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2024 में बांग्‍लादेश सरकार गिरने को लेकर शेख हसीना का बड़ा बयान, यूनुस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

शेख हसीना ने दावा किया कि उन्हें कई विश्वसनीय सुझाव और सूचनाएं मिली थीं, जिनसे संकेत मिलता है कि जुलाई-अगस्त 2024 में हुए विरोध प्रदर्शनों के शुरुआती चरण में हिंसा को जानबूझकर भड़काया गया।

2024 में बांग्‍लादेश सरकार गिरने को लेकर शेख हसीना का बड़ा बयान, यूनुस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
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नई दिल्ली : बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अगस्त 2024 में अपनी सरकार के पतन को लेकर पहली बार खुलकर बात करते हुए विदेशी हस्तक्षेप की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है। छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर की कई घटनाएं अब भी रहस्य बनी हुई हैं और उनमें भाड़े के लड़ाकों की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता।

एक विशेष साक्षात्कार में शेख हसीना ने कहा, “मुझे नहीं पता कि मुहम्मद यूनुस द्वारा सत्ता हथियाने में विदेशी शक्तियों की कोई भूमिका थी या नहीं, लेकिन 2024 के विद्रोह के कई पहलू अब भी अस्पष्ट हैं।” उनके इस बयान को बांग्लादेश की हालिया राजनीतिक उथल-पुथल के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

‘विद्रोह की शुरुआत में भड़काई गई हिंसा’
शेख हसीना ने दावा किया कि उन्हें कई विश्वसनीय सुझाव और सूचनाएं मिली थीं, जिनसे संकेत मिलता है कि जुलाई-अगस्त 2024 में हुए विरोध प्रदर्शनों के शुरुआती चरण में हिंसा को जानबूझकर भड़काया गया। उन्होंने कहा, “कई संकेत ऐसे थे कि उकसाने वाले तत्व संभवतः विदेश से आए भाड़े के लड़ाके थे, जिन्होंने स्थिति को हिंसक बनाने में भूमिका निभाई।” उनके अनुसार, उस समय सरकार ने हालात को समझने और सच्चाई सामने लाने के लिए कदम भी उठाए थे।

जांच समिति बनाई, लेकिन अंतरिम सरकार ने रोकी
हसीना ने बताया कि जुलाई 2024 में उन्होंने घटनाओं की निष्पक्ष जांच के लिए एक न्यायिक जांच समिति का गठन किया था। इसका उद्देश्य आंदोलन के पीछे की वास्तविक ताकतों, हिंसा के स्रोत और संभावित विदेशी हस्तक्षेप की जांच करना था। हालांकि, उनका आरोप है कि सत्ता परिवर्तन के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस जांच को रोक दिया। उन्होंने कहा, “सत्ता में आते ही यूनुस ने यह जांच रोक दी। निस्संदेह इसलिए क्योंकि उन्हें पता था कि इससे मेरी सरकार को गिराने की उनकी सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश हो जाएगा।” हसीना के मुताबिक, जांच रोके जाने से ही यह स्पष्ट हो गया कि विरोध प्रदर्शनों के पीछे की मंशा संदिग्ध थी और इसमें विदेशी हस्तक्षेप की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

‘तब से कोई गंभीर जांच नहीं हुई’
पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जांच रुकने के बाद आज तक 2024 की घटनाओं की कोई स्वतंत्र और गंभीर जांच नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “तब से उन दिनों में वास्तव में क्या हुआ, इसकी सच्चाई सामने लाने का कोई ईमानदार प्रयास नहीं किया गया।” उन्होंने यह भी दावा किया कि अवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध अंतरिम सरकार की एक राजनीतिक चाल है। उनके अनुसार, यूनुस सरकार जानती है कि यदि स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव हुए तो अवामी लीग दोबारा सत्ता में लौट सकती है।

अंतरिम सरकार पर अल्पसंख्यकों को असुरक्षित छोड़ने का आरोप

शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सत्ता चरमपंथी समूहों को खुली छूट दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर-मुसलमानों, विशेषकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा में खतरनाक बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने कहा, “जिम्मेदारी उन लोगों की है जो इस समय सत्ता में हैं और अपने सबसे बुनियादी कर्तव्य—सभी नागरिकों की समान रूप से रक्षा करने में विफल रहे हैं।” हसीना के अनुसार, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा अचानक नहीं बढ़ी, बल्कि यह एक गैर-निर्वाचित सरकार के दौर में संभव हुई, जिसने सांप्रदायिक हिंसा को नजरअंदाज किया और चरमपंथी ताकतों को पूरी छूट दी।

भारत के समर्थन की सराहना
अपने बयान में शेख हसीना ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाया, जो सराहनीय है। उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की जनता को उनके समर्थन और मानवता के लिए धन्यवाद देती हूं। भारत बांग्लादेश का सबसे करीबी पड़ोसी और भरोसेमंद साझेदार रहा है।”

‘भारत-बांग्लादेश संबंधों की नींव बेहद मजबूत’
हसीना ने जोर देकर कहा कि मौजूदा राजनीतिक संकट के बावजूद भारत और बांग्लादेश के रिश्ते मजबूत बने रहेंगे। उनके अनुसार, दोनों देशों को इतिहास, भूगोल, साझा संघर्ष और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता जोड़ती है। उन्होंने कहा, “भारत-बांग्लादेश संबंधों की नींव इतनी मजबूत है कि वह इस कठिन दौर को भी झेल सकती है।” शेख हसीना के इन बयानों से साफ है कि बांग्लादेश में 2024 के सत्ता परिवर्तन और उसके पीछे की ताकतों को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में इन आरोपों और सवालों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज होने की संभावना है।


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