दो हफ्ते की शांति और तेल के दाम धड़ाम! ट्रंप के सीजफायर ऐलान से 19% टूटा अमेरिकी क्रूड
अमेरिका-ईरान सीजफायर ने वैश्विक तेल बाजार को तुरंत राहत दी है और कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, यह स्थिति अभी अस्थायी मानी जा रही है।

वॉशिंंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच घोषित दो हफ्तों के सीजफायर का असर अब वैश्विक तेल बाजार में साफ दिखने लगा है। युद्ध की आशंका कम होते ही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। खासकर अमेरिकी क्रूड ऑयल (WTI) में तेज गिरावट देखने को मिली है, जिससे बाजार में राहत का माहौल बना है।
अमेरिकी कच्चे तेल में बड़ी गिरावट
सीजफायर के ऐलान के बाद अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमतों में लगभग 19 फीसदी की गिरावट आई है। जो कीमतें एक दिन पहले 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं, वे अब गिरकर करीब 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कारोबारी सत्र के दौरान WTI क्रूड 91.11 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गया। अगर पिछले क्लोजिंग प्राइस से तुलना करें, तो यह करीब 21 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट है। वहीं, दिन के उच्चतम स्तर से देखें तो कीमतों में 26 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। गौरतलब है कि इससे पहले WTI क्रूड 117.57 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर था।
ब्रेंट क्रूड भी फिसला
सिर्फ अमेरिकी तेल ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों का प्रमुख बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी इस गिरावट से अछूता नहीं रहा। बुधवार को बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। कारोबारी सत्र के दौरान इसमें 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और कीमत 92.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। एक दिन पहले यही कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर थी और सत्र के दौरान 112 डॉलर के करीब पहुंच गई थी।
इसका मतलब है कि ब्रेंट क्रूड में करीब 18 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई है।
सीजफायर बना गिरावट की मुख्य वजह
तेल की कीमतों में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि अगर ईरान तुरंत ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोल देता है, तो अमेरिका दो हफ्तों तक कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। यहां किसी भी तरह का व्यवधान तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा देता है। ऐसे में इसके खुलने की संभावना ने बाजार को राहत दी है।
ईरान का भी सकारात्मक संकेत
ईरान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि अगर उस पर हमले बंद होते हैं, तो वह भी अपनी सैन्य गतिविधियों को रोक देगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची के अनुसार, देश दो हफ्तों तक होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। यह बयान बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा कम होता है।
मार्च में आई थी रिकॉर्ड तेजी
इससे पहले, अमेरिका-ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते मार्च महीने में तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखा गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दौरान कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई थी। युद्ध की आशंका और सप्लाई चेन में बाधा के डर ने बाजार को अस्थिर कर दिया था। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
10 सूत्रीय प्रस्ताव से बढ़ी उम्मीदें
ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका को ईरान की ओर से 10-सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के लिए एक मजबूत आधार माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक दीर्घकालिक शांति समझौते के करीब हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव सफल होता है, तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार भी स्थिर हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
IG के विश्लेषक टोनी साइकामोर के अनुसार, “यह एक अच्छी शुरुआत है और इससे होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से खोलने का रास्ता बन सकता है, लेकिन अभी भी कई शर्तें और अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।”
वैश्विक तेल बाजार को राहत
फिलहाल, तेल बाजार में आई यह गिरावट निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत लेकर आई है। लेकिन यह राहत कितनी स्थायी होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। अगर सीजफायर लंबे समय तक कायम रहता है और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहता है, तो तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।


