Top
Begin typing your search above and press return to search.

वेटिकन और इस्लाम का महागठबंधन…अल्जीयर्स की ग्रैंड मस्जिद में पोप, कहा- शांति दोनों धर्मों की जिम्मेदारी

पोप का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया के कई हिस्सों में धार्मिक तनाव और संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में उनका यह कदम अंतरधार्मिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

वेटिकन और इस्लाम का महागठबंधन…अल्जीयर्स की ग्रैंड मस्जिद में पोप, कहा- शांति दोनों धर्मों की जिम्मेदारी
X
अल्जीयर्स। अफ्रीका के दौरे पर निकले पोप लियो XIV ने अपनी आधिकारिक धर्म-यात्रा की शुरुआत अल्जीरिया की राजधानी अल्जीयर्स स्थित ग्रैंड मस्जिद के दौरे से की। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान उन्होंने आपसी सम्मान, सह-अस्तित्व और शांति के संदेश पर जोर देते हुए इस्लाम और ईसाई समुदायों के बीच संवाद को मजबूत करने की अपील की। पोप का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया के कई हिस्सों में धार्मिक तनाव और संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में उनका यह कदम अंतरधार्मिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

मस्जिद में किया ध्यान, गोल्डन बुक पर हस्ताक्षर

ग्रैंड मस्जिद पहुंचने पर पोप लियो XIV का स्वागत मस्जिद के रेक्टर मोहम्मद मामून अल कासिम ने किया। इस दौरान पोप ने मस्जिद परिसर का दौरा किया, कुछ समय मौन रहकर ध्यान लगाया और वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस किया। उन्होंने मस्जिद की ‘गोल्डन बुक’ पर हस्ताक्षर भी किए, जो इस ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीकात्मक हिस्सा रहा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह स्थान केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव कराने वाला पवित्र केंद्र है, जहां लोग प्रार्थना और आत्मिक शांति की तलाश में आते हैं।

“हर इंसान की गरिमा को पहचानना जरूरी”

अपने संबोधन में पोप लियो XIV ने मानवता के साझा मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सत्य की खोज, हर व्यक्ति की गरिमा को पहचानना और शांति स्थापित करना सभी धर्मों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “ईश्वर की खोज का अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि हम हर पुरुष और महिला में ईश्वर का स्वरूप देखें।” उनके अनुसार, यह दृष्टिकोण तभी संभव है जब समाज में आपसी सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना मजबूत हो।

अल्जीरिया से जुड़ाव का किया जिक्र

पोप ने अपने भाषण में हिप्पो के संत ऑगस्टीन का उल्लेख करते हुए अल्जीरिया से अपने आध्यात्मिक संबंध को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि उनके “आध्यात्मिक पिता” से जुड़ी है, इसलिए इस देश का उनके लिए विशेष महत्व है। उन्होंने अल्जीरिया को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध बताते हुए यहां के लोगों की सराहना की।

धार्मिक और बौद्धिक विकास पर जोर

पोप लियो XIV ने मस्जिद के दोहरे महत्व धार्मिक और बौद्धिक की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थल केवल पूजा के लिए ही नहीं, बल्कि ज्ञान और समझ के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानवता को बेहतर ढंग से समझने और सृष्टि के रहस्यों को जानने के लिए ज्ञान का विस्तार आवश्यक है। उनके अनुसार, धर्म और शिक्षा मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

शांति, न्याय और मेल-मिलाप की अपील

अपने संबोधन के अंत में पोप ने अल्जीरिया और दुनिया के सभी देशों के लिए शांति और सद्भाव की कामना की। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा कि आने वाले समय में दुनिया में शांति, न्याय, मेल-मिलाप और क्षमा की भावना मजबूत हो। उनका मानना है कि यही रास्ता वैश्विक स्थिरता और मानव कल्याण की ओर ले जाता है।

अंतरधार्मिक संवाद को नई दिशा

पोप लियो XIV का यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अंतरधार्मिक संवाद को नई दिशा देने का प्रयास भी माना जा रहा है। ग्रैंड मस्जिद में उनकी उपस्थिति और वहां दिया गया संदेश यह दर्शाता है कि विभिन्न धर्मों के बीच सहयोग और समझ संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

वैश्विक संदेश

इस यात्रा के जरिए पोप ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक विविधता किसी टकराव का कारण नहीं, बल्कि एक अवसर है, जहां अलग-अलग समुदाय मिलकर बेहतर और शांतिपूर्ण दुनिया का निर्माण कर सकते हैं। अल्जीयर्स की ग्रैंड मस्जिद से दिया गया यह संदेश आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक सौहार्द और सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it