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जेफ्री एपस्टीन की ‘विशेष मानव नस्ल’ योजना पर नए खुलासे, विवाद के बाद ब्रिटन के चीफ ऑफ स्टाफ का इस्तीफा

रिपोर्टों के मुताबिक, 33 हजार वर्ग फीट में फैले एपस्टीन के जोरो रैंच को वह एक ऐसे परिसर के रूप में विकसित करना चाहता था, जहां महिलाएं उसके बच्चों को जन्म दें। कुछ स्रोतों ने दावा किया कि वह इसे “बच्चों की फसल” उगाने वाले फार्म की तरह देखता था।

जेफ्री एपस्टीन की ‘विशेष मानव नस्ल’ योजना पर नए खुलासे, विवाद के बाद ब्रिटन के  चीफ ऑफ स्टाफ का इस्तीफा
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न्यूयॉर्क/सांता फे। नाबालिग लड़कियों की तस्करी और यौन अपराधों के आरोपों में घिरे रहे अमेरिकी वित्त कारोबारी जेफ्री एपस्टीन को लेकर एक बार फिर चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों और कुछ वैज्ञानिकों के बयानों के अनुसार, एपस्टीन अपने डीएनए से “विशेष मानव नस्ल” तैयार करने की योजना पर विचार कर रहा था। बताया जाता है कि वह न्यू मेक्सिको के सांता फे के पास स्थित अपने विशाल ‘जोरो रैंच’ को इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना चाहता था।

हालांकि अब तक इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं कि ऐसी किसी योजना पर अमल हुआ हो या एपस्टीन का कोई जैविक संतान हो। 2019 में यौन अपराधों के आरोप में जेल में बंद रहने के दौरान एपस्टीन की कथित आत्महत्या हो गई थी। उनकी मौत और कथित नेटवर्क को लेकर विवाद और साजिश सिद्धांत आज भी चर्चा में बने रहते हैं।

जोरो रैंच: कथित योजना का केंद्र

रिपोर्टों के मुताबिक, 33 हजार वर्ग फीट में फैले एपस्टीन के जोरो रैंच को वह एक ऐसे परिसर के रूप में विकसित करना चाहता था, जहां महिलाएं उसके बच्चों को जन्म दें। कुछ स्रोतों ने दावा किया कि वह इसे “बच्चों की फसल” उगाने वाले फार्म की तरह देखता था। दो वैज्ञानिकों और एक सलाहकार ने बताया कि उन्होंने 2001 से 2006 के बीच एपस्टीन को ऐसी योजना पर चर्चा करते सुना था। एक महिला, जिसने खुद को नासा की वैज्ञानिक बताया, ने मीडिया से कहा कि एपस्टीन चाहता था कि उसके फार्महाउस में एक समय में लगभग 20 महिलाएं गर्भवती हों। फिर भी, इन दावों के समर्थन में प्रत्यक्ष दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच में भी इस तरह की किसी सक्रिय योजना के स्पष्ट सबूत सामने नहीं आए।

ट्रांसह्यूमनिज्म और यूजेनिक्स से तुलना

विश्लेषकों का कहना है कि एपस्टीन की कथित सोच तथाकथित “ट्रांसह्यूमनिज्म” विचारधारा से प्रेरित हो सकती है। ट्रांसह्यूमनिज्म तकनीक और जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से मानव क्षमताओं को बढ़ाने की अवधारणा का समर्थन करता है। हालांकि आलोचकों ने एपस्टीन के कथित विचारों की तुलना 20वीं सदी की “यूजेनिक्स” विचारधारा से की है, जिसमें चयनात्मक प्रजनन के जरिए कथित रूप से बेहतर मानव नस्ल बनाने का विचार शामिल था। यूजेनिक्स को बाद में नाजी जर्मनी ने नस्लीय शुद्धता के नाम पर खतरनाक और अमानवीय नीतियों के रूप में अपनाया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रांसह्यूमनिज्म और यूजेनिक्स के बीच स्पष्ट अंतर है- पहला जहां तकनीकी प्रगति और व्यक्तिगत विकल्पों पर आधारित बहस का विषय है, वहीं दूसरा ऐतिहासिक रूप से जबरन और भेदभावपूर्ण नीतियों से जुड़ा रहा है। फिर भी, एपस्टीन के कथित विचारों ने नैतिक और वैज्ञानिक समुदाय में गंभीर चिंताएं पैदा की हैं।




वैज्ञानिकों से संपर्क और दान

एपस्टीन का नाम कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के साथ जुड़ता रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी मरे गेल-मैन, स्टीफन हॉकिंग, स्टीफन जे गोल्ड, जेनेटिक इंजीनियर जॉर्ज एम. चर्च, न्यूरोलॉजिस्ट ओलिवर सैक्स और भौतिक विज्ञानी फ्रैंक विल्जेक जैसे नामों से संपर्क में रहा था। एपस्टीन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के ‘इवोल्यूशनरी डायनामिक्स’ कार्यक्रम के लिए 65 लाख डॉलर का दान दिया था। इसके अलावा, वर्ल्डवाइड ट्रांसह्यूमनिस्ट एसोसिएशन को भी उसने 20,000 डॉलर की सहायता दी थी।

हालांकि इनमें से कई वैज्ञानिकों ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका एपस्टीन के साथ संबंध पेशेवर या औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित था। एपस्टीन के आपराधिक मामलों के उजागर होने के बाद कई संस्थानों ने उससे जुड़े दान और संबंधों की समीक्षा की।

ब्रिटेन में सियासी भूचाल: मैंडेलसन विवाद

एपस्टीन प्रकरण की गूंज ब्रिटेन की राजनीति तक पहुंच गई है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर इस समय अपने कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं। विवाद की जड़ पूर्व राजनयिक पीटर मैंडेलसन की अमेरिका में राजदूत के रूप में नियुक्ति है, जिनके एपस्टीन से कथित संबंधों को लेकर सवाल उठे हैं। रायटर की रिपोर्ट के अनुसार, लेबर पार्टी के भीतर ही इस नियुक्ति को लेकर असहजता बढ़ी है। हाल में सामने आई जानकारियों ने स्टारमर के निर्णय पर सवाल खड़े कर दिए हैं और पार्टी सांसदों के बीच नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

चीफ ऑफ स्टाफ का इस्तीफा

इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ मार्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि मैंडेलसन की नियुक्ति की सलाह उन्होंने ही दी थी और इसकी पूरी जिम्मेदारी ली। मैकस्वीनी ने बयान जारी कर कहा कि मैंडेलसन ने “हमारी पार्टी, हमारे देश और भरोसे को नुकसान पहुंचाया है।” वह स्टारमर के करीबी सलाहकार माने जाते रहे हैं, इसलिए उनका इस्तीफा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मैंडेलसन की नियुक्ति 2024 में हुई थी। एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में नाम आने के बाद स्टारमर ने पिछले साल सितंबर में उन्हें पद से हटा दिया था। अब उनके खिलाफ पुलिस जांच चल रही है। आरोप है कि 2009-10 के दौरान उन्होंने कथित रूप से एपस्टीन को कुछ सरकारी दस्तावेज गुप्त रूप से उपलब्ध कराए थे। मैंडेलसन ने इन आरोपों से इनकार किया है।

राजनीतिक और नैतिक असर

विश्लेषकों का कहना है कि एपस्टीन प्रकरण केवल आपराधिक जांच का विषय नहीं रहा, बल्कि यह राजनीति, विज्ञान और वैश्विक नेटवर्किंग की जटिलता को भी उजागर करता है। अमेरिका में एपस्टीन की कथित आत्महत्या के बाद से ही उनके संपर्कों और प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं।ब्रिटेन में यह मुद्दा सरकार की पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष और लेबर पार्टी के कुछ सांसद इस मामले में स्पष्ट जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, वैज्ञानिक समुदाय में भी इस बात पर चर्चा है कि वित्तीय सहायता और शोध सहयोग के नैतिक मानदंडों को कैसे मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर

जेफ्री एपस्टीन से जुड़े नए दावे—चाहे वे उसकी कथित “विशेष मानव नस्ल” योजना से संबंधित हों या वैश्विक हस्तियों से संपर्क के एक बार फिर यह दिखाते हैं कि उसका प्रभाव कितनी दूर तक फैला हुआ था। हालांकि कई दावों के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हैं, लेकिन इनसे जुड़ी नैतिक, राजनीतिक और कानूनी बहसें अभी थमी नहीं हैं। ब्रिटेन में मैंडेलसन विवाद और प्रधानमंत्री स्टारमर पर बढ़ता दबाव इस बात का संकेत है कि एपस्टीन की छाया अभी भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ रही है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और राजनीतिक नेतृत्व की कार्रवाइयां तय करेंगी कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।


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