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पुतिन ने यूक्रेन का शांति प्रस्ताव ठुकराया, कहा- लक्ष्य पूरे होने तक जारी रहेगा युद्ध

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की ओर से आए युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सैन्य अभियान रोकने का कोई सवाल नहीं उठता। उनके अनुसार, रूस अपने रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी लक्ष्यों को हासिल किए बिना पीछे नहीं हटेगा।

पुतिन ने यूक्रेन का शांति प्रस्ताव ठुकराया, कहा- लक्ष्य पूरे होने तक जारी रहेगा युद्ध
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मॉस्को/कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे पर लगातार किए जा रहे हमलों ने रूस की ईंधन आपूर्ति प्रणाली पर दबाव बढ़ा दिया है। इस बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट कर दिया है कि मॉस्को युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है और जब तक सैन्य अभियान के निर्धारित उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक लड़ाई जारी रहेगी।

युद्धविराम प्रस्ताव पर पुतिन का स्पष्ट संदेश

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की ओर से आए युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सैन्य अभियान रोकने का कोई सवाल नहीं उठता। उनके अनुसार, रूस अपने रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी लक्ष्यों को हासिल किए बिना पीछे नहीं हटेगा। पुतिन ने यह भी आरोप लगाया कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले कर युद्ध के मैदान में अपनी कमजोर स्थिति से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।

ऊर्जा ढांचे पर हमलों से बढ़ी मुश्किलें

हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस की तेल और गैस अवसंरचना को निशाना बनाते हुए कई हमले किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 50 से अधिक हमलों में रूस की कई प्रमुख तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के मुताबिक, देश की 33 प्रमुख रिफाइनरियों में से 24 किसी न किसी स्तर पर प्रभावित हुई हैं। इनमें से कई संयंत्रों में उत्पादन क्षमता घट गई है, जबकि कुछ स्थानों पर तेल शोधन अस्थायी रूप से बंद होने की खबरें हैं। इससे रूस की घरेलू ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।

घरेलू मांग पूरी करना बना चुनौती

ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों के बाद रूस को पेट्रोल और डीजल की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने पड़ रहे हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूस कुछ देशों से ईंधन आपूर्ति के विकल्प तलाश रहा है, ताकि घरेलू बाजार में कमी न आए। हालांकि, इन दावों पर रूसी सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ते दबाव का असर रूस के औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।

क्रीमिया में भी ईंधन आपूर्ति प्रभावित

रूस के नियंत्रण वाले क्रीमिया क्षेत्र में भी ईंधन की उपलब्धता प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। कई इलाकों में पेट्रोल और डीजल की सीमित आपूर्ति के कारण ईंधन केंद्रों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन युद्ध की परिस्थितियों के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं।

कीव पर रूसी हमले में बढ़ा मृतकों का आंकड़ा

दूसरी ओर, यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस द्वारा किए गए हालिया हमले में मृतकों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, राहत और बचाव कार्य जारी है तथा कई घायल लोगों का अस्पतालों में उपचार चल रहा है। हमले के बाद कई इमारतों और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

विशेषज्ञों की नजर युद्ध की बदलती रणनीति पर

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष अब पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ एक-दूसरे की रणनीतिक अवसंरचना को भी निशाना बना रहे हैं। रूस के ऊर्जा नेटवर्क पर हमलों और यूक्रेन के शहरों पर बढ़ते हवाई हमलों से यह संघर्ष और जटिल होता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों का सिलसिला जारी रहा, तो इसका असर केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से सैन्य कार्रवाई जारी है और युद्ध समाप्त होने के कोई तत्काल संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं।


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