Begin typing your search above and press return to search.
होर्मुज पर ट्रंप की उम्मीदों को लगा झटका! जापान-AUS का साफ इनकार, दक्षिण कोरिया बोला- सोचेंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान से वाशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने लगभग सात देशों से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा में योगदान देने के लिए कहा है।

वॉशिंगटन/तेलअबीब। West Asia Tension: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार भी दबाव में आ गया है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने कई देशों से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजने की मांग की है। हालांकि, ट्रंप की इस अपील के बावजूद अब तक किसी भी देश ने इस मिशन में शामिल होने की स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई है। जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया और तुर्की तक ने होर्मुज में अपने युद्धपोत भेजने से लगभग इनकार कर दिया है। वहीं साउथ कोरिया इस बात पर ध्यान से विचार करने की बात कह रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में अपना युद्धपोत तैनात किया जाए या नहीं।
ट्रंप बोले- देश खुद अपने हित की सुरक्षा करें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन विमान से वाशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने लगभग सात देशों से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा में योगदान देने के लिए कहा है। ट्रंप ने कहा कि यह समुद्री रास्ता उन देशों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है जो पश्चिम एशिया से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं। उन्होंने कहा, मैं उन देशों से कह रहा हूं कि वे खुद अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें, क्योंकि यह उनके लिए ज्यादा जरूरी है।ट्रंप के मुताबिक अमेरिका के पास खुद के पर्याप्त ऊर्जा स्रोत हैं, इसलिए इस मार्ग पर उसकी निर्भरता अपेक्षाकृत कम है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में समुद्री मार्ग से होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का निर्यात भी मुख्य रूप से इसी मार्ग के जरिए होता है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
अमेरिका की निर्भरता कम, चीन पर ज्यादा असर
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य की उतनी जरूरत नहीं है क्योंकि देश के पास अपने तेल उत्पादन के पर्याप्त स्रोत हैं। उन्होंने दावा किया कि चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका का इस मार्ग पर निर्भरता बहुत कम है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले ही कई देशों से इस मिशन में शामिल होने की अपील की है। जिन देशों से उन्होंने संपर्क किया है उनमें चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन शामिल हैं।
ब्रिटेन ने अभी नहीं लिया फैसला
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप से बातचीत में कहा कि वैश्विक शिपिंग को सुरक्षित बनाने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सामान्य बनाना जरूरी है। हालांकि, ब्रिटेन ने अभी तक इस क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। अन्य देशों की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है, जहां सरकारें हालात पर नजर रख रही हैं लेकिन किसी सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल होने से बच रही हैं।
ईरान का अलग रुख
इन सभी बयानों के बीच ईरान ने भी अपना पक्ष स्पष्ट किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि कई देशों ने अपने जहाजों को सुरक्षित गुजरने देने के लिए तेहरान से संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि कुछ देशों के जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति भी दी गई है, हालांकि उन्होंने उन देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के जहाजों को लेकर उसका रुख अलग है। यह बयान इस बात का संकेत देता है कि मौजूदा संघर्ष के बीच समुद्री मार्ग की सुरक्षा एक बड़ा भू-राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
कई देश सतर्क, सीधे युद्ध से दूरी
अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि वह कई देशों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं और उम्मीद है कि चीन भी इस मार्ग को सुरक्षित बनाने में सहयोग करेगा। हालांकि कई देशों ने फिलहाल कोई ठोस वादा नहीं किया है। दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह स्थिति पर नजर रख रहा है और अमेरिका के साथ समन्वय बनाए रखेगा। वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने साफ कहा है कि जर्मनी इस युद्ध में सक्रिय रूप से शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है।
तेल की कीमतों को काबू करने की कोशिश
इस बीच वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने आपातकालीन कदम उठाने का फैसला किया है। एजेंसी ने घोषणा की है कि करीब 41.2 करोड़ बैरल तेल वैश्विक बाजार में जारी किया जाएगा ताकि आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। योजना के अनुसार, एशियाई देशों के रणनीतिक भंडार तुरंत जारी किए जाएंगे, जबकि यूरोप और अमेरिका के भंडार मार्च के अंत से बाजार में आने शुरू होंगे।
युद्ध का मानवीय असर भी गंभीर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय संकट भी गहरा होता जा रहा है। रेड क्रॉस के अनुसार, इस युद्ध में ईरान में अब तक 1400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर न सिर्फ तेल बाजार बल्कि वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
Next Story


