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ईरान में सख्ती से थमे विरोध प्रदर्शन, पुतिन ने नेतन्याहू और पेजेश्कियन से की बात, ट्रंप ने मानी यह बात

ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने देश के विभिन्न हिस्सों में कई और लोगों को हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारियों पर “राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे” में डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

ईरान में सख्ती से थमे विरोध प्रदर्शन, पुतिन ने नेतन्याहू और पेजेश्कियन से की बात, ट्रंप ने मानी यह बात
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तेहरान/वॉशिंगटन/मॉस्को। ईरान में बढ़ती महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की कड़ी कार्रवाई का असर साफ दिखने लगा है। व्यापक गिरफ्तारियों, कड़े दमन और सख्त चेतावनियों के चलते आंदोलन काफी हद तक ठंडा पड़ गया है। सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका की ओर से हस्तक्षेप की धमकियां दी जा रही हैं और पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।

गिरफ्तारियां जारी, मौलानाओं की सख्त मांग


ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने देश के विभिन्न हिस्सों में कई और लोगों को हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारियों पर “राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे” में डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच, एक प्रभावशाली मौलाना ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के लिए मौत की सजा देने की मांग कर दी है। उन्होंने अमेरिका और खास तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा। इन बयानों ने यह संकेत दिया है कि ईरान का धार्मिक नेतृत्व किसी भी कीमत पर सत्ता को चुनौती देने वाले आंदोलनों को कुचलने के मूड में है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सत्ता में रहे धार्मिक प्रतिष्ठान के लिए यह आंदोलन अब तक की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।

अमेरिकी हमले की आशंका कुछ कम


हालांकि, हाल के दिनों में अमेरिका की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं कुछ कम होती दिख रही हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्हें जानकारी मिली है कि ईरान में हत्याओं की संख्या में कमी आ रही है। इस बयान के बाद यह संकेत मिला कि वाशिंगटन फिलहाल हालात पर नजर बनाए रखना चाहता है, न कि तुरंत सैन्य कदम उठाना। व्हाइट हाउस ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने तेहरान को साफ चेतावनी दी है कि अगर और खून-खराबा हुआ तो इसके “गंभीर परिणाम” होंगे। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति को यह भी जानकारी दी गई है कि ईरान में 800 निर्धारित फांसी की सजाएं फिलहाल रोक दी गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप प्रशासन सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है।

महंगाई से भड़का आंदोलन

ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को हुई थी। देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रतिबंधों से जूझती अर्थव्यवस्था ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के चलते ईरानी अर्थव्यवस्था लगभग पंगु हो चुकी है। खाने-पीने की जरूरी चीजों से लेकर ईंधन तक की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने जनता के गुस्से को सड़कों पर ला दिया। इन प्रदर्शनों ने न केवल आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए, बल्कि धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक व्यवस्था को लेकर भी असंतोष को उजागर किया। यही वजह है कि सरकार ने इन्हें महज आर्थिक प्रदर्शन मानने के बजाय सत्ता के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा और कठोर कदम उठाए।

क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज

तनाव के बीच क्षेत्र में सैन्य हलचल भी तेज हो गई है। अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के निदेशक डेविड बार्निया ईरान की स्थिति पर चर्चा के लिए शुक्रवार को अमेरिका पहुंचे। माना जा रहा है कि यह दौरा अमेरिका और इजरायल के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और संभावित रणनीति पर विचार के लिए अहम है।
इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी सेना पश्चिम एशिया में अतिरिक्त रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताएं भेज रही है, ताकि अगर राष्ट्रपति ट्रंप किसी सैन्य कार्रवाई का आदेश देते हैं तो सेना पूरी तरह तैयार रहे। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

रूस ने संभाला कूटनीतिक मोर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच रूस ने खुद को संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से अलग-अलग फोन पर बातचीत की। क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन ने नेतन्याहू के साथ चर्चा में पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि रूस सभी इच्छुक देशों की भागीदारी के साथ मध्यस्थता के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। क्रेमलिन ने यह भी बताया कि पुतिन ने रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता देने की बात कही। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन के साथ हुई बातचीत का विस्तृत ब्योरा बाद में जारी किया जाएगा, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें भी क्षेत्रीय स्थिरता और संकट को टालने पर चर्चा हुई होगी।

अनिश्चितता बरकरार

ईरान में सख्त दमन के चलते विरोध प्रदर्शनों की तीव्रता कम जरूर हुई है, लेकिन असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका की चेतावनियां, इजरायल की सक्रियता और रूस की मध्यस्थता की पेशकश ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरानी नेतृत्व सख्ती के साथ-साथ कोई राजनीतिक या आर्थिक राहत देने का कदम उठाता है या फिर हालात और अधिक टकराव की ओर बढ़ते हैं।


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