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यमन में सऊदी अरब का बड़ा हवाई हमला, UAE समर्थित STC बलों पर बमबारी, 20 की मौत
इन हमलों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित सदर्न ट्रांजिशन काउंसिल (STC) को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाके मारे गए हैं। सूत्रों के अनुसार इस सैन्य कार्रवाई में सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया

अदन/सना। यमन में सऊदी अरब समर्थित सरकार और यूएई समर्थित अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC ) के बीच तनाव एक बार फिर खुली सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है। शुक्रवार को सऊदी समर्थित सरकार के लड़ाकू विमानों ने एसटीसी के कब्जे वाले इलाकों पर हवाई बमबारी और जमीनी हमले किए। इन हमलों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित सदर्न ट्रांजिशन काउंसिल (STC) को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाके मारे गए हैं।
सूत्रों के अनुसार इस सैन्य कार्रवाई में सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। इस घटनाक्रम ने अरब जगत के दो प्रभावशाली देशों सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE ) के बीच मतभेदों को और गहरा कर दिया है। इसके पहले सऊदी अरब ने UAE को देश से बाहर निकलने के लिए 24 घंटे की समय सीमा दी थी।
एसटीसी के प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश
सऊदी समर्थित सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई यूएई समर्थित एसटीसी की उस कथित योजना को विफल करने के लिए की गई, जिसके तहत वह यमन के दक्षिणी हिस्सों में अपना कब्जा और प्रभाव बढ़ाना चाहता है। सरकार का दावा है कि एसटीसी लगातार सैन्य जमावड़ा कर रहा था और अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में था।
तीन धड़ों में बंटा यमन
गौरतलब है कि यमन इस समय व्यावहारिक रूप से तीन बड़े प्रभाव क्षेत्रों में बंटा हुआ है। एक ओर सऊदी समर्थित अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार है, दूसरी ओर ईरान समर्थित हाउती विद्रोही संगठन का बड़ा इलाकों पर कब्जा है, जबकि दक्षिणी यमन के कई हिस्सों में एसटीसी का नियंत्रण है। इन तीनों धड़ों के बीच लंबे समय से वैचारिक, राजनीतिक और सैन्य कटुता बनी हुई है, जो समय-समय पर हिंसक झड़पों में बदल जाती है।
जहाजों पर हमले से शुरू हुआ टकराव
इसी सप्ताह सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने उन जहाजों पर भी हमला किया था, जिनके बारे में आरोप लगाया गया कि वे एसटीसी के लिए हथियार और सैन्य वाहन लेकर आ रहे थे। इस घटना के बाद से ही दोनों पक्षों के बीच टकराव की आशंका तेज हो गई थी, जो अब हवाई और जमीनी हमलों के रूप में सामने आ गई है।
गवर्नर का बयान: युद्ध नहीं चाहते
सऊदी समर्थित सरकार के गवर्नर सलेम अहमद सईद अल-खुनबाशी ने कहा कि यह कार्रवाई यूएई समर्थित अलगाववादियों के खिलाफ की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का किसी व्यापक युद्ध को छेड़ने का कोई इरादा नहीं है, बल्कि यह कदम केवल सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया।
एसटीसी का पलटवार
एसटीसी के प्रवक्ता मुहम्मद अल-नकीब ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर कम से कम सात बार हवाई हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि इन हमलों से यमन में शांति स्थापित नहीं हो सकती। जानकारी के अनुसार, हमलों में एसटीसी के सबसे बड़े सैन्य ठिकानों में शामिल अल-खाश को निशाना बनाया गया, जहां हवाई हमलों के साथ-साथ जमीनी कार्रवाई भी की गई। हालांकि, इन हमलों में हुए जान-माल के नुकसान का अभी तक आधिकारिक आकलन सामने नहीं आया है।
‘महिलाएं भी तैयार’
प्रवक्ता अल-नकीब ने दावा किया कि सऊदी अरब और उसकी समर्थित सरकार की कार्रवाई से निपटने के लिए एसटीसी की सेना पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल लड़ाके ही नहीं, बल्कि इलाके की महिलाएं भी अपने क्षेत्रों की रक्षा के लिए मुकाबले को तैयार हैं। यह बयान संघर्ष की गंभीरता और स्थानीय स्तर पर उभर रहे उग्र भावनाओं को दर्शाता है।
अदन हवाई अड्डा बंद
सऊदी अरब और एसटीसी के बीच बढ़े तनाव का सीधा असर नागरिक आवागमन पर भी पड़ा है। हालात बिगड़ने के चलते अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से यात्री और मालवाहक विमानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इससे पहले से ही मानवीय संकट झेल रहे यमन में आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
सऊदी-यूएई की चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम पर सऊदी अरब और यूएई की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह टकराव आगे बढ़ता है, तो यमन संकट के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र की राजनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।
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