इजरायल की जासूसी गतिविधियों को लेकर पेंटागन चिंतित, ट्रंप एवं नेतन्याहू में बढ़ी तल्खी
पूर्व राजनयिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी एजेंसियों ने कई स्तरों पर अपने प्रोटोकॉल को मजबूत किया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कुछ अधिकारी संवेदनशील चर्चाओं के लिए अधिक सुरक्षित स्थानों और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वॉशिंगटन : अमेरिका और इजरायल को लंबे समय से एक-दूसरे का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार माना जाता रहा है। रक्षा, खुफिया सहयोग और पश्चिम एशिया की सुरक्षा नीति जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के संबंध दशकों से मजबूत रहे हैं। हालांकि हाल के घटनाक्रमों ने इन रिश्तों में बढ़ती असहजता और अविश्वास की चर्चा को तेज कर दिया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान के भीतर इजरायल की कथित खुफिया गतिविधियों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। बताया जा रहा है कि इन आशंकाओं के चलते पेंटागन ने आंतरिक स्तर पर इजरायल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस जोखिम का आकलन पहले की तुलना में अधिक गंभीर श्रेणी में रखा है। हालांकि इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत आधिकारिक दस्तावेज जारी नहीं किया गया है।
खुफिया गतिविधियों को लेकर सतर्क हुआ अमेरिकी तंत्र
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के एक आंतरिक मूल्यांकन में इजरायल की मानव और तकनीकी खुफिया क्षमताओं को अत्यंत प्रभावशाली और सक्रिय बताया गया है। इसी कारण अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। जानकारों के मुताबिक, कुछ अमेरिकी अधिकारी विदेश यात्राओं के दौरान अस्थायी डिजिटल उपकरणों, सीमित उपयोग वाले मोबाइल फोन और कड़े साइबर सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका उद्देश्य संवेदनशील सूचनाओं के संभावित जोखिम को कम करना बताया जा रहा है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव की चर्चा
पूर्व राजनयिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी एजेंसियों ने कई स्तरों पर अपने प्रोटोकॉल को मजबूत किया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कुछ अधिकारी संवेदनशील चर्चाओं के लिए अधिक सुरक्षित स्थानों और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये कदम किसी एक देश को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं या व्यापक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं। फिर भी इन खबरों ने अमेरिका और इजरायल के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ईरान और पश्चिम एशिया नीति पर उभरे मतभेद
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तनाव का एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया की बदलती राजनीतिक परिस्थितियां हैं। ईरान के साथ बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय संघर्षों और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर अमेरिका और इजरायल के दृष्टिकोण में कुछ मामलों में अंतर दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हाल के महीनों में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों का मतभेद सामने आया है। विशेष रूप से ईरान और लेबनान से जुड़े मामलों पर दोनों नेताओं की प्राथमिकताओं में अंतर देखा गया है।
ट्रंप-नेतन्याहू बातचीत बनी चर्चा का विषय
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हाल ही में दोनों नेताओं के बीच हुई एक फोन वार्ता काफी तनावपूर्ण रही। बताया जाता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति को लेकर बातचीत के दौरान तीखी बहस हुई। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि ट्रंप ने नेतन्याहू की कुछ नीतियों पर नाराजगी व्यक्त की और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर चिंता जताई।
इजरायल और व्हाइट हाउस ने आरोपों को नकारा
इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद इजरायल की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया दी गई है। वाशिंगटन स्थित इजरायली दूतावास ने कहा कि इजरायल अपने सहयोगी देशों के खिलाफ जासूसी गतिविधियों में शामिल नहीं है और वह अमेरिका के साथ अपने संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है।वहीं व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने भी इन खबरों को खारिज करते हुए उन्हें आधारहीन और तथ्यहीन बताया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले की तरह मजबूत बनी हुई है।


