Top
Begin typing your search above and press return to search.

मॉस्को पर अब तक का सबसे बड़ा हमला, आसमान से बरसी तबाही, यूक्रेन ने दागे 1600 से अधिक ड्रोन, दहल उठा रूस

रूसी अधिकारियों के मुताबिक, रातभर में यूक्रेन की ओर से बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे गए, जिनमें से कई को मॉस्को और उसके आसपास के इलाकों में निशाना बनाया गया।

मॉस्को पर अब तक का सबसे बड़ा हमला, आसमान से बरसी तबाही, यूक्रेन ने दागे 1600 से अधिक ड्रोन, दहल उठा रूस
X

मॉस्को/कीव: रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन राजधानी मॉस्को समेत कई इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, रातभर में यूक्रेन की ओर से बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे गए, जिनमें से कई को मॉस्को और उसके आसपास के इलाकों में निशाना बनाया गया। मॉस्को के मेयर ने इसे राजधानी पर अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक बताया। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए मतदान का तीसरा और अंतिम दिन चल रहा था। चुनाव को फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव बताया जा रहा है।

मॉस्को के आसपास भारी ड्रोन गतिविधि

मॉस्को के मेयर के मुताबिक, ड्रोन हमलों के कारण राजधानी के कुछ हिस्सों में नुकसान हुआ। एक तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई है। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव ने दो लोगों की मौत और करीब 20 लोगों के घायल होने की जानकारी दी। मृतकों में 74 वर्षीय पुरुष और 44 वर्षीय महिला शामिल बताए गए हैं। हमलों के बाद रूस के कई हिस्सों में हवाई सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय की गई। ड्रोन हमलों के कारण विमान सेवाओं पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आईं। हालांकि, नुकसान और हमलों के पूरे दायरे को लेकर अलग-अलग सूचनाएं सामने आती रही हैं।

जेलेंस्की ने लंबी दूरी की कार्रवाई को बताया अहम

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेन की लंबी दूरी की सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि इसका रूस पर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि रूस के एक महत्वपूर्ण तेल उद्योग प्रतिष्ठान और एक लॉजिस्टिक्स सेंटर को निशाना बनाया गया। जेलेंस्की के अनुसार, इन ठिकानों का इस्तेमाल रूस की सैन्य गतिविधियों को समर्थन देने के लिए किया जाता है। उन्होंने कार्रवाई में इस्तेमाल किए गए विभिन्न ड्रोन और हथियार प्रणालियों का भी उल्लेख किया तथा यूक्रेन की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के कर्मियों को धन्यवाद दिया।

चुनाव के बीच हमले ने बढ़ाई राजनीतिक संवेदनशीलता

रूस में शुक्रवार से संसदीय चुनाव के लिए मतदान चल रहा था और रविवार को अंतिम चरण था। यह चुनाव यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे यूक्रेन में तैनात रूसी सैनिकों के लिए जनता के समर्थन से भी जोड़ा है। सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया पार्टी के चुनाव में अपना दबदबा बनाए रखने की उम्मीद जताई गई थी। वहीं, युद्ध के विरोध में रहने वाले कई उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने और विपक्षी गतिविधियों पर प्रतिबंधों को लेकर रूस की चुनावी प्रक्रिया की आलोचना भी होती रही है। यूक्रेन ने रूस के चुनाव को पहले ही खारिज करते हुए इसे दिखावटी चुनाव बताया है। दूसरी ओर, यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू होने के कारण वहां चुनाव स्थगित हैं।

युद्ध के बीच आर्थिक दबाव भी मुद्दा

रूस में चुनाव ऐसे समय हुआ है जब देश लंबे समय से युद्ध और उससे जुड़े आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध से जुड़ी लागत और आर्थिक परिस्थितियां मतदाताओं के लिए चिंता का विषय हो सकती हैं। हालांकि, चुनावी नतीजों पर इसका वास्तविक असर कितना पड़ा, इसका आकलन आधिकारिक परिणाम सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा। रूस में सेना से जुड़ी ऐसी सूचनाओं के प्रसार पर भी कड़े कानून लागू हैं जिन्हें सरकार फर्जी या सेना को बदनाम करने वाला मानती है। इस कारण युद्ध को लेकर स्वतंत्र राजनीतिक अभियान और सार्वजनिक आलोचना के लिए सीमाएं बनी हुई हैं।

मॉस्को ने चुनाव में यूक्रेनी दखल का लगाया आरोप

रूसी अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में यूक्रेन की ओर से हस्तक्षेप किए जाने का भी आरोप लगाया। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, मॉस्को की ऑनलाइन वोटिंग प्रणाली पर साइबर हमला हुआ। हालांकि, इस साइबर हमले के पीछे यूक्रेन का हाथ होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुतिन ने भी यूक्रेन पर चुनाव में बाधा डालने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने रूसी नियंत्रण वाले जपोरिज्जिया क्षेत्र में एक चुनाव अधिकारी के घर पर हुए हमले का जिक्र किया और दावा किया कि इसमें चुनाव अधिकारी एलेना अस्तानिना की मौत हुई।

जमीन पर धीमी लड़ाई, आसमान में बढ़ा टकराव

रूस-यूक्रेन युद्ध के मौजूदा चरण में ड्रोन और लंबी दूरी के हथियारों की भूमिका लगातार बढ़ी है। पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में भारी सुरक्षा और निगरानी के कारण बड़े पैमाने पर सैनिकों की सीधी आवाजाही मुश्किल हुई है। इसके चलते दोनों पक्ष लंबी दूरी से हमले करने वाले ड्रोन और मिसाइलों पर अधिक निर्भर हैं। यूक्रेन ने रूस के भीतर सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने के लिए लंबी दूरी के ड्रोन विकसित किए हैं। वहीं रूस भी यूक्रेन के शहरों और बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले करता रहा है। मॉस्को पर ताजा हमलों ने यह संकेत दिया है कि चुनाव जैसे संवेदनशील राजनीतिक मौके पर भी युद्ध का सैन्य मोर्चा रूस की राजधानी तक पहुंच सकता है। अब निगाहें एक ओर चुनाव परिणाम और दूसरी ओर रूस तथा यूक्रेन की अगली सैन्य रणनीति पर हैं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it