रूस का सनसनीखेज दावा, ब्रिटेन-फ्रांस यूक्रेन को परमाणु हथियार देने की योजना बना रहे
रूसी विदेश खुफिया सेवा (एसवीआर) ने अपने बयान में कहा कि पश्चिमी शक्तियां युद्ध में यूक्रेन की सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए संवेदनशील हथियारों की आपूर्ति पर विचार कर रही हैं। हालांकि इस दावे के समर्थन में रूस ने कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है।

मास्को: रूस की विदेशी खुफिया एजेंसी ने मंगलवार को एक बड़ा और विवादास्पद दावा किया कि ब्रिटेन और फ्रांस गोपनीय तरीके से यूक्रेन को परमाणु हथियार उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहे हैं। यह आरोप ऐसे समय सामने आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को चार वर्ष पूरे हो चुके हैं और संघर्ष पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। रूसी विदेश खुफिया सेवा (एसवीआर) ने अपने बयान में कहा कि पश्चिमी शक्तियां युद्ध में यूक्रेन की सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए संवेदनशील हथियारों की आपूर्ति पर विचार कर रही हैं। हालांकि इस दावे के समर्थन में रूस ने कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है। ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
चौथी बरसी पर कीव में यूरोपीय नेताओं का जमावड़ा
रूस के आरोपों के बीच यूक्रेन पर रूसी हमले की चौथी बरसी पर कई यूरोपीय नेता एकजुटता दिखाने के लिए कीव पहुंचे। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन समेत कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री यूक्रेनी राजधानी में मौजूद रहे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “हम यूक्रेन के साथ हैं और रहेंगे।” इन दौरों को रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों की राजनीतिक और कूटनीतिक एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
जेलेंस्की का संदेश
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने युद्ध की चौथी बरसी पर एक ऑनलाइन संदेश में कहा कि चार वर्षों के संघर्ष के बावजूद रूस यूक्रेन को तोड़ने में सफल नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा, “हमने अपनी स्वतंत्रता की रक्षा की है। हमने अपने देश का दर्जा नहीं खोया है। पुतिन अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाए। उन्होंने यूक्रेनवासियों को नहीं तोड़ा और यह युद्ध नहीं जीता।” जेलेंस्की ने यह भी दावा किया कि रूस की बड़ी और बेहतर सुसज्जित सेना ने पिछले एक वर्ष में यूक्रेन के केवल 0.79 प्रतिशत अतिरिक्त क्षेत्र पर ही कब्जा किया है।
रूस का रुख: अभियान जारी रहेगा
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूस ने अभी तक अपने सभी सैन्य लक्ष्य हासिल नहीं किए हैं, लेकिन यूक्रेन के खिलाफ “विशेष सैन्य अभियान” जारी रहेगा। उन्होंने दोहराया कि रूस अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जब तक आवश्यक होगा, अभियान चलता रहेगा। रूस ने 24 फरवरी, 2022 को यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। तब से यह संघर्ष यूरोप के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य संकट बन चुका है।
परमाणु हथियारों के आरोप की संवेदनशीलता
रूस का यह आरोप कि ब्रिटेन और फ्रांस यूक्रेन को परमाणु हथियार देने की योजना बना रहे हैं, वैश्विक स्तर पर अत्यंत संवेदनशील है। यूक्रेन 1994 के बुडापेस्ट मेमोरेंडम के तहत अपने परमाणु हथियार छोड़ चुका है और वह परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का हस्ताक्षरकर्ता है। यदि पश्चिमी देश वास्तव में इस दिशा में कोई कदम उठाते हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा। हालांकि अब तक पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को पारंपरिक हथियार, रक्षा प्रणाली और वित्तीय सहायता ही प्रदान की है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस का यह बयान युद्ध के कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक आयाम का हिस्सा भी हो सकता है।
कूटनीतिक प्रयास अब तक बेअसर
चार वर्षों से जारी इस युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया है। हाल ही में जेनेवा में अमेरिका की पहल पर रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता हुई थी, जो बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। इससे पहले इस महीने की शुरुआत में अबू धाबी में भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। अमेरिकी प्रशासन लगातार दोनों पक्षों पर बातचीत के लिए दबाव बना रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाई जारी है।
युद्ध की कीमत: भारी जनहानि और तबाही
सेंटर फॉर स्ट्रेटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध में दोनों पक्षों के सैनिकों की मौत, घायल या लापता होने की संख्या 20 लाख से अधिक हो सकती है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चार वर्षों में करीब दो लाख रूसी सैनिकों की जान गई है। हालांकि मास्को और कीव दोनों ने आधिकारिक सैन्य नुकसान के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। रूस ने अब तक सार्वजनिक रूप से केवल छह हजार सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की है। दोनों देश एक-दूसरे के नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के आरोप लगाते रहे हैं। युद्ध के कारण यूक्रेन के कई शहरों में भारी तबाही हुई है, बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।
यूरोप की सुरक्षा पर गहरा असर
यह संघर्ष केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा संरचना को प्रभावित कर रहा है। नाटो देशों ने अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ाया है और पूर्वी यूरोप में तैनाती मजबूत की है। ऊर्जा संकट, शरणार्थियों की समस्या और वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर भी इस युद्ध का व्यापक प्रभाव पड़ा है।
युद्ध अनिश्चितता के दौर में
चार वर्षों के बाद भी युद्ध का कोई स्पष्ट अंत नजर नहीं आ रहा है। रूस अपने सैन्य अभियान को जारी रखने की बात कह रहा है, जबकि यूक्रेन पश्चिमी समर्थन के बल पर प्रतिरोध बनाए हुए है। रूस के परमाणु हथियार संबंधी आरोपों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। यदि यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठता है, तो वैश्विक कूटनीति में नई हलचल संभव है। फिलहाल, यूरोप का यह लंबा और महंगा युद्ध अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां मोर्चे पर गोलाबारी जारी है और कूटनीतिक मोर्चे पर ठहराव बना हुआ है। दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या आने वाले महीनों में वार्ता का कोई ठोस रास्ता निकलेगा या संघर्ष और लंबा खिंचेगा।


