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भारत-बांग्लादेश रिश्तों में पिघलन के संकेत: DGFI प्रमुख की दिल्ली की ‘गुप्त’ यात्रा, नई सरकार ने दिखाए सुधार के संकेत

दिल्ली यात्रा के दौरान DGFI प्रमुख राशिद चौधरी ने भारत के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अलावा भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया एजेंसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. रमन भी शामिल थे।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों में पिघलन के संकेत: DGFI प्रमुख की दिल्ली की ‘गुप्त’ यात्रा, नई सरकार ने दिखाए सुधार के संकेत
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ढाका/नई दिल्‍ली : India Bangladesh Relation: बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद भारत के साथ संबंधों में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस (DGFI) के प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी ने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली का एक ‘गुप्त’ दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल समेत कई वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि पिछले करीब दो वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में आई कड़वाहट को कम करने की दिशा में यह दौरा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दिल्ली में हुई अहम सुरक्षा बैठकें

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली यात्रा के दौरान DGFI प्रमुख राशिद चौधरी ने भारत के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अलावा भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया एजेंसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. रमन भी शामिल थे। इन बैठकों में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना और खुफिया स्तर पर संवाद को फिर से सक्रिय करना था।

मीडिया में कम चर्चा, लेकिन अहम पहल

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रथम आलो (Prothom Alo) की रिपोर्ट के अनुसार, इस यात्रा को सार्वजनिक तौर पर ज्यादा प्रचार नहीं दिया गया। इसके बावजूद भारत की मीडिया और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक पहल के रूप में देखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह यात्रा औपचारिक रूप से कम चर्चा में रही हो, लेकिन इससे दिल्ली और ढाका के बीच संबंधों को सुधारने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

नई सरकार के बाद बदलते संकेत

बांग्लादेश में पिछले कुछ वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रमों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित किया था। अगस्त 2024 में शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने और उसके बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव आ गया था। हालांकि इस साल फरवरी में हुए आम चुनावों के बाद बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सत्ता में लौट आई है और तारिक रहमान देश के प्रधानमंत्री बने हैं। नई सरकार के गठन के बाद से ही दोनों देशों के बीच संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हुई हैं।

निष्क्रिय संपर्क तंत्र को फिर से सक्रिय करने पर चर्चा

रिपोर्ट के अनुसार, इन बैठकों में इस बात पर सहमति बनी कि दोनों देश किसी तीसरे देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देंगे। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने उन संचार और समन्वय तंत्रों को फिर से सक्रिय करने पर भी चर्चा की, जो पिछले दो वर्षों से लगभग निष्क्रिय पड़े थे। सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान को फिर से मजबूत बनाने को भी प्राथमिकता दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पहले की तरह फिर से मजबूत हो सकता है।

‘मेडिकल विजिट’ के रूप में बताया गया दौरा

दिल्ली यात्रा को आधिकारिक तौर पर मेडिकल विजिट बताया गया था, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे कूटनीतिक और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण उद्देश्य भी थे। भारत की सुरक्षा एजेंसियां बांग्लादेश में हाल के राजनीतिक बदलावों को लेकर सतर्क हैं। खासकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई दिल्ली की चिंताएं लंबे समय से रही हैं। ऐसे में DGFI प्रमुख की दिल्ली यात्रा को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

संबंधों के सामने अभी भी कई चुनौतियां

हालांकि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में पहल शुरू हो गई है, लेकिन कई मुद्दे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण दिया जाना है। बांग्लादेश की राजनीति में यह एक संवेदनशील विषय बना हुआ है। हालांकि ढाका की नई सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी बाधा नहीं बनने देना चाहती और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

दोनों देशों की नजर रिश्तों को सामान्य करने पर

विश्लेषकों के अनुसार, भारत और बांग्लादेश दोनों ही यह समझते हैं कि स्थिर और सहयोगात्मक संबंध दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। व्यापार, सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर दोनों देशों का सहयोग लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में DGFI प्रमुख की यह गुप्त यात्रा दिल्ली-ढाका संबंधों में नई शुरुआत का संकेत मानी जा रही है। अगर आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच संवाद इसी तरह जारी रहता है, तो लंबे समय से चले आ रहे तनाव में कमी आ सकती है।


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