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72 घंटे में 8 देशों के संघर्ष पर विराम: दुनिया को मिली अस्थायी राहत, शांति की कोशिशें तेज
पिछले 72 घंटे में दुनिया के 8 देशों के युद्ध पर ब्रेक लग गया है। इनमें ईरान, अमेरिका, इजराइल, रूस, यूक्रेन, लेबनान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान का जंग शामिल है, जिसके कारण पूरी दुनिया परेशान थी. खासकर एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट। ये सभी युद्ध फिलहाल अस्थाई रूप से रुके हैं, लेकिन इनमें से कुछ युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने की कवायद शुरू हो गई है।

वॉशिंगटन/ तेहरान/ मास्को। पिछले 72 घंटों में वैश्विक स्तर पर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां दुनिया के आठ देशों से जुड़े कई अहम संघर्षों पर अस्थायी ब्रेक लग गया है। इनमें ईरान, अमेरिका, इजराइल, रूस, यूक्रेन, लेबनान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान शामिल हैं। इन संघर्षों ने एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट में लंबे समय से अस्थिरता पैदा कर रखी थी। हालांकि ये सभी युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन फिलहाल इनके रुकने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत की भावना देखी जा रही है। कुछ मामलों में स्थायी शांति की दिशा में बातचीत भी शुरू हो चुकी है।
ईरान-अमेरिका: दो हफ्ते का युद्धविरामसबसे अहम समझौता ईरान और अमेरिका के बीच हुआ है। 8 अप्रैल को दोनों देशों ने दो हफ्तों के अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की। करीब 38 दिनों तक चले तनाव के बाद यह फैसला लिया गया। दोनों पक्ष अब बातचीत के जरिए स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश करेंगे। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता प्रस्तावित है। हालांकि बयानबाजी अभी भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर बातचीत विफल होती है, तो ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। वहीं ईरान ने भी अपने रुख में नरमी के संकेत नहीं दिए हैं।रूस-यूक्रेन: ईस्टर के चलते अस्थायी शांतिरूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में भी फिलहाल विराम देखने को मिला है। दोनों देशों ने ईस्टर के अवसर पर 32 घंटे के सीजफायर पर सहमति जताई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि ईस्टर दोनों देशों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। इस दौरान किसी भी तरह का हमला नहीं किया जाएगा। यूक्रेन ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। गौरतलब है कि 2022 से जारी इस युद्ध में पहले भी धार्मिक अवसरों पर सीमित समय के लिए युद्धविराम लागू किया जाता रहा है।पाकिस्तान-अफगानिस्तान: चीन की मध्यस्थता से ठहरावपाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से सीमा विवाद और आतंकी गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है। हाल ही में चीन में हुई 7 दिनों की वार्ता के बाद दोनों देशों ने फिलहाल एक-दूसरे पर हमला न करने पर सहमति जताई है। यह स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डूरंड लाइन और तहरीक-ए-तालिबान जैसे मुद्दे अब भी विवाद की जड़ बने हुए हैं। इससे पहले ईद के दौरान हुआ सीजफायर टूट चुका था, इसलिए इस बार समझौते की स्थिरता पर नजर रहेगी।इजराइल-लेबनान: हमलों पर अस्थायी रोकलेबनान और इजराइल के बीच भी तनाव लंबे समय से जारी है। 2024 से ही इजराइल लेबनान में हमले कर रहा था, जो हालिया ईरान संघर्ष के दौरान और तेज हो गए थे। अब एक समझौते के तहत इजराइल ने लेबनान पर हमले रोकने की घोषणा की है। वाशिंगटन में संभावित शांति वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक तक सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह विराम कितने समय तक टिकेगा।अनिश्चितता बरकरारइन सभी घटनाक्रमों के बाद दुनिया भर में अस्थायी राहत का माहौल जरूर बना है। ऊर्जा बाजारों में स्थिरता के संकेत मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। कूटनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि ये सभी युद्धविराम बेहद नाजुक हैं और किसी भी समय टूट सकते हैं।क्या स्थायी शांति संभव है?हालांकि कई मोर्चों पर बातचीत शुरू हो चुकी है, लेकिन स्थायी शांति अभी भी दूर की बात लगती है। कई संघर्ष गहरे राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों से जुड़े हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के हित टकरा रहे हैं। पुराने विवाद अब भी अनसुलझे हैं। फिर भी, यह पहली बार है जब इतने कम समय में इतने बड़े संघर्षों पर एक साथ ब्रेक लगा है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में भी फिलहाल विराम देखने को मिला है। दोनों देशों ने ईस्टर के अवसर पर 32 घंटे के सीजफायर पर सहमति जताई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि ईस्टर दोनों देशों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। इस दौरान किसी भी तरह का हमला नहीं किया जाएगा। यूक्रेन ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। गौरतलब है कि 2022 से जारी इस युद्ध में पहले भी धार्मिक अवसरों पर सीमित समय के लिए युद्धविराम लागू किया जाता रहा है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान: चीन की मध्यस्थता से ठहरावपाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से सीमा विवाद और आतंकी गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है। हाल ही में चीन में हुई 7 दिनों की वार्ता के बाद दोनों देशों ने फिलहाल एक-दूसरे पर हमला न करने पर सहमति जताई है। यह स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डूरंड लाइन और तहरीक-ए-तालिबान जैसे मुद्दे अब भी विवाद की जड़ बने हुए हैं। इससे पहले ईद के दौरान हुआ सीजफायर टूट चुका था, इसलिए इस बार समझौते की स्थिरता पर नजर रहेगी।इजराइल-लेबनान: हमलों पर अस्थायी रोकलेबनान और इजराइल के बीच भी तनाव लंबे समय से जारी है। 2024 से ही इजराइल लेबनान में हमले कर रहा था, जो हालिया ईरान संघर्ष के दौरान और तेज हो गए थे। अब एक समझौते के तहत इजराइल ने लेबनान पर हमले रोकने की घोषणा की है। वाशिंगटन में संभावित शांति वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक तक सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह विराम कितने समय तक टिकेगा।अनिश्चितता बरकरारइन सभी घटनाक्रमों के बाद दुनिया भर में अस्थायी राहत का माहौल जरूर बना है। ऊर्जा बाजारों में स्थिरता के संकेत मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। कूटनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि ये सभी युद्धविराम बेहद नाजुक हैं और किसी भी समय टूट सकते हैं।क्या स्थायी शांति संभव है?हालांकि कई मोर्चों पर बातचीत शुरू हो चुकी है, लेकिन स्थायी शांति अभी भी दूर की बात लगती है। कई संघर्ष गहरे राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों से जुड़े हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के हित टकरा रहे हैं। पुराने विवाद अब भी अनसुलझे हैं। फिर भी, यह पहली बार है जब इतने कम समय में इतने बड़े संघर्षों पर एक साथ ब्रेक लगा है।
लेबनान और इजराइल के बीच भी तनाव लंबे समय से जारी है। 2024 से ही इजराइल लेबनान में हमले कर रहा था, जो हालिया ईरान संघर्ष के दौरान और तेज हो गए थे। अब एक समझौते के तहत इजराइल ने लेबनान पर हमले रोकने की घोषणा की है। वाशिंगटन में संभावित शांति वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक तक सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह विराम कितने समय तक टिकेगा।
अनिश्चितता बरकरारइन सभी घटनाक्रमों के बाद दुनिया भर में अस्थायी राहत का माहौल जरूर बना है। ऊर्जा बाजारों में स्थिरता के संकेत मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। कूटनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि ये सभी युद्धविराम बेहद नाजुक हैं और किसी भी समय टूट सकते हैं।क्या स्थायी शांति संभव है?हालांकि कई मोर्चों पर बातचीत शुरू हो चुकी है, लेकिन स्थायी शांति अभी भी दूर की बात लगती है। कई संघर्ष गहरे राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों से जुड़े हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के हित टकरा रहे हैं। पुराने विवाद अब भी अनसुलझे हैं। फिर भी, यह पहली बार है जब इतने कम समय में इतने बड़े संघर्षों पर एक साथ ब्रेक लगा है।
हालांकि कई मोर्चों पर बातचीत शुरू हो चुकी है, लेकिन स्थायी शांति अभी भी दूर की बात लगती है। कई संघर्ष गहरे राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों से जुड़े हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के हित टकरा रहे हैं। पुराने विवाद अब भी अनसुलझे हैं। फिर भी, यह पहली बार है जब इतने कम समय में इतने बड़े संघर्षों पर एक साथ ब्रेक लगा है।
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