जंग रुकने की खुशी से झूमा बाजार, सेंसेक्स 2600 अंक उछला, 50 पैसे मजबूत हुआ रुपया
बुधवार को बाजार खुलने से पहले ही प्री-ओपन सेशन में सेंसेक्स और निफ्टी में तेज उछाल देखने को मिला, जो बाजार खुलने के बाद भी बरकरार रहा। वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये की मजबूती जैसे कई कारकों ने मिलकर बाजार को मजबूती दी है।

मुंबई। करीब 40 दिनों से मध्य पूर्व में जारी तनाव के थमने और अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम की खबर ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उत्साह भर दिया है। बुधवार को बाजार खुलने से पहले ही प्री-ओपन सेशन में सेंसेक्स और निफ्टी में तेज उछाल देखने को मिला, जो बाजार खुलने के बाद भी बरकरार रहा। वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये की मजबूती जैसे कई कारकों ने मिलकर बाजार को मजबूती दी है।
प्री-ओपन सेशन में ही बाजार में ‘हरियाली’
बुधवार सुबह बाजार खुलने से पहले ही निवेशकों का भरोसा साफ नजर आया। सेंसेक्स प्री-ओपन में करीब 2600 अंकों की छलांग लगाकर 77,290 के आसपास पहुंच गया। निफ्टी 50 भी करीब 3% यानी 700 से ज्यादा अंकों की बढ़त के साथ ट्रेड करता दिखा। यह तेजी इस बात का संकेत थी कि बाजार युद्धविराम की खबर को बेहद सकारात्मक रूप से ले रहा है और निवेशक जोखिम लेने के लिए तैयार हैं।
बाजार खुलने के बाद भी जारी रही तेजी
सुबह 9:20 बजे तक बाजार में यह तेजी और मजबूत होती नजर आई। सेंसेक्स करीब 2,686 अंकों की बढ़त के साथ 77,313 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी लगभग 800 अंकों की छलांग लगाकर 23,921 के स्तर पर पहुंच गया। यह दिखाता है कि बाजार में खरीदारी का माहौल बना हुआ है और निवेशक बड़ी संख्या में इक्विटी मार्केट में एंट्री कर रहे हैं।
रुपये में मजबूती, निवेशकों का भरोसा बढ़ा
शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा में भी मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 50 पैसे मजबूत होकर 92.56 पर पहुंच गया। रुपये में यह मजबूती इस बात का संकेत है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर बना हुआ है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भी रुपये को मिला है, क्योंकि भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। वायदा बाजार में तेल की कीमतों में करीब 6% की गिरावट देखी गई। कुछ सेगमेंट्स में तो लोअर सर्किट तक लग गया।
वैश्विक स्तर पर
ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड लगभग 97.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की खबर के बाद सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई, जिससे कीमतों में यह गिरावट आई। इससे भारत जैसे देशों के लिए महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
ग्लोबल मार्केट से मिले सकारात्मक संकेत
भारतीय बाजार की तेजी के पीछे वैश्विक संकेत भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। एशियाई बाजारों में भी मजबूती का रुख देखने को मिला। GIFT Nifty सुबह करीब 8 बजे 3% या 700 अंकों से ज्यादा उछलकर ट्रेड करता दिखा। यह संकेत था कि भारतीय बाजार भी मजबूत शुरुआत करेगा, जो बाद में सही साबित हुआ।
सीजफायर का सीधा असर बाजार पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्धविराम के ऐलान ने निवेशकों की चिंता को काफी हद तक कम किया है। युद्ध का खतरा टलने से वैश्विक सप्लाई चेन स्थिर होने की उम्मीद है। इससे ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आएगी, निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी। इन सभी कारणों से बाजार में तेजी आई है।
अमेरिकी बाजार में मिला-जुला असर
हालांकि, अमेरिकी शेयर बाजार पर इसका असर थोड़ा संतुलित रहा। मंगलवार को वॉल स्ट्रीट में मिला-जुला रुख देखने को मिला निवेशक अभी भी इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि यह युद्धविराम स्थायी होगा या नहीं इस वजह से वहां बाजार में उतनी तेज प्रतिक्रिया नहीं दिखी, जितनी एशियाई बाजारों में देखने को मिली।
RBI की बैठक पर भी टिकी नजर
बाजार की इस तेजी के बीच एक और बड़ा फैक्टर है- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक। आज RBI अपने फैसलों का ऐलान करेगा। उम्मीद है कि रेपो रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। अगर RBI दरों को स्थिर रखता है, तो यह बाजार के लिए और सकारात्मक संकेत हो सकता है।
आगे क्या रहेगा फोकस?
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगी:
- क्या अमेरिका-ईरान युद्धविराम स्थायी बनता है
- कच्चे तेल की कीमतों का ट्रेंड
- RBI की नीति और महंगाई के आंकड़े
- विदेशी निवेशकों (FII) का रुख
अगर ये सभी कारक सकारात्मक बने रहते हैं, तो बाजार में यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है।


