UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का रूस ने किया समर्थन, जानिए राह में कौन-कौन सी चुनौतियां
UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की मांग कई दशकों से चली आ रही है। 1990 के दशक से भारत सुरक्षा परिषद के ढांचे में सुधार और स्थायी सीट के लिए अपनी दावेदारी रखता रहा है। 2008 में संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू हुई।

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को रूस का समर्थन मिला है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन करता है। लावरोव ने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की अतिरिक्त स्थायी सीटों के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने विशेष रूप से जर्मनी और जापान का उल्लेख करते हुए इन देशों पर सैन्यवाद और बदले की भावना की ओर बढ़ने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा कि UNSC में सुधार के दौरान मौजूदा स्थायी सदस्यों के अधिकारों और शक्तियों को कम नहीं किया जाना चाहिए।
भारत की स्थायी सीट की मांग पुरानी
UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की मांग कई दशकों से चली आ रही है। 1990 के दशक से भारत सुरक्षा परिषद के ढांचे में सुधार और स्थायी सीट के लिए अपनी दावेदारी रखता रहा है। 2008 में संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू हुई। इसके बाद 2010 में भारत ने ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ मिलकर G4 समूह बनाया। इस समूह का मुख्य उद्देश्य UNSC में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने और सदस्यता के मौजूदा ढांचे में बदलाव की मांग को आगे बढ़ाना रहा है। 2026 में भी सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन सदस्य देशों के बीच परिषद के नए स्वरूप को लेकर अभी सहमति नहीं बनी है।
दुनिया की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व
भारत की दावेदारी के समर्थन में उसकी बड़ी आबादी, अर्थव्यवस्था और वैश्विक भूमिका जैसे तर्क दिए जाते रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया की करीब 17 फीसदी आबादी भारत में रहती है। भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। इसके अलावा, पिछले एक दशक में भारत की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर 7 फीसदी से अधिक रहने का दावा किया गया है। समर्थकों का तर्क है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका को संयुक्त राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश भी है। स्थायी सदस्यता के समर्थकों का कहना है कि सुरक्षा परिषद में भारत की भागीदारी से परमाणु निरस्त्रीकरण और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उसकी भूमिका बढ़ सकती है।
UNSC में अभी 15 सदस्य
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य हैं—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। इन पांचों देशों के पास वीटो पावर है। इसके अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं। इनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा करती है और इनका कार्यकाल दो वर्ष का होता है। स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना जरूरी होगा। इसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ सदस्य देशों की आवश्यक औपचारिक मंजूरी चाहिए। साथ ही मौजूदा पांचों स्थायी सदस्यों की स्वीकृति भी जरूरी है।
चीन का रुख बनी बड़ी चुनौती
भारत की स्थायी सदस्यता के रास्ते में चीन के रुख को महत्वपूर्ण मुद्दा माना जाता है। भारत और चीन के बीच सीमा, क्षेत्रीय और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर चीन ने अब तक वैसा स्पष्ट समर्थन नहीं दिया है जैसा रूस की ओर से सामने आया है। दूसरी ओर, Uniting for Consensus (UfC) समूह UNSC में नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने के बजाय गैर-स्थायी सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखता है। इससे G4 की मांग को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
अफ्रीका और वीटो पर भी पेच
UNSC सुधार में अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधित्व का सवाल भी अहम है। अफ्रीकी देशों के लिए कितनी सीटें हों और उनका स्वरूप क्या हो, इस पर अभी व्यापक सहमति नहीं बनी है। इसके साथ ही नए स्थायी सदस्यों को वीटो पावर मिलेगी या नहीं, यह सबसे जटिल सवालों में से एक है। मौजूदा स्थायी सदस्य अपने अधिकारों को बनाए रखने पर जोर देते हैं, जबकि G4 स्थायी सदस्यता को वास्तविक अधिकारों के साथ देने की मांग करता रहा है। इस बीच रूस का भारत की स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन UNSC सुधार पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम के रूप में सामने आया है। हालांकि, सुरक्षा परिषद के विस्तार के लिए अंतिम सहमति तक पहुंचने में कई देशों के अलग-अलग हित और प्रस्ताव बड़ी भूमिका निभाएंगे।


