सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुन सकपका गए थे राष्ट्रपति ट्रंप, जैसे-तैसे खुद को संभाला था
बताया जाता है कि व्हाइट हाउस के स्टेट डाइनिंग रूम में चल रही बैठक के बीच उनके व्यापार सलाहकार ने एक नोट राष्ट्रपति को थमाया। नोट पढ़ते ही ट्रंप ने कथित तौर पर पूछा, “तब तो नुकसान हो गया?” सलाहकार ने पुष्टि की कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के वैश्विक टैरिफ कार्यक्रम को अवैध घोषित कर दिया है।

वॉशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैश्विक टैरिफ कार्यक्रम को अवैध ठहराए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तत्काल राजनीतिक और नीतिगत झटका लगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप को इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी गवर्नरों के साथ चल रही एक गोपनीय बैठक के दौरान दी गई, जिसके बाद बैठक का माहौल अचानक बदल गया। बताया जाता है कि व्हाइट हाउस के स्टेट डाइनिंग रूम में चल रही बैठक के बीच उनके व्यापार सलाहकार ने एक नोट राष्ट्रपति को थमाया। नोट पढ़ते ही ट्रंप ने कथित तौर पर पूछा, “तब तो नुकसान हो गया?” सलाहकार ने पुष्टि की कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के वैश्विक टैरिफ कार्यक्रम को अवैध घोषित कर दिया है।
6-3 के बहुमत से टैरिफ कार्यक्रम रद्द
गत शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन के वैश्विक टैरिफ कार्यक्रम को निरस्त कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि व्यापक आयात शुल्क लगाने के लिए जिन कानूनी प्रावधानों का उपयोग किया गया, वे इस तरह के कदम की अनुमति नहीं देते। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने टैरिफ लगाने में अपनी वैधानिक सीमाओं को पार किया। अदालत के अनुसार, ऐसे व्यापक आर्थिक निर्णय लेने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि कार्यपालिका के पास। यह फैसला प्रशासन की व्यापार नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि टैरिफ कार्यक्रम ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का केंद्रीय हिस्सा रहा है।
बैठक का माहौल हुआ गंभीर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फैसले की सूचना मिलने के बाद बैठक का माहौल गंभीर हो गया। हालांकि राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से खुद को शांत बताया, लेकिन उन्होंने अदालत के निर्णय को अपमानजनक करार दिया। बैठक में मौजूद सूत्रों ने बताया कि ट्रंप ने प्रश्नोत्तर सत्र को छोटा कर दिया और कहा कि उन्हें अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया तैयार करनी है। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तत्काल परामर्श किया।
कुछ ही घंटों में नई रणनीति का ऐलान
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने संवाददाता सम्मेलन कर अपनी नीति का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि वह 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे। धारा 122 राष्ट्रपति को अस्थायी रूप से आयात पर शुल्क लगाने का अधिकार देती है, विशेषकर तब जब व्यापार घाटा या आर्थिक असंतुलन का खतरा हो। हालांकि, यह प्रावधान सीमित अवधि के लिए लागू किया जा सकता है और आगे की कार्रवाई के लिए कांग्रेस की भूमिका आवश्यक होती है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अन्य टैरिफ उपाय भी अपनी जगह बने रहेंगे और प्रशासन अमेरिकी उद्योगों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
कानूनी और राजनीतिक बहस तेज
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका में कार्यपालिका और विधायिका की शक्तियों को लेकर बहस तेज हो गई है। अदालत के निर्णय ने स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रपति को व्यापक आर्थिक नीतियां लागू करने के लिए वैधानिक सीमाओं का पालन करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में व्यापार नीति से जुड़े निर्णयों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। साथ ही, यह कांग्रेस की भूमिका को भी मजबूत करता है।
“अमेरिकी हित सर्वोपरि”
संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों की रक्षा करना है। उन्होंने दोहराया कि कई देश दशकों से अमेरिका के साथ व्यापार में असंतुलन पैदा कर रहे हैं और टैरिफ इस असंतुलन को ठीक करने का साधन हैं। उन्होंने अदालत के फैसले से असहमति जताई, लेकिन यह भी कहा कि प्रशासन उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगा। ट्रंप के समर्थकों का कहना है कि टैरिफ नीति ने घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में मजबूती दी है, जबकि आलोचकों का तर्क है कि इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ा है।
वैश्विक असर की आशंका
अमेरिका की व्यापार नीति में इस तरह के बदलावों का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। कई देशों ने पहले ही अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ आपत्ति जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं में नई दिशा मिल सकती है, लेकिन साथ ही अनिश्चितता भी बनी रह सकती है, खासकर यदि प्रशासन नए कानूनी रास्तों से टैरिफ लागू करने की कोशिश करता है।
प्रभाव सीमित
अब ध्यान इस बात पर है कि क्या ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई पुनर्विचार याचिका दायर करेगा या कांग्रेस के साथ मिलकर नया कानूनी ढांचा तैयार करेगा। धारा 122 के तहत अस्थायी टैरिफ लागू करने का कदम तत्काल समाधान के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसकी अवधि और प्रभाव सीमित हो सकते हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अदालत के इस फैसले से अमेरिकी व्यापार नीति में कितना स्थायी बदलाव आता है।
बड़ा झटका
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैश्विक टैरिफ कार्यक्रम को अवैध ठहराया जाना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है। हालांकि, उन्होंने तुरंत वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के तहत नई रणनीति अपनाने का संकेत दिया है। यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है। फिलहाल, बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पर है कि प्रशासन आगे किस दिशा में कदम बढ़ाता है।


