सैक्सनी-अनहाल्ट चुनाव: एएफडी का पलड़ा क्यों है भारी?
सैक्सनी-अनहाल्ट में 6 सितंबर को मतदान है. चुनाव पूर्व रुझानों में ‘एएफडी’ को 40 फीसदी से ज्यादा समर्थन मिलता दिख रहा है,

सैक्सनी-अनहाल्ट में 6 सितंबर को मतदान होना है. चुनाव से पहले के रुझानों में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी ‘एएफडी’ को 40 फीसदी से ज्यादा समर्थन मिलता दिख रहा है. आखिर कौन से मुद्दे इस पार्टी के पक्ष में माहौल बना रहे हैं?
जर्मनी के 16 राज्यों में से एक, सैक्सनी-अनहाल्ट अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है. डेसाउ में स्थित ‘बाउहाउस' से जुड़े दुनिया के कई मशहूर वास्तुकार यहां रहे और उन्होंने काम किया. आइसलेबेन और खास तौर पर विटेनबर्ग जैसे शहर महान समाज सुधारक मार्टिन लूथर की यादों को आज भी संजोए हुए हैं. यह विटेनबर्ग ही था जहां उन्होंने ‘कासल चर्च' के दरवाजे पर अपनी प्रसिद्ध ‘95 थीसिस' लगाए थे और यहीं से ‘रिफॉर्मेशन' (धर्म-सुधार आंदोलन) की शुरुआत हुई थी.
सैक्सनी-अनहाल्ट के पूर्वी हिस्से में लेउना और बिटरफेल्ड के आसपास ‘केमिकल ट्रायंगल' (रासायनिक क्षेत्र) भी स्थित है, जो आज भी लगभग 10,000 लोगों को रोजगार देता है. इसके पश्चिम में हार्ज पर्वत श्रृंखला फैली है, जबकि यूरोप के प्रमुख जलमार्गों में से एक, एल्बे नदी, राज्य के दक्षिण-पूर्व से उत्तर की ओर बहती है.
लिग्नाइट कोयले के इस्तेमाल को धीरे-धीरे बंद करने के फैसले के बाद हो रहे संरचनात्मक बदलावों के कारण, सैक्सनी-अनहाल्ट के दक्षिणी हिस्से को खुद को नए सिरे से ढालना पड़ रहा है. यहां बेरोजगारी दर अब भी देश के औसत से थोड़ी अधिक बनी हुई है. लगभग 21 लाख लोगों की आबादी वाला यह राज्य जर्मनी के कम आबादी वाले राज्यों में से एक है. यहां सिर्फ दो शहरों, राज्य की राजधानी माग्देबुर्ग और हाले में 2 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं.
फिर भी, सितंबर में पूरी दुनिया की नजरें पूर्वी जर्मनी के इस छोटे से राज्य पर टिकी रहने की उम्मीद है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद के जर्मन इतिहास में पहली बार ऐसा हो सकता है कि किसी ऐसे राजनीतिक दल का उम्मीदवार किसी राज्य की सरकार का प्रमुख बने, जिसे जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ने देश के कुछ हिस्सों में ‘पक्के तौर पर दक्षिणपंथी चरमपंथी' करार दिया है. अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) के प्रमुख उम्मीदवार उलरिष जीगमुंड हैं और उनकी पार्टी सभी जनमत सर्वेक्षणों में स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है.
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ताजा रुझानों में एएफडी सबसे आगे
चुनाव से ठीक पहले, सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी को 40 फीसदी से अधिक समर्थन मिलता दिख रहा है. वहीं, कंजर्वेटिव ‘क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन' (सीडीयू), जो 1990 में जर्मनी के एकीकरण के बाद से इस राज्य में लगातार मुख्य सत्तारूढ़ दल रही है, 23 फीसदी से 26 फीसदी के बीच सिमटकर काफी पीछे छूट गई है.
हालांकि, देश की खुफिया एजेंसी ने एएफडी को ‘पक्के तौर पर दक्षिणपंथी चरमपंथी' संगठन घोषित कर रखा है, पर जनता के बीच इसकी लोकप्रियता पर इसका कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है. ओपिनियन पोल में लेफ्ट पार्टी को 13 फीसदी जनसमर्थन मिलता दिख रहा है, जबकि सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) को 6 से 7 फीसदी समर्थन मिलता दिख रहा है. अब देखना यह होगा कि ‘ग्रीन्स' और बिजनेस-फ्रेंडली ‘एफडीपी' पार्टी राज्य की संसद में वापसी करने में सफल हो पाती है या नहीं.
सीडीयू के नेता राइनर हाजेलॉफ जनवरी 2026 में पद छोड़ने से पहले 15 सालों तक सैक्सनी-अनहाल्ट के मुख्यमंत्री रहे. ‘डेय स्पीगल' पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में, हाजेलॉफ ने कहा कि माग्देबुर्ग में राज्य की संसद में बैठते समय उन्हें अक्सर ऐसा महसूस होता था, ‘जैसे मैं वाइमर रिपब्लिक के राइषटाग के अंतिम दौर में बैठा हूं या फिर बाद के बर्लिन के स्पोर्टपलस्ट में.'
वाइमर रिपब्लिक जर्मनी का पहला लोकतंत्र था. उसका अंत 1933 में तब हुआ जब नाजियों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया. यह बर्लिन का ‘स्पोर्टपलस्ट' ही था, जहां अडोल्फ हिटलर के करीबी सहयोगी और नाजी प्रोपेगैंडा मंत्री जोसेफ गोएबेल्स ने 1943 में अपना कुख्यात ‘टोटल वॉर' (पूर्ण युद्ध) वाला भाषण दिया था.
हाजेलॉफ के उत्तराधिकारी, सीडीयू के ही स्वेन शुल्त्से को अब आने वाले चुनाव में एएफडी का सामना करना होगा. अगर वे असफल रहते हैं, तो राज्य की राजनीति में सीडीयू का लंबे समय से चला आ रहा दबदबा खत्म हो सकता है. हाल ही में, कंजर्वेटिव पार्टी ने सोशल डेमोक्रेट्स (एसपीडी) और एफडीपी के साथ गठबंधन में सरकार चलाई है.
सैक्सनी-अनहाल्ट का अनोखा राजनीतिक इतिहास
1994 से 2002 तक, सैक्सनी-अनहाल्ट देश की राजनीति के केंद्र में रहा. जुलाई 1994 में, सोशल डेमोक्रेट राइनहार्ड होपनर ने पर्यावरण-समर्थक ‘ग्रीन्स' के साथ मिलकर एक अल्पमत सरकार बनाई. इस सरकार को वामपंथी ‘पार्टी ऑफ डेमोक्रेटिक सोशलिज्म' (पीडीएस) का समर्थन प्राप्त था, जो पूर्वी जर्मनी की सत्ताधारी रही ‘सोशलिस्ट यूनिटी पार्टी' की उत्तराधिकारी पार्टी थी.
बर्लिन की दीवार गिरने और जर्मनी के एकीकरण के ठीक पांच साल बाद, पूर्वी जर्मनी की पूर्व सत्ताधारी पार्टी के उत्तराधिकारियों के साथ सहयोग करना पूरे देश में, विशेष रूप से कंजर्वेटिव तबके में, राजनीतिक सीमा लांघने जैसा माना गया.
सैक्सनी-अनहाल्ट में चरमपंथी दलों के प्रति समर्थन जर्मनी के कई अन्य हिस्सों की तुलना में लंबे समय से मजबूत रहा है. 1998 में, धुर दक्षिणपंथी ‘जर्मन पीपुल्स यूनियन' (डीवीयू), जिसे दक्षिणपंथी चरमपंथी के रूप में वर्गीकृत किया गया था, उसने 12.9 फीसदी वोट हासिल किए थे और राज्य की संसद में जगह बनाई थी. हालांकि, पार्टी के भीतर अंदरूनी मतभेद इतने गहरे थे कि उसने 2002 का राज्य चुनाव न लड़ने का फैसला किया.
सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी को समर्थन क्यों मिल रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वेक्षणों में एएफडी के इतने मजबूत उभार के पीछे सबसे बड़ी वजह देश के हालातों के प्रति लोगों की गहरी नाराजगी है. जर्मन एकीकरण के बाद के सालों में यहां की ढेर सारी नौकरियां चली गईं, खासकर कोयला खदानों और केमिकल इंडस्ट्री से जुड़े इलाकों में.
सैक्सनी-अनहाल्ट गंभीर जनसांख्यिकीय चुनौतियों से भी जूझ रहा है. 48.3 वर्ष की औसत आयु के साथ, 2024 में यहां जर्मनी की सबसे बुजुर्ग आबादी थी. इस राज्य में युवाओं की उम्र में पुरुषों और महिलाओं की संख्या में बड़ा अंतर है. जहां 18 से 29 वर्ष की आयु के पुरुषों की संख्या लगभग 1,20,240 है. वहीं, महिलाओं की संख्या केवल 1,03,177 के आसपास है. 2025 के अंत में, यहां विदेशी नागरिकों की हिस्सेदारी केवल 9 फीसदी थी, जबकि पूरे देश में यह लगभग 15 फीसदी थी. कई युवा इस राज्य को छोड़कर चले गए और फिर कभी वापस नहीं लौटे.
राज्य में बाहर से आए विदेशी लोगों की आबादी दूसरे इलाकों के मुकाबले काफी कम है, फिर भी यहां के बहुत से लोग नए प्रवासियों के आने का विरोध कर रहे हैं. असल में, बीते 10 सालों में यह आंकड़ा बहुत तेजी से बढ़ा है. राज्य के सांख्यिकी विभाग के मुताबिक, 2015 के बाद से बिना जर्मन नागरिकता वाले लोगों की तादाद दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है.
सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी के सत्ता में आने का क्या मतलब होगा?
कई विश्लेषकों का मानना है कि लगभग 25 साल पहले धुर दक्षिणपंथी दल डीवीयू को मिली सफलता यह दिखाती है कि सैक्सनी-अनहाल्ट में दक्षिणपंथी चरमपंथी पार्टियों का एक वफादार वोटर बेस लंबे समय से मौजूद रहा है. आज वही वोट बैंक काफी हद तक एएफडी का समर्थन कर रहा है, चाहे उसका चुनावी घोषणापत्र या नीतियां कुछ भी हों.
केमनित्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के राजनीति विज्ञानी बेंजामिन होहने ने पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘डॉयचलैंडफुंक' को बताया कि उनका मानना है कि अगर एएफडी सैक्सनी-अनहाल्ट में सत्ता में आती है, तो वह संवैधानिक व्यवस्था को बदलने की कोशिश करेगी. उनका तर्क था कि उदार लोकतांत्रिक और कानून के शासन के सिद्धांतों को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जाएगा.
उन्होंने आगे बताया, "मुझे लगता है कि एएफडी पार्टी इस समय अमेरिका पर बहुत करीब से नजर रख रही है.” उनकी राय में, अमेरिका में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का प्रशासन भी इसी तरह के रास्ते पर चल रहा है.
हालांकि, होहने का मानना है कि इस तरह के कट्टर एजेंडे को किसी एक राज्य में लागू करना कठिन होगा. उन्होंने कहा, "आप बस एक राज्य में कोई कदम उठाकर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि सब कुछ धुर दक्षिणपंथी एजेंडे के हिसाब से चलने लगेगा.”
इन सबके बीच एक बात तो तय है कि 6 सितंबर को सबकी नजरें जर्मनी के बीचों-बीच स्थित इस छोटे से राज्य पर टिकी होंगी.


