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पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव फिर भड़का: युद्धविराम खत्म, सीमा पर बढ़ी हिंसा और मानवीय संकट गहराया
इस्लामाबाद लगातार अफगान तालिबान पर आरोप लगाता रहा है कि वह पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी संगठनों को अपने यहां पनाह देता है। पाकिस्तान का कहना है कि सीमा पार से हो रहे हमलों के पीछे यही समूह जिम्मेदार हैं।

इस्लामाबाद/काबुल: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर संघर्ष तेज हो गया है, जिससे हाल ही में घोषित अस्थायी युद्धविराम की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्र में सुरक्षा और मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि 23 और 24 मार्च की मध्यरात्रि के बीच युद्धविराम समाप्त हो गया। इसके साथ ही पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि अफगान तालिबान के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक आतंकवाद के खतरे को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाता।
आतंकवाद के आरोपों पर आमने-सामने
इस्लामाबाद लगातार अफगान तालिबान पर आरोप लगाता रहा है कि वह पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी संगठनों को अपने यहां पनाह देता है। पाकिस्तान का कहना है कि सीमा पार से हो रहे हमलों के पीछे यही समूह जिम्मेदार हैं। वहीं, काबुल इन आरोपों को खारिज करता है और इसे पाकिस्तान की आंतरिक समस्या बताता है। अफगान अधिकारियों का कहना है कि उनकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच दोनों देशों के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
सीमा पर झड़पें, नागरिक हताहत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्वी अफगानिस्तान में हालिया झड़पों में कम से कम दो नागरिकों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। सीमा के पास रहने वाले लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल है। लगातार गोलीबारी और सैन्य गतिविधियों के कारण आम जीवन प्रभावित हो रहा है।
मध्यस्थता के बावजूद नहीं टिक पाया युद्धविराम
सऊदी अरब, तुर्किये और कतर जैसे देशों की मध्यस्थता से दोनों पक्षों ने ईद-उल-फितर से पहले अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई थी। इस समझौते से उम्मीद थी कि दोनों देश बातचीत के जरिए स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे। लेकिन युद्धविराम के जल्द खत्म हो जाने से यह साफ हो गया है कि तनाव अभी कम होने वाला नहीं है।
तोरखम बॉर्डर पर शरणार्थियों की आवाजाही
तनाव के बीच गुरुवार को उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में स्थित तोरखम सीमा चौकी को अस्थायी रूप से खोला गया। इसका उद्देश्य सैकड़ों अफगान शरणार्थियों को अपने देश लौटने की अनुमति देना था। पाकिस्तान में वर्तमान में 20 लाख से अधिक अफगान शरणार्थी रह रहे हैं। इस्लामाबाद सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैध वीजा रखने वालों को छोड़कर बाकी सभी अफगान नागरिकों को देश छोड़ना होगा। इस फैसले से बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन की आशंका है।
नशा मुक्ति अस्पताल पर हमले से बढ़ा आक्रोश
इस बीच, अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़े हमले में मृतकों की संख्या को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान के अनुसार, नशा मुक्ति अस्पताल पर हुए हमले में अब तक 411 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 263 लोग घायल हैं और कई अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। यह हमला 16 मार्च को हुआ था, जिसे लेकर अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर आरोप लगाए हैं।
सामूहिक अंतिम संस्कार, दर्दनाक मंजर
हमले में मारे गए लोगों के शवों को बड़े पैमाने पर दफनाया जा रहा है। गुरुवार को काबुल में 60 शवों को सामूहिक रूप से दफनाया गया। इसके लिए बुलडोजर से बड़ा गड्ढा खोदकर अलग-अलग कब्रें बनाई गईं। इससे पहले 18 मार्च को भी 50 से अधिक शवों को दफनाया गया था। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में गहरा आक्रोश और शोक का माहौल पैदा कर दिया है।
बढ़ता संकट और अनिश्चित भविष्य
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता यह संघर्ष न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है। सीमा पर तनाव, शरणार्थी संकट और लगातार हो रही हिंसा ने हालात को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक स्तर पर ठोस पहल नहीं की गई, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
शांति की राह कठिन हालिया घटनाक्रम से साफ है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भरोसे की कमी और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शांति की राह में बड़ी बाधा बनी हुई है। जब तक दोनों देश आपसी संवाद और सहयोग को प्राथमिकता नहीं देते, तब तक स्थायी समाधान की उम्मीद करना मुश्किल होगा। फिलहाल, सीमा पर हालात तनावपूर्ण हैं और आम नागरिक इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।
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