अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर चौंकाने वाले दावे, हमले के दौरान वेनेजुएला के सैनिक करने लगे खून की उल्टी, नाक से बहने लगा खून
गार्ड के अनुसार, कार्रवाई के दौरान अमेरिकी सेना ने बिना किसी नुकसान के सैकड़ों लड़ाकों को निष्क्रिय कर दिया। उसने कहा कि उसने इस तरह की सैन्य तकनीक न तो पहले कभी देखी थी और न ही इसके बारे में सुना था।

वाशिंगटन/कराकास। वेनेजुएला में अमेरिकी सेना की कथित कार्रवाई को लेकर सामने आ रही जानकारियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिकी टैब्लॉयड न्यूयॉर्क पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए की गई कार्रवाई के दौरान अमेरिका ने एक ऐसे शक्तिशाली और रहस्यमय हथियार का इस्तेमाल किया, जिसे प्रत्यक्षदर्शियों ने पहले कभी न देखा और न सुना बताया है। दावा किया गया है कि इस हथियार के प्रभाव से वेनेजुएला के सैनिक घुटनों पर आ गए, उनकी नाक से खून बहने लगा और कुछ सैनिक खून की उल्टी करने लगे।
प्रत्यक्षदर्शी गार्ड के बयान से सनसनी
रिपोर्ट में एक वेनेजुएलाई गार्ड के हवाले से पूरी घटना का विवरण दिया गया है। गार्ड के अनुसार, कार्रवाई के दौरान अमेरिकी सेना ने बिना किसी नुकसान के सैकड़ों लड़ाकों को निष्क्रिय कर दिया। उसने कहा कि उसने इस तरह की सैन्य तकनीक न तो पहले कभी देखी थी और न ही इसके बारे में सुना था।
गार्ड ने बताया, “हम पूरी तरह सतर्क थे। अचानक हमारे सभी रडार सिस्टम बंद हो गए। इसके बाद आसमान में बड़ी संख्या में ड्रोन दिखाई देने लगे। हमें समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए।” कुछ ही देर बाद हेलीकॉप्टर नजर आए, जिनमें से करीब 20 सैनिक उतरे। गार्ड के अनुसार, ये सैनिक पारंपरिक दुश्मनों से बिल्कुल अलग थे।
‘यह लड़ाई नहीं, नरसंहार था’
गार्ड ने दावा किया कि संख्या में कम होने के बावजूद अमेरिकी सैनिकों की रणनीति और फायरिंग की रफ्तार असाधारण थी। गार्ड ने कहा, “हम सैकड़ों थे, लेकिन हमें लड़ने का मौका ही नहीं मिला। उनकी सटीकता और गति ऐसी थी कि लग रहा था जैसे हर सैनिक एक मिनट में 300 गोलियां चला रहा हो। इसके बाद उसने उस हथियार का जिक्र किया, जिसने सबसे ज्यादा दहशत फैलाई। एक समय ऐसा आया जब उन्होंने कुछ ऐसा छोड़ा, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। वह एक बहुत तीव्र ध्वनि या ऊर्जा तरंग जैसी थी। अचानक ऐसा लगा जैसे सिर अंदर से फट रहा हो। गार्ड के अनुसार, इसके कुछ ही पलों में सैनिकों की नाक से खून बहने लगा, कुछ को खून की उल्टी होने लगी और कई जमीन पर गिर पड़े। हम हिल भी नहीं पा रहे थे। इसके इस्तेमाल के बाद लंबे समय तक खड़े होने की ताकत भी नहीं बची।
‘डायरेक्टेड एनर्जी वेपन’ का शक
एक पूर्व अमेरिकी खुफिया सूत्र ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि अमेरिकी सेना के पास कई वर्षों से डायरेक्टेड एनर्जी वेपंस मौजूद हैं। ये हथियार माइक्रोवेव या लेजर बीम जैसी केंद्रित ऊर्जा का उपयोग करके लक्ष्य को निष्क्रिय कर सकते हैं। सूत्र के मुताबिक, संभव है कि यह पहली बार हो जब अमेरिका ने इस तरह के हथियार का इस्तेमाल किसी वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में किया हो। इससे पहले भी वर्ष 2020 में भारत-चीन के लद्दाख सीमा विवाद के दौरान चीन पर भारतीय सैनिकों के खिलाफ माइक्रोवेव हथियार के इस्तेमाल के आरोप लगे थे, हालांकि बीजिंग ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था।
व्हाइट हाउस की चुप्पी
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रत्यक्षदर्शी के बयान से जुड़ा पोस्ट साझा किया। हालांकि, जब यह पूछा गया कि क्या इस पोस्ट को साझा करने का मतलब प्रशासन द्वारा इन दावों की पुष्टि है, तो व्हाइट हाउस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। इस चुप्पी ने अटकलों को और हवा दे दी है।
अमेरिकी जेल से मादुरो का संदेश
इसी बीच, आइएएनएस के अनुसार, वेनेजुएला के सांसद और मादुरो के बेटे निकोलस मादुरो गुएरा ने कहा कि उनके पिता ने अमेरिकी हिरासत से अपने वकीलों के जरिए संदेश भेजा है। संदेश में मादुरो ने कहा है कि वे ठीक हैं और पूरी तरह दृढ़ संकल्पित हैं।
गुएरा ने कहा, “उन्होंने हमें दुखी न होने को कहा है। उनका संदेश है—‘हम ठीक हैं। मैं एक योद्धा हूं।’”
वेनेजुएला में कैदियों की रिहाई जारी
उधर, वेनेजुएला में सरकार की ओर से कैदियों की रिहाई का सिलसिला तीसरे दिन भी जारी रहा। इसे सरकार ने सद्भावना के कदम के रूप में पेश किया है। डायोजेन्स एंगुलो को शनिवार को जेल से रिहा किया गया, जो एक साल और पांच महीने से हिरासत में थे। उन्हें 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से दो दिन पहले गिरफ्तार किया गया था, जब उन्होंने विपक्षी प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था।
अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी
वेनेजुएला में कथित अमेरिकी कार्रवाई, रहस्यमय हथियारों के इस्तेमाल के दावे और मादुरो की हिरासत से जुड़े घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींच लिया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे हथियारों का वास्तव में इस्तेमाल हुआ है, तो यह आधुनिक युद्ध की प्रकृति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।


