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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद ट्रंप का बड़ा एक्शन... सभी देशों पर लगाया 10% ग्लोबल टैरिफ
ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “निराशाजनक और गलत” बताते हुए कहा कि वह तुरंत एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे। उनका कहना था कि यह कदम अमेरिका के व्यापारिक हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी है।

वॉशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के महज तीन घंटे के भीतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नया दांव चल दिया। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने घोषणा की कि वह 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू करेंगे। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “निराशाजनक और गलत” बताते हुए कहा कि वह तुरंत एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे। उनका कहना था कि यह कदम अमेरिका के व्यापारिक हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप का तीखा हमला
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिन जजों ने उनके टैरिफ को रद्द किया, वे देशहित में काम नहीं कर रहे। ट्रंप के मुताबिक, “सुप्रीम कोर्ट में मेरी बात को ठीक से नहीं सुना गया। यह फैसला अमेरिका के हित में नहीं है।” उन्होंने यहां तक कहा कि कुछ जज “कट्टर वामपंथियों के पालतू” बन गए हैं और उनमें सही फैसला लेने की हिम्मत नहीं है। ट्रंप ने उन तीन कंजरवेटिव जजों की तारीफ की, जिन्होंने फैसले से असहमति जताई थी। राष्ट्रपति ने दावा किया कि अदालत का निर्णय विदेशी हितों के प्रभाव में लिया गया है और इससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान होगा। उनका कहना था कि अगर टैरिफ नहीं लगाए गए तो विदेशी देश अमेरिका के कई महत्वपूर्ण उद्योगों में बढ़त बना लेंगे।
सेक्शन 122 के तहत नया रास्ता
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लागू करेंगे। यह प्रावधान राष्ट्रपति को “बड़े और गंभीर” भुगतान संतुलन (Balance of Payments) संकट की स्थिति में 150 दिनों तक अधिकतम 15 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। धारा 122 के तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी टैरिफ लागू कर सकते हैं। इस दौरान प्रशासन स्थिति की समीक्षा करता है और आगे की रणनीति तय करता है। ट्रंप ने कहा कि यह नया टैरिफ वर्तमान में लागू अन्य शुल्कों के अतिरिक्त होगा और उन आपातकालीन टैरिफ की जगह लेगा जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। NBC न्यूज के अनुसार, यदि सभी देशों पर समान 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाता है, तो जिन देशों पर पहले अधिक दर से टैरिफ लगाया गया था, उनके लिए यह दर घट भी सकती है।
रिफंड पर अनिश्चितता
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट नहीं किया कि पहले से वसूले गए टैरिफ का क्या होगा। इस पर ट्रंप ने कहा कि रिफंड को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है, इसलिए सरकार तत्काल किसी भी कंपनी को पैसा वापस नहीं करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले पर लंबी कानूनी लड़ाई चल सकती है। ट्रंप के शब्दों में, “यह मामला अगले दो साल तक अदालत में चल सकता है। हम पांच साल तक भी कोर्ट में रह सकते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि रिफंड दिया गया तो उसका अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
भारत के साथ ट्रेड डील पर ट्रंप का रुख
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने भारत के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके “अच्छे दोस्त” हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनका प्रशासन अन्य देशों और कंपनियों की “अनुचित व्यापार प्रथाओं” के खिलाफ धारा 301 के तहत नई जांच शुरू करेगा। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में अमेरिका की व्यापार नीति और आक्रामक हो सकती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की पांच प्रमुख बातें
- ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए टैरिफ को लागू करने के लिए उन्हें कांग्रेस की जरूरत नहीं है।
- रिफंड पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं है, इसलिए फिलहाल टैरिफ राशि लौटाने का सवाल नहीं उठता।
- उन्होंने बहुमत के फैसले को “घटिया” बताते हुए कहा कि यह मामला वर्षों तक अदालतों में चल सकता है।
- ट्रंप का दावा था कि फैसले पर विदेशी ताकतों का असर पड़ा है।
- उन्होंने कहा कि टैरिफ लगाने का कदम पहले के राष्ट्रपतियों को उठा लेना चाहिए था।
ऐतिहासिक संदर्भ: निक्सन और 10% ग्लोबल टैरिफ
1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भी भुगतान संतुलन संकट के दौरान 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाया था। उस समय अमेरिका आयात अधिक और निर्यात कम कर रहा था, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ गया था। इसी अनुभव के बाद 1974 में ट्रेड एक्ट पारित किया गया, जिसमें धारा 122 जैसे प्रावधान शामिल किए गए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति को अस्थायी अधिकार मिल सके। हालांकि न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, धारा 122 का अब तक कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। ऐसे में यदि ट्रंप का यह कदम अदालत में चुनौती पाता है, तो इसकी व्याख्या कैसे होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
कानूनी और राजनीतिक लड़ाई
ट्रंप का यह कदम अमेरिका में पहले से जारी राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकता है। डेमोक्रेटिक नेताओं और कई व्यापारिक समूहों ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया था और व्यापक टैरिफ नीति की आलोचना की थी। अब सेक्शन 122 के तहत नया टैरिफ लागू होने से एक बार फिर कानूनी बहस छिड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस फैसले को भी अदालत में चुनौती दी जाती है, तो न्यायपालिका को यह तय करना होगा कि क्या भुगतान संतुलन का मुद्दा वास्तव में “बड़ा और गंभीर” संकट है या नहीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घोषणा का असर देखने को मिल सकता है। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और व्यापारिक साझेदार देशों की ओर से जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं।
“अमेरिका को फिर से महान बनाना” प्राथमिकता
ट्रंप ने अंत में कहा कि उनका लक्ष्य अमेरिका को “फिर से महान” बनाना है और इसके लिए आवश्यक होने पर वह किसी भी देश के साथ व्यापार बंद करने तक का अधिकार रखते हैं। उनके मुताबिक, टैरिफ से अमेरिका अधिक राजस्व जुटा सकता है और आर्थिक सुरक्षा मजबूत कर सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नया 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ कानूनी चुनौती झेल पाएगा और इसका वैश्विक व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का यह त्वरित पलटवार अमेरिकी व्यापार नीति को एक नए दौर में ले जा सकता है।
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