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थाईलैंड चुनाव 2026: पीएम अनुतिन की पार्टी आगे, बहुमत से दूर; गठबंधन की राह पर भूमजाईथाई पार्टी

मतगणना में भूमजाईथाई को 195 सीटें मिल चुकी हैं। 500 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत के लिए 251 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। ऐसे में साफ है कि नई सरकार गठबंधन के सहारे ही बनेगी, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संभावित गठबंधन में अनुतिन की पार्टी का वर्चस्व रहेगा।

थाईलैंड चुनाव 2026: पीएम अनुतिन की पार्टी आगे, बहुमत से दूर; गठबंधन की राह पर भूमजाईथाई पार्टी
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बैंकॉक। थाईलैंड के आम चुनाव में प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल की सत्तारूढ़ भूमजाईथाई पार्टी ने तीन-तरफा मुकाबले में निर्णायक बढ़त बना ली है। चुनाव आयोग के शुरुआती रुझानों के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत मतदान केंद्रों की गिनती के बाद भूमजाईथाई अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे चल रही है। हालांकि पार्टी अभी स्पष्ट बहुमत से दूर है और सरकार बनाने के लिए उसे सहयोगी दलों का साथ लेना होगा। रविवार आधी रात तक चली मतगणना में भूमजाईथाई को 195 सीटें मिल चुकी हैं। 500 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत के लिए 251 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। ऐसे में साफ है कि नई सरकार गठबंधन के सहारे ही बनेगी, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि संभावित गठबंधन में अनुतिन की पार्टी का वर्चस्व रहेगा।

राष्ट्रवाद की लहर और आकस्मिक चुनाव

विश्लेषकों का कहना है कि यह चुनाव ऐसे समय कराया गया जब देश में राष्ट्रवादी भावना उभार पर थी। दिसंबर में कंबोडिया सीमा विवाद के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया था। माना जा रहा है कि अनुतिन ने इसी माहौल का लाभ उठाने के लिए आकस्मिक चुनाव का दांव खेला। अनुतिन चार्नवीराकुल ने पूर्व प्रधानमंत्री पैटोंगतार्न शिनावात्रा के पदच्युत होने के बाद सत्ता संभाली थी। उन्होंने कार्यभार संभालने के सौ दिनों से भी कम समय में चुनाव कराने का फैसला किया। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यह रणनीति जोखिम भरी जरूर थी, लेकिन शुरुआती नतीजों से संकेत मिलते हैं कि इससे उन्हें फायदा हुआ।

पीपुल्स पार्टी दूसरे स्थान पर

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में बढ़त बनाने वाली प्रगतिशील पीपुल्स पार्टी अब दूसरे स्थान पर खिसकती दिख रही है। उसे अब तक 114 सीटें मिली हैं। पार्टी नेता नत्थाफोंग रुआंगपन्यावुत ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी भूमजाईथाई के नेतृत्व वाली किसी भी सरकार में शामिल नहीं होगी और विपक्ष में बैठने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि मतदाताओं ने बदलाव के एजेंडे को समर्थन दिया है और पार्टी संसद के भीतर से लोकतांत्रिक सुधारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी। इस रुख से संकेत मिलता है कि विपक्ष मजबूत भूमिका निभाने की तैयारी में है।

फेउ थाई तीसरे स्थान पर

पूर्व प्रधानमंत्री शिनावात्रा की फेउ थाई पार्टी 78 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही है। कभी थाई राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाने वाली इस पार्टी का जनाधार सिमटता दिख रहा है। हालांकि गठबंधन समीकरणों में उसकी भूमिका अहम हो सकती है, खासकर तब जब भूमजाईथाई को बहुमत के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फेउ थाई और भूमजाईथाई के बीच संभावित समझौता नई सरकार की स्थिरता तय कर सकता है। हालांकि वैचारिक मतभेद और हालिया सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि में यह समीकरण आसान नहीं माना जा रहा।

चुनावी ढांचा: 400 सीधे निर्वाचित, 100 नामित सदस्य

थाईलैंड के चुनावी कानून के तहत 500 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 400 सदस्य सीधे चुनाव जीतकर आते हैं, जबकि 100 सदस्य पार्टियों की ओर से नामित किए जाते हैं। आम चुनाव में पार्टियों को मिले वोट प्रतिशत के आधार पर इन 100 सीटों का अनुपात तय होता है। इस प्रणाली के कारण अक्सर किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाता और गठबंधन सरकार की स्थिति बनती है। मौजूदा नतीजे भी इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं।

संविधान पर जनमत संग्रह

चुनाव के साथ हुए जनमत संग्रह में मतदाताओं ने नए संविधान के मसौदे के पक्ष में लगभग दो-तिहाई बहुमत से समर्थन दिया है। 2017 का संविधान सैन्य समर्थित दस्तावेज माना जाता है, जिसकी आलोचना सत्ता के केंद्रीकरण और निर्वाचित सरकार की सीमित शक्तियों को लेकर होती रही है। यदि नए संविधान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो संसद में संशोधन प्रस्ताव पारित करना होगा और उसके बाद कम से कम दो और जनमत संग्रह कराने होंगे। यह लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी, लेकिन ताजा जनादेश संकेत देता है कि जनता बदलाव चाहती है। थाईलैंड में 1932 में पूर्ण राजशाही समाप्त होने के बाद से अब तक 20 बार संविधान बनाया जा चुका है। इससे देश की राजनीतिक अस्थिरता और बार-बार होने वाले सैन्य हस्तक्षेपों का इतिहास झलकता है।

गठबंधन की संभावनाएं और चुनौतियां

भूमजाईथाई के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थिर गठबंधन बनाना है। 195 सीटों के साथ वह सबसे बड़ी पार्टी तो है, लेकिन बहुमत से 56 सीटें दूर है। संभावित सहयोगी दलों के साथ बातचीत में नीति, मंत्रालयों के बंटवारे और संवैधानिक सुधार जैसे मुद्दे अहम रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुतिन लचीला रुख अपनाते हैं, तो वे व्यापक गठबंधन बनाकर स्थिर सरकार दे सकते हैं। वहीं, यदि राजनीतिक खींचतान बढ़ती है, तो अस्थिरता की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू

अंतिम आधिकारिक परिणामों की घोषणा के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी और संसद में समर्थन परीक्षण के बाद ही नई सरकार शपथ ले सकेगी। इस चुनाव ने स्पष्ट कर दिया है कि थाई राजनीति में बदलाव की इच्छा और स्थिर नेतृत्व की मांग दोनों मौजूद हैं। भूमजाईथाई की बढ़त अनुतिन के नेतृत्व को मजबूत करती है, लेकिन बहुमत से दूरी उन्हें सहमति और सहयोग की राजनीति अपनाने को मजबूर करेगी। संविधान संशोधन की प्रक्रिया, सीमा विवाद की पृष्ठभूमि और आर्थिक चुनौतियों के बीच बनने वाली नई सरकार के सामने कई अहम फैसले होंगे। आने वाले सप्ताह तय करेंगे कि थाईलैंड स्थिर गठबंधन सरकार की ओर बढ़ता है या राजनीतिक अनिश्चितता का दौर जारी रहता है।


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