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Bab el Mandeb: हूती लड़ाकों ने किया सऊदी के वायुसैनिक अड्डे पर हमला, कच्‍चे तेल में तेज उछाल

लाल सागर और उसके आसपास हूती गतिविधियों के बढ़ने से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी अहम मुद्दा बन गई है। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

Bab el Mandeb: हूती लड़ाकों ने किया सऊदी के वायुसैनिक अड्डे पर हमला, कच्‍चे तेल में तेज उछाल
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रियाद/मस्कट: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यमन के हूती लड़ाकों की ओर से सऊदी अरब के ठिकानों पर हमले और तेल आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब चार प्रतिशत तक उछाल आया। इसी दौरान अरब देशों और ईरान के बीच ओमान में प्रस्तावित बैठक भी स्थगित हो गई। बैठक में अमेरिका-ईरान संघर्ष और हूती गतिविधियों पर चर्चा होनी थी।

सऊदी एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा

हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब की सीमा के करीब स्थित हामिस मुशैत एयरबेस को निशाना बनाने का दावा किया है। बताया गया है कि हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। हूती के अनुसार, एयरबेस पर लड़ाकू विमानों के हैंगर, रडार प्रणाली, रनवे और गोला-बारूद रखने वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया। हूती संगठन ने इस हमले को सऊदी अरब की ओर से यमन में किए गए हवाई हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। हालांकि, हमले से हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि और उसके वास्तविक स्तर को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

तेल पाइपलाइन को नुकसान, आपूर्ति पर बढ़ा दबाव

हूती हमलों के बीच सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन से जुड़ी आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने के बाद इसके जरिए सामान्य आपूर्ति बहाल होने में समय लगने की आशंका जताई जा रही है। सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक और सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में उसकी उत्पादन या निर्यात क्षमता प्रभावित होने की आशंका भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तुरंत दिखाई देती है। सोमवार को वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता में कमी की खबरों के साथ कीमतों में तेज तेजी देखी गई।

चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा तेल

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। सोमवार को कीमत करीब चार प्रतिशत बढ़कर 109.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह करीब 16 सप्ताह यानी चार महीने का उच्चतम स्तर बताया जा रहा है। अमेरिकी बाजार में भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ा। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल की सबसे ऊंची कीमत 6.23 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई। बाजार विशेषज्ञों की चिंता यह है कि अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष और समुद्री मार्गों पर जोखिम लंबे समय तक बना रहा तो ऊर्जा कीमतों में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

बाब-अल-मंदेब को लेकर बढ़ी चिंता

लाल सागर और उसके आसपास हूती गतिविधियों के बढ़ने से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी अहम मुद्दा बन गई है। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की तेल जरूरत का करीब पांच प्रतिशत हिस्सा इस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। हूती लड़ाकों ने सऊदी तेल टैंकरों के आवागमन पर पहले से प्रतिबंध लगा रखा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अन्य देशों के व्यापारिक जहाजों का आवागमन फिलहाल जारी है। इसके बावजूद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा बाजार में जोखिम की धारणा मजबूत हुई है।

अमेरिकी मदद सीमित रहने से सऊदी पर दबाव

हूती हमलों के बीच अमेरिका के सामने भी मुश्किल स्थिति है। सऊदी अरब उसका प्रमुख क्षेत्रीय सहयोगी है, लेकिन फिलहाल अमेरिकी सहायता मुख्य रूप से खुफिया सूचनाओं तक सीमित रहने की बात सामने आई है। इससे सऊदी अरब को हूती हमलों का सीधे मुकाबला करने में अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, अगस्त में हुए समझौते के अनुरूप पाकिस्तान और तुर्किये से सैन्य सहयोग की सऊदी अपेक्षाओं को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। दोनों देशों के संघर्ष में सीधे उतरने को लेकर हिचकिचाहट की खबरें हैं।

ओमान बैठक टलने से कूटनीतिक प्रयासों को झटका

इसी बीच अरब देशों और ईरान के बीच सोमवार को ओमान में प्रस्तावित बैठक स्थगित हो गई। बैठक का उद्देश्य अमेरिका-ईरान संघर्ष और हूती गतिविधियों से पैदा हुए क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा करना था। बैठक के टलने से पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के कूटनीतिक प्रयासों को झटका माना जा रहा है। यदि सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों पर खतरा बना रहता है तथा संघर्ष का दायरा बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से एशिया, यूरोप और अमेरिका समेत दुनिया के कई बाजारों में ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति वैश्विक तेल बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।


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