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अमेरिका में पहली बार सजा-ए-मौत टीवी पर लाइव होगी, 3 दिसंबर की तारीख तय

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने और इसका सार्वजनिक प्रसारण करने की बात कही है। उनके हवाले से कहा गया है कि लोगों को यह समझना चाहिए कि इस तरह के अपराधों के गंभीर परिणाम होते हैं।

अमेरिका में पहली बार सजा-ए-मौत टीवी पर लाइव होगी, 3 दिसंबर की तारीख तय
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वॉशिंगटन: अमेरिका में पूर्व सैन्य अधिकारी निदाल मलिक हसन को मौत की सजा दिए जाने की प्रस्तावित तारीख को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर हसन को 3 दिसंबर 2026 को गोली मारकर मौत की सजा देने की तारीख तय की गई है। यह मामला 2009 में टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुई सामूहिक गोलीबारी से जुड़ा है, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि, हसन की सजा पर अंतिम अमल से पहले कानूनी प्रक्रिया और संभावित अपील महत्वपूर्ण होंगी। मौत की सजा के कथित लाइव टेलीकास्ट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

3 दिसंबर को सजा देने की तैयारी का दावा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने और इसका सार्वजनिक प्रसारण करने की बात कही है। उनके हवाले से कहा गया है कि लोगों को यह समझना चाहिए कि इस तरह के अपराधों के गंभीर परिणाम होते हैं। हालांकि, मौत की सजा के लाइव प्रसारण और इसे अमेरिका में एक सदी बाद पहली सार्वजनिक फांसी या सार्वजनिक मृत्युदंड बताए जाने के दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। किसी तय तारीख की घोषणा अपने आप यह सुनिश्चित नहीं करती कि उस दिन सजा पर अमल हो ही जाएगा। सैन्य न्याय व्यवस्था में आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होना भी जरूरी है।

1961 के बाद सैन्य व्यवस्था में पहला मामला

निदाल हसन का मामला अमेरिकी सैन्य न्याय प्रणाली के सबसे चर्चित मामलों में शामिल है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 1961 में अमेरिकी सेना के प्राइवेट जॉन ए. बेनेट को मौत की सजा दिए जाने के बाद हसन सैन्य अदालत से मृत्युदंड पाने वाले पहले व्यक्ति होंगे, जिन्हें इस तरह सजा देने की तैयारी की जा रही है। अमेरिका में सैन्य कर्मियों को मौत की सजा देने की प्रक्रिया सामान्य आपराधिक मामलों से अलग होती है। इसमें सैन्य अदालत के फैसले के साथ संबंधित कानूनी समीक्षा और राष्ट्रपति की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए निर्धारित तारीख के बावजूद सजा के अमल में देरी संभव है।

2009 में फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुई थी गोलीबारी

5 नवंबर 2009 को टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुई गोलीबारी में 13 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। उस समय अमेरिका अफगानिस्तान और इराक में सैन्य अभियानों में शामिल था। हसन अमेरिकी सेना में मनोचिकित्सक के रूप में कार्यरत था। उसने सैन्य अड्डे पर गोलीबारी की थी और इस घटना में खुद भी घायल हो गया था। बाद में वह कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हो गया। इस घटना को अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान में हुई सबसे घातक गोलीबारी की घटनाओं में गिना जाता है। इसने सैन्य कर्मियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और संभावित खतरे की पहचान को लेकर भी व्यापक बहस छेड़ी थी।

अदालत ने 2013 में दोषी ठहराया था

सैन्य अदालत में चले मुकदमे के दौरान हसन को हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 2013 में उसे 13 हत्याओं और 32 हत्या के प्रयासों समेत कुल 45 मामलों में दोषी पाया गया। उसे मौत की सजा सुनाई गई थी। मुकदमे के दौरान हसन ने हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की थी। उसने अपने कृत्य को धार्मिक विचारधारा और अमेरिकी सैन्य अभियानों के विरोध से जोड़कर पेश किया था। उसके बयान और मुकदमे की कार्यवाही ने मामले को अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य अनुशासन से जुड़ी बड़ी बहस का विषय बना दिया।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भी अपील का विकल्प

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने के आदेश को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था में राष्ट्रपति की स्वीकृति महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इससे सभी कानूनी विकल्प स्वतः समाप्त नहीं हो जाते। हसन के वकील जॉन मिल्स के मुताबिक, दोषसिद्धि और मृत्युदंड के फैसले को अदालत में चुनौती देने की प्रक्रिया अभी बाकी हो सकती है। यदि अपील स्वीकार होती है या अदालत सजा पर रोक लगाती है, तो निर्धारित तारीख आगे बढ़ सकती है। इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या सभी कानूनी प्रक्रियाएं 3 दिसंबर से पहले पूरी हो पाएंगी। फिलहाल, सजा की प्रस्तावित तारीख, राष्ट्रपति की मंजूरी और लाइव प्रसारण से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे अंतिम निर्णय मानना उचित नहीं होगा।


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