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ईरान की आग लगाने की धमकी से दहला तेल बाजार, अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर दी अस्थायी राहत
ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों या बंदरगाहों पर हमला किया गया, तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को निशाना बना सकता है। ईरानी सेना के केंद्रीय ऑपरेशन कमांड खातम अल-अंबिया के प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरान क्षेत्रीय ऊर्जा संरचना को जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य बना सकता है।

तेहरान/वॉशिंगटन। West Asia Crisis: पश्चिम एशिया इन दिनों गंभीर सैन्य तनाव के दौर से गुजर रहा है। पिछले दो हफ्तों से जारी संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को भी संकट में डाल दिया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच तेल और गैस आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। इसी बीच ईरान की ओर से दी गई एक कड़ी चेतावनी ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है, जिसके बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है।
ईरान की चेतावनी से बढ़ी वैश्विक चिंता
संघर्ष के बीच ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों या बंदरगाहों पर हमला किया गया, तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को निशाना बना सकता है। ईरानी सेना के केंद्रीय ऑपरेशन कमांड खातम अल-अंबिया के प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरान क्षेत्रीय ऊर्जा संरचना को जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य बना सकता है। इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों में यह आशंका बढ़ गई कि अगर संघर्ष और बढ़ा, तो मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
तनाव के असर से वैश्विक तेल बाजार में कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड लगभग 9.2 प्रतिशत बढ़कर 100.46 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह अगस्त 2022 के बाद पहली बार है जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर के स्तर को पार कर गई है। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी करीब 9.7 प्रतिशत बढ़कर 95.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष और लंबा चलता है, तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर दी अस्थायी अनुमति
ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच अमेरिका ने एक अहम फैसला लिया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने घोषणा की है कि कुछ शर्तों के तहत देशों को रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े लेनदेन की अस्थायी अनुमति दी जाएगी। मंत्रालय के नोटिस के अनुसार, 12 मार्च को सुबह 12:01 बजे या उससे पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े लेनदेन की अनुमति दी गई है। यह छूट 11 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी। अमेरिका का कहना है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
भारत को पहले ही मिल चुकी है छूट
इससे पहले अमेरिका भारत को भी इसी तरह की विशेष अनुमति दे चुका है। 5 मार्च को अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की विशेष छूट दी थी, जिसके तहत भारत रूस से तेल खरीद सकता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना था कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बनाए रखने और कीमतों को संतुलित रखने के लिए उठाया गया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है।
अमेरिका की रणनीति क्या है?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए तेजी से फैसले ले रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक तरफ ईरान से उत्पन्न हो रहे खतरे और क्षेत्रीय अस्थिरता से निपटने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह अनुमति केवल उस रूसी तेल पर लागू होगी जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में जा रहा है।
रूस को बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा
स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, इस अस्थायी छूट से रूस को बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना नहीं है। उनका कहना है कि रूस की ऊर्जा आय का बड़ा हिस्सा तेल उत्पादन के दौरान लगाए जाने वाले करों से आता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की ऊर्जा नीतियों के चलते देश में तेल और गैस का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। इससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली है।
आगे क्या हो सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अगर और गहराता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ सकती है। खासकर अगर ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच सीधे ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जाता है, तो तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिका समेत कई देश ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठा रहे हैं। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते वैश्विक बाजार की नजर आने वाले दिनों में तेल की कीमतों और क्षेत्रीय हालात पर टिकी रहेगी।
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