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रूसी तेल टैंकर की जब्ती से बढ़ी वैश्विक तनातनी: अमेरिका का सख्त संदेश, रूस ने बताया समुद्री डकैती

अमेरिका ने बुधवार को उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी ध्वज लगे एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया। खास बात यह रही कि इस टैंकर की सुरक्षा के लिए एक रूसी पनडुब्बी भी साथ चल रही थी।

रूसी तेल टैंकर की जब्ती से बढ़ी वैश्विक तनातनी: अमेरिका का सख्त संदेश, रूस ने बताया समुद्री डकैती
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वॉशिंगटन/मॉस्को। वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से पैदा हुआ अंतरराष्ट्रीय तनाव अभी थमा भी नहीं था कि अब समुद्र में उठाए गए एक कदम ने वैश्विक राजनीति में नई बेचैनी पैदा कर दी है। अमेरिका ने बुधवार को उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी ध्वज लगे एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया। खास बात यह रही कि इस टैंकर की सुरक्षा के लिए एक रूसी पनडुब्बी भी साथ चल रही थी। अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच टकराव और गहरा गया है।

जहां रूस के वरिष्ठ सांसद आंद्रेई क्लिशास ने इसे “खुली समुद्री डकैती” करार दिया है, वहीं व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अपने लगाए गए सभी प्रतिबंधों को पूरी सख्ती से लागू करेगा। इस घटना के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने कैरिबियन सागर में एक अन्य तेल टैंकर पर भी कब्जा कर लिया, जिससे यह संकेत मिला कि वॉशिंगटन समुद्री मार्गों पर भी अपनी नाकेबंदी और दबाव नीति को और आक्रामक बनाने के मूड में है।

अमेरिकी कार्रवाई: दो टैंकर जब्त, सख्त संदेश
अमेरिकी यूरोपीय कमान ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उसने व्यापारिक पोत बेला-1 (जिसे मरीनरा के नाम से भी जाना जाता है) को जब्त कर लिया है। अमेरिका का दावा है कि यह टैंकर अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका पिछले एक महीने से इस जहाज पर नजर रखे हुए था, क्योंकि यह वेनेजुएला के आसपास प्रतिबंधित तेल जहाजों पर लगाए गए अमेरिकी नाकेबंदी उपायों से बचने की कोशिश कर रहा था।

बेला-1 को अब अमेरिकी तटरक्षक बल के नियंत्रण में ले लिया गया है। इसके तुरंत बाद अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने घोषणा की कि कैरिबियन सागर में एक अन्य तेल टैंकर ‘सोफिया’ को भी अमेरिकी सेना ने अपने कब्जे में ले लिया है। दोनों जहाजों के बारे में अमेरिका का कहना है कि या तो वे हाल ही में वेनेजुएला में रुके थे या वहां की ओर जा रहे थे।

‘गुप्त बेड़े’ का हिस्सा होने का आरोप
अमेरिका का आरोप है कि ये दोनों जहाज प्रतिबंधित जहाजों के तथाकथित “गुप्त बेड़े” का हिस्सा हैं। यह बेड़ा पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए रूस, ईरान और वेनेजुएला से तेल लेकर मुख्य रूप से एशियाई देशों तक पहुंचाता है। वॉशिंगटन का कहना है कि इसी नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित देशों को अरबों डॉलर की आय होती है, जिसका इस्तेमाल वे अपनी सरकारों और सैन्य गतिविधियों को मजबूत करने में करते हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन जहाजों की जब्ती यह स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका केवल जमीन या हवाई क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समुद्र में भी प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करेगा।

वेनेजुएला कनेक्शन और मादुरो के बाद की रणनीति
रूसी ध्वज वाले टैंकर की जब्ती को वेनेजुएला की हालिया घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपदस्थ कर अमेरिका लाए जाने के बाद भी वॉशिंगटन वेनेजुएला के तेल पर अपनी नाकेबंदी जारी रखने के संकेत दे चुका है। तेल निर्यात वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और इसी से वहां की सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व मिलता है।

विश्लेषकों के अनुसार, तेल की बिक्री से होने वाली आय पर अंकुश लगाकर अमेरिका मादुरो की उत्तराधिकारी और अंतरिम सत्ता संभाल रहीं डेल्सी रोड्रिग्ज पर दबाव बढ़ाना चाहता है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने बुधवार को कहा कि अमेरिका अनिश्चित काल तक वेनेजुएला के तेल व्यापार की निगरानी करना चाहता है। उनका कहना था कि प्रतिबंधों का उद्देश्य केवल आर्थिक दबाव नहीं, बल्कि “लोकतांत्रिक बदलाव को मजबूर करना” भी है।

ब्रिटेन ने भी दिया अमेरिका का साथ
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका को अपने प्रमुख सहयोगी ब्रिटेन का समर्थन भी मिला है। ब्रिटिश सरकार ने स्वीकार किया कि उसने रूसी तेल टैंकर को जब्त करने के अमेरिकी अभियान में सहायता प्रदान की। ब्रिटेन के अनुसार, अमेरिका के अनुरोध पर उसकी सशस्त्र सेनाओं ने पूर्व-नियोजित परिचालन सहायता दी, जिसमें सैन्य अड्डों पर तैनाती और लॉजिस्टिक सपोर्ट शामिल था। ब्रिटेन के इस रुख से यह साफ हो गया है कि पश्चिमी देश इस मुद्दे पर एकजुट दिखाई दे रहे हैं और रूस, ईरान तथा वेनेजुएला के खिलाफ प्रतिबंधों को और कड़ा करने के पक्ष में हैं।

चालक दल पर मुकदमे की चेतावनी
व्हाइट हाउस ने भी रूसी टैंकर की जब्ती को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बुधवार को कहा कि जब्त किए गए रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर के चालक दल पर मुकदमा चलाया जा सकता है। लेविट ने बताया कि जहाज के खिलाफ न्यायिक जब्ती का आदेश पहले से मौजूद था। इसका मतलब यह है कि चालक दल के सदस्य संघीय कानून के किसी भी उल्लंघन के लिए अभियोजन के दायरे में आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो चालक दल को मुकदमे के लिए अमेरिका लाया जा सकता है। इस बयान ने रूस की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि यह मामला अब सिर्फ जहाज की जब्ती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मानवीय और कानूनी पहलुओं से भी जुड़ गया है।

रूस का तीखा विरोध: समुद्री कानून का उल्लंघन
रूस ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रूसी परिवहन मंत्रालय ने कहा कि रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर को जब्त करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सीधा उल्लंघन है। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों के जहाज पर चढ़ने के बाद टैंकर से संपर्क टूट गया था। रूस ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का हवाला देते हुए कहा कि खुले समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता लागू होती है। ऐसे में किसी भी देश को दूसरे देश में पंजीकृत जहाजों के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। रूस ने अमेरिका से मांग की है कि चालक दल के सदस्यों के साथ मानवीय और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए और उनकी शीघ्र सुरक्षित घर वापसी कराई जाए। रूस के वरिष्ठ सांसद आंद्रेई क्लिशास ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” करार देते हुए कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी कर रहा है।

पुतिन की चुप्पी और वैश्विक संदेश
गौर करने वाली बात यह है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अब तक इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। रूस में इस समय नए साल की लंबी छुट्टियां चल रही हैं और राजनीतिक गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि पुतिन की चुप्पी रणनीतिक हो सकती है और आने वाले दिनों में रूस की ओर से कड़ा जवाब देखने को मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो रूस के दूसरे ऐसे करीबी सहयोगी थे, जिन्हें एक साल से कुछ अधिक समय के अंतराल में सत्ता से हटाया गया। इससे पहले दिसंबर 2024 में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को भी सत्ता से बेदखल किया गया था। इन घटनाओं ने रूस के रणनीतिक दायरे को कमजोर किया है और अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति को और स्पष्ट किया है।

बढ़ते वैश्विक संकट की आशंका
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि समुद्र में तेल टैंकरों की जब्ती जैसी कार्रवाइयों से वैश्विक संकट और गहरा सकता है। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून तीनों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। खासकर एशिया के वे देश, जो रूस और वेनेजुएला से तेल आयात करते हैं, इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए हैं। अमेरिका की सख्ती यह संकेत देती है कि वह प्रतिबंधों को केवल कूटनीतिक हथियार नहीं, बल्कि सैन्य और कानूनी ताकत के जरिए भी लागू करने को तैयार है। वहीं रूस इसे अपनी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून पर हमला मान रहा है।

आगे क्या?
फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यदि अमेरिका समुद्र में इस तरह की कार्रवाइयों को जारी रखता है और रूस जवाबी कदम उठाता है, तो यह टकराव सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रह सकता। तेल, व्यापार और भू-राजनीति के इस संगम में दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी दिख रही है, जहां एक गलत कदम बड़े वैश्विक संकट को जन्म दे सकता है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह मामला कूटनीतिक बातचीत से सुलझता है या फिर महाशक्तियों की यह तनातनी और तेज होती है। फिलहाल, रूसी टैंकर की जब्ती ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में एक नई दरार जरूर पैदा कर दी है।


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