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अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर: ट्रंप का ऐलान, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की शर्त

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी देते हुए बताया कि यह समझौता रात 8 बजे तय की गई सैन्य कार्रवाई की डेडलाइन से दो घंटे से भी कम समय पहले हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का यह दौर एक बड़े युद्ध को टालने की दिशा में अहम कदम है।

अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर: ट्रंप का ऐलान, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की शर्त
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वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति बन गई है। यह समझौता उस समय हुआ जब ट्रंप द्वारा तय की गई संभावित सैन्य कार्रवाई की समय सीमा में महज कुछ घंटे बाकी थे। ट्रंप ने इस सीजफायर को ‘पूरी सभ्यता’ को बड़े खतरे से बचाने वाला कदम बताया और कहा कि यह समझौता कुछ अहम शर्तों के साथ किया गया है।

डेडलाइन से पहले बनी सहमति

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी देते हुए बताया कि यह समझौता रात 8 बजे तय की गई सैन्य कार्रवाई की डेडलाइन से दो घंटे से भी कम समय पहले हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का यह दौर एक बड़े युद्ध को टालने की दिशा में अहम कदम है। यह सीजफायर लेबनान समेत अन्य क्षेत्रों पर भी लागू होगा। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच 10 अप्रैल को औपचारिक बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होगी।

ईरानी सुप्रीम लीडर ने गोलीबारी रोकने का आदेश दिया

ईरान के सर्वोच्च नेता ने सभी सैन्य इकाइयों को गोलीबारी रोकने का निर्देश दिया है। यह जानकारी सरकारी चैनल आइआरआइबी पर पढ़े गए एक बयान में दी गई, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका के साथ एक अस्थायी युद्धविराम समझौते की घोषणा के लगभग दो घंटे बाद आया। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यह आदेश युद्ध के अंत का संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक बातचीत के ज़रिए कोई अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना प्रमुख शर्त

सीजफायर की सबसे अहम शर्त यह है कि ईरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) को तुरंत, पूरी तरह और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होगा। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। इसके बाधित होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा सकता है। ऐसे में इसे खोलना इस समझौते का केंद्रीय बिंदु माना जा रहा है।

इजराइल भी समझौते का हिस्सा

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सीजफायर में इजराइल भी शामिल है। CNN ने एक वरिष्ठ व्हाइट हाउस अधिकारी के हवाले से बताया कि इजराइल ने भी बातचीत जारी रहने तक अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई है। इस तरह यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर तनाव कम करने की दिशा में एक व्यापक प्रयास है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता का जिक्र

ट्रंप ने यह भी बताया कि यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अनुरोध के बाद संभव हो पाया। इससे संकेत मिलता है कि इस कूटनीतिक प्रक्रिया में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़, दामाद जेरेड कुशनर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद में होने वाली आगामी अमेरिका-ईरान वार्ता में शामिल होंगे।

ईरान का १० सूत्रीय प्रस्ताव

ट्रंप के अनुसार, अमेरिका को ईरान की ओर से 10 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत का आधार माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई विवादित मुद्दों पर पहले ही प्रगति हो चुकी है और अब यह समय अंतिम समझौते की दिशा में बढ़ने का है। इन दो हफ्तों का समय इसी उद्देश्य के लिए तय किया गया है कि दोनों पक्ष एक स्थायी शांति समझौते तक पहुंच सकें।

ईरान का दावा—अमेरिका को झुकना पड़ा

वहीं, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि अमेरिका को उनके प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल हैं, जैसे:

  • एक-दूसरे पर हमले न करने की गारंटी
  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण
  • यूरेनियम संवर्धन की अनुमति
  • सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को खत्म करना
  • ईरान को नुकसान की भरपाई (मुआवजा)
  • क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी
इसके अलावा, क्षेत्रीय संघर्षों को समाप्त करने की भी मांग इस प्रस्ताव में शामिल बताई जा रही है।

अमेरिका का दावा-सैन्य लक्ष्य पूरे

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका अपने सभी प्रमुख सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब वह दीर्घकालिक शांति समझौते के करीब है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता, तो उसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर और अधिक तीव्र सैन्य हमलों का सामना करना पड़ सकता है।

मिस्र ने सीजफायर का स्वागत किया

अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर का मिस्र ने स्वागत किया है। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने इसे एक बहुत महत्वपूर्ण अवसर बताया है, जिसे बातचीत, कूटनीति और रचनात्मक संवाद के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस युद्धविराम को आगे बढ़ाते हुए सभी पक्षों को सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रोकनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही का सम्मान करना चाहिए। मिस्र ने यह भी कहा कि वह पाकिस्तान और तुर्किये के साथ मिलकर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखेगा।

तनाव कम करने की कोशिश या अस्थायी राहत?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर फिलहाल एक अस्थायी राहत है। असली चुनौती इन दो हफ्तों के भीतर स्थायी समाधान तक पहुंचने की होगी। मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव, परमाणु मुद्दा और क्षेत्रीय संघर्ष इस प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं।

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