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24 साल पुराने नेपाल के शाही परिवार हत्याकांड की फिर होगी जांच, मामले की फाइलें दोबारा खुलेंगी

नेपाल के गृह मंत्री सूदन गुरुंग ने पदभार संभालने के बाद इस मामले को फिर से खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पहले की गई जांच से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिपोर्टों का पुनः अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर यह देखा जाएगा कि क्या मामले की गहराई से दोबारा जांच की आवश्यकता है।

24 साल पुराने नेपाल के शाही परिवार हत्याकांड की फिर होगी जांच, मामले की फाइलें दोबारा खुलेंगी
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काठमांडू : नेपाल के इतिहास के सबसे चर्चित और रहस्यमयी मामलों में शामिल शाही परिवार हत्याकांड की एक बार फिर जांच कराई जाएगी। काठमांडू स्थित नारायणहिति राजमहल में जून 2001 में हुए इस सामूहिक हत्याकांड में तत्कालीन राजा बीरेंद्र शाह, महारानी ऐश्वर्या समेत शाही परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। अब नेपाल सरकार ने इस मामले की दोबारा समीक्षा और नए सिरे से जांच कराने का फैसला किया है।

गृह मंत्री सूदन गुरुंग ने किया ऐलान

नेपाल के गृह मंत्री सूदन गुरुंग ने पदभार संभालने के बाद इस मामले को फिर से खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पहले की गई जांच से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिपोर्टों का पुनः अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर यह देखा जाएगा कि क्या मामले की गहराई से दोबारा जांच की आवश्यकता है। गुरुंग के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य इस ऐतिहासिक घटना से जुड़े सभी सवालों के जवाब तलाशना और तथ्यों को स्पष्ट करना है।

युवराज दीपेंद्र को ठहराया था जिम्मेदार

हत्याकांड के बाद तत्कालीन सरकार द्वारा गठित जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में युवराज दीपेंद्र शाह को इस घटना का जिम्मेदार बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, शराब के नशे में दीपेंद्र ने अपने पिता राजा बीरेंद्र, माता महारानी ऐश्वर्या, भाई-बहनों और अन्य परिजनों पर ऑटोमैटिक राइफल से गोलीबारी की थी। इसके बाद उन्होंने खुद को भी गोली मार ली थी। गोली लगने के बाद दीपेंद्र को अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी भी मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे नेपाल को झकझोर दिया था और देश में राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ा था।

शुरू से उठते रहे हैं जांच पर सवाल

हालांकि, उस समय पेश की गई जांच रिपोर्ट को लेकर कई लोगों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे। आलोचकों का कहना था कि मामले की जांच पर्याप्त नहीं थी और कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया था। यही कारण है कि दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस हत्याकांड को लेकर रहस्य और संदेह बने हुए हैं। विशेषज्ञों और कुछ राजनीतिक समूहों की ओर से समय-समय पर स्वतंत्र जांच की मांग भी उठती रही है।

विवादों के बाद दोबारा मंत्री बने सूदन गुरुंग

सूदन गुरुंग इससे पहले आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे चुके थे। हालांकि बाद में हुई जांच में उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया। इसके बाद उन्हें फिर से नेपाल सरकार में शामिल किया गया और गृह मंत्री का दायित्व सौंपा गया। पद संभालते ही उन्होंने शाही परिवार हत्याकांड की फाइलों की समीक्षा और नए सिरे से जांच कराने का फैसला लिया है।

24 साल बाद फिर चर्चा में आया रहस्यमयी मामला

करीब 24 वर्ष पहले हुए इस हत्याकांड को नेपाल के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जाता है। नए सिरे से जांच की घोषणा के बाद एक बार फिर इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यदि जांच आगे बढ़ती है तो उस समय की परिस्थितियों और घटनाक्रम से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।


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