होर्मुज में सख्ती बढ़ाने के डोनाल्ड ट्रंप ने दिए संकेत, ईरान बोला- फिर भड़क सकता है युद्ध
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य केंद्र बना हुआ है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि इस मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति में और अधिक व्यवधान आ सकता है।

वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के संबंध एक बार फिर तीखे मोड़ पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। ईरान की ओर से भेजे गए एक और शांति प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खारिज किए जाने के बाद हालात और जटिल हो गए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अमेरिका अब तेहरान के खिलाफ अपनी सख्ती बढ़ा सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट बना टकराव का केंद्र
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य केंद्र बना हुआ है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि इस मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति में और अधिक व्यवधान आ सकता है। उनका दावा है कि अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के चलते ईरान को तेल निर्यात से होने वाली अरबों डॉलर की आय पर असर पड़ा है।
नाकेबंदी और ‘समुद्री डकैती’ की बहस
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में सख्त कार्रवाई कर रही है, जिसे उन्होंने “रणनीतिक कदम” बताया। हालांकि, इस बयान ने विवाद भी खड़ा किया है, क्योंकि ईरान पहले ही अमेरिकी कार्रवाई को “समुद्री डकैती” करार देता रहा है। ट्रंप ने फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान यहां तक कहा कि इस तरह की कार्रवाई “फायदेमंद” भी हो सकती है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
ईरान का जवाब: फैसला अमेरिका के हाथ में
ईरान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह कूटनीति का रास्ता अपनाता है या टकराव को आगे बढ़ाता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका समझौतों का पालन नहीं करता, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है। तेहरान ने यह भी संकेत दिया है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो खाड़ी क्षेत्र में नया संघर्ष भड़क सकता है।
जहाजों पर नजर और प्रतिबंध की चेतावनी
अमेरिका के विदेशी संपत्ति नियंत्रण विभाग (OFAC) ने चेतावनी दी है कि जो जहाज होर्मुज क्षेत्र से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान करेंगे, उन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि नौसैनिक नाकेबंदी के बाद से अब तक 48 व्यापारिक जहाजों को होर्मुज की ओर जाने से रोका गया है या वापस लौटाया गया है।
सैन्य तैनाती में बदलाव के संकेत
इस बीच क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती में भी बदलाव देखा गया है। लाल सागर में तैनात विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड फोर्ड को वापस अमेरिका भेज दिया गया है, हालांकि होर्मुज के आसपास अब भी दो विमानवाहक पोत तैनात हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पोत पिछले कई महीनों से सक्रिय था और हाल ही में इसमें तकनीकी समस्याएं भी आई थीं।
तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजार पर असर
ट्रंप ने यह भी कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति के मार्ग बदल रहे हैं और कुछ जहाज अब वैकल्पिक रास्तों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि दुनिया में तेल की कमी नहीं होगी और स्थिति सामान्य होने पर कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज में तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार पर असर पड़ सकता है।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी बयानों को “मीडिया-प्रेरित” बताया है। उनका कहना है कि अमेरिका तेल की कीमतों को नियंत्रित करने और मौजूदा हालात से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के कदम उठा रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि उसकी सशस्त्र सेनाएं किसी भी नई कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
राजनयिक स्तर पर भी सख्त रुख
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि उनका देश वार्ता और संघर्ष दोनों स्थितियों के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब अमेरिका को तय करना होगा कि वह बातचीत चाहता है या टकराव।
नए प्रस्ताव में बदलाव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हाल ही में जो नया शांति प्रस्ताव भेजा था, उसमें पहले की एक महत्वपूर्ण शर्त हटा दी गई थी। इस बार ईरान ने यह शर्त नहीं रखी कि आमने-सामने की वार्ता से पहले अमेरिका को नाकेबंदी हटानी होगी। प्रस्ताव में सुझाव दिया गया था कि पहले स्थायी युद्धविराम किया जाए और उसके बाद परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू हो। इसके बावजूद अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
अनिश्चितता बरकरार
फिलहाल, दोनों देशों के बीच स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। जहां एक ओर कूटनीति के रास्ते खुले हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य और आर्थिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
यह टकराव न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।


