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तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद से दिया इस्तीफा, पति की बीमारी को बताया वजह

तुलसी गबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच परिवार को प्राथमिकता देना उनके लिए जरूरी हो गया है।

तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद से दिया इस्तीफा, पति की बीमारी को बताया वजह
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वॉशिंगटन। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। भारतीय मूल की अमेरिकी नेता गबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भेजे अपने इस्तीफे में पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए पद छोड़ने का फैसला बताया। उन्होंने कहा कि उनके पति एक दुर्लभ प्रकार के बोन कैंसर से जूझ रहे हैं और इस कठिन समय में वह उनके साथ रहना चाहती हैं। गबार्ड का कार्यकाल 30 जून तक जारी रहेगा। उनके बाद एरन लुकास को कार्यकारी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक नियुक्त किया गया है।

सोशल मीडिया पर दी जानकारी

समाचार एजेंसी रायटर के अनुसार, तुलसी गबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच परिवार को प्राथमिकता देना उनके लिए जरूरी हो गया है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें देश की सेवा का अवसर मिला, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगी। गबार्ड ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव रहा है।

इस्तीफे के पीछे राजनीतिक कारणों की भी चर्चा

हालांकि आधिकारिक तौर पर गबार्ड ने अपने पति की बीमारी को इस्तीफे का कारण बताया है, लेकिन अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक हलकों में अलग तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि व्हाइट हाउस की ओर से उन पर पद छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। खासतौर पर ईरान और पश्चिम एशिया को लेकर ट्रंप प्रशासन की रणनीति से उनके मतभेदों की खबरें लंबे समय से सामने आ रही थीं। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, गबार्ड प्रशासन की आक्रामक विदेश नीति से पूरी तरह सहमत नहीं थीं। माना जा रहा है कि यही मतभेद धीरे-धीरे उनके और व्हाइट हाउस के बीच दूरी का कारण बने।

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में चौथा बड़ा इस्तीफा

तुलसी गबार्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में इस्तीफा देने वाली चौथी कैबिनेट स्तर की अधिकारी बन गई हैं। उन्हें पिछले वर्ष फरवरी में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक नियुक्त किया गया था और उन्होंने करीब डेढ़ साल तक इस पद पर काम किया। उनसे पहले नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने भी ईरान युद्ध को लेकर असहमति जताते हुए इस्तीफा दिया था। इसके अलावा होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम, अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी और लेबर सेक्रेटरी लोरी शावेज-डीरीमर भी हाल के महीनों में अपने पद छोड़ चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों को ट्रंप प्रशासन के भीतर बढ़ते मतभेदों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

ईरान मुद्दे पर अलग थी गबार्ड की राय

तुलसी गबार्ड हाल के महीनों में ईरान से जुड़े मुद्दों पर बेहद सावधानी से बयान देती रही थीं। उन्होंने कई बार सीधे तौर पर प्रशासन की सैन्य रणनीति का समर्थन करने से परहेज किया। सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी को दिए अपने लिखित बयान में उन्होंने कहा था कि अमेरिकी हमलों के बाद भी ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा सक्रिय करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उनका यह आकलन राष्ट्रपति ट्रंप के सार्वजनिक बयानों से अलग माना गया। ट्रंप लगातार यह कहते रहे थे कि ईरान से उत्पन्न खतरे को रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि गबार्ड की यह संतुलित और अपेक्षाकृत शांत रणनीति ट्रंप प्रशासन के सख्त रुख से मेल नहीं खा रही थी।

डेमोक्रेट से ट्रंप समर्थक तक का सफर

तुलसी गबार्ड अमेरिकी राजनीति में लंबे समय से एक अलग पहचान रखती हैं। वह हवाई से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद रह चुकी हैं और विदेशों में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने के कारण चर्चा में रही थीं। वर्ष 2020 में उन्होंने राष्ट्रपति पद की दौड़ में भी हिस्सा लिया था। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस लेकर जो बाइडन का समर्थन किया था। इसके कुछ समय बाद उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ दी और धीरे-धीरे ट्रंप के करीब आती गईं। ट्रंप प्रशासन में उनकी नियुक्ति को उस समय बड़ा राजनीतिक संदेश माना गया था।


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