हैं।


