नेपाल चुनाव 2026 : मेयर से प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे रैपर बालेन शाह
नेपाल में आधिकारिक ओपिनियन पोल की परंपरा नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक और स्थानीय मीडिया बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे मान रहे हैं। उन्होंने देश की दो प्रमुख राजनीतिक शक्तियों केपी शर्मा ओली की चीन समर्थक मानी जाने वाली कम्युनिस्ट पार्टी और भारत के निकट मानी जाने वाली नेपाली कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी है।

काठमांडू : Nepal elections 2026: नेपाल की राजनीति में इस समय एक नई करवट दिखाई दे रही है। काठमांडू के पूर्व मेयर और मशहूर रैपर बालेन शाह (Balen Shah) आगामी पांच मार्च को होने वाले आम चुनावों में प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे हैं। 35 वर्षीय बालेन का उभार न केवल पारंपरिक राजनीतिक दलों के लिए चुनौती है, बल्कि यह नेपाल में उभरती युवा राजनीति का भी संकेत माना जा रहा है।
पिछले साल सितंबर में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों के बाद, जिसमें 77 लोगों की जान गई थी, तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था। उसी समय बालेन शाह ने इंटरनेट मीडिया पर एक तीखा संदेश साझा किया था। उन्होंने लिखा था, “प्रिय जेन-जी, तुम्हारे हत्यारे का इस्तीफा आ गया है। अब तुम्हारी पीढ़ी को देश का नेतृत्व करना होगा। तैयार रहो।” इस संदेश ने युवा वर्ग के बीच उनकी छवि को और मजबूत किया।
पारंपरिक दिग्गजों को सीधी चुनौती
नेपाल में आधिकारिक ओपिनियन पोल की परंपरा नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक और स्थानीय मीडिया बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे मान रहे हैं। उन्होंने देश की दो प्रमुख राजनीतिक शक्तियों केपी शर्मा ओली की चीन समर्थक मानी जाने वाली कम्युनिस्ट पार्टी और भारत के निकट मानी जाने वाली नेपाली कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी है। काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बिपिन अधिकारी के मुताबिक, बालेन की लोकप्रियता राजधानी से बाहर भी फैल चुकी है। वे कहते हैं, “बालेन इतने लोकप्रिय हैं कि काठमांडू आने वाली बसों पर अब ‘बालेन के शहर की ओर’ जैसे स्टिकर देखे जा सकते हैं।” यह बयान बताता है कि बालेन अब केवल स्थानीय नेता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली चेहरा बन चुके हैं।
रैपर से मेयर और अब राष्ट्रीय नेता
बालेन शाह ने राजनीति में आने से पहले रैप संगीत के माध्यम से युवाओं के बीच पहचान बनाई। उनके गीतों में सामाजिक मुद्दों और व्यवस्था के खिलाफ स्वर प्रमुख रहे। यही विद्रोही और परिवर्तनकारी छवि उन्हें राजनीति में भी अलग पहचान देती है। काठमांडू के मेयर के रूप में उनके कार्यकाल को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली। एक ओर उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास, सड़क सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की पहल की, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी। दूसरी ओर, रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ा। इसके बावजूद उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने प्रशासनिक दृढ़ता और निर्णय क्षमता का परिचय दिया, जो राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व के लिए जरूरी गुण हैं।
इंटरनेट मीडिया की ताकत
बालेन शाह की सबसे बड़ी ताकत उनका डिजिटल जुड़ाव माना जा रहा है। 30.5 लाख से अधिक इंटरनेट मीडिया फॉलोअर्स के साथ वे मुख्यधारा की मीडिया पर निर्भर रहने के बजाय सीधे जनता, खासकर युवाओं, से संवाद करते हैं। उनकी पोस्ट और वीडियो संदेश तेजी से वायरल होते हैं और युवा वर्ग में चर्चा का विषय बनते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग ने उन्हें पारंपरिक राजनीतिक प्रचार से अलग पहचान दिलाई है। राजनीतिक विश्लेषक पुरंजन आचार्य के अनुसार, “बालेन की सबसे बड़ी खासियत युवाओं से उनका सीधा जुड़ाव है। वे नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को भाषा और शैली दोनों में समझते हैं।”
संतुलित विदेश नीति का वादा
बालेन की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने अपने घोषणापत्र में पड़ोसी देशों के साथ संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति का वादा किया है। नेपाल की राजनीति में चीन और भारत के प्रभाव को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन की पार्टी संतुलन की नीति अपनाकर राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की कोशिश कर रही है। हालांकि, सत्ता में आने के बाद इस संतुलन को बनाए रखना आसान नहीं होगा।
चुनौतियों से भरा रास्ता
हालांकि बालेन शाह की लोकप्रियता निर्विवाद है, लेकिन प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने और वहां टिके रहने की राह आसान नहीं मानी जा रही। नेपाल की राजनीति गठबंधन आधारित और जटिल समीकरणों से भरी है। पुरंजन आचार्य कहते हैं, “प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन को प्रशासनिक अनुभव, गठबंधन प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। युवा समर्थन महत्वपूर्ण है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए व्यापक राजनीतिक समझ भी जरूरी होगी।” इसके अलावा, पारंपरिक दलों का मजबूत संगठनात्मक ढांचा और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी पकड़ भी बालेन के लिए चुनौती बन सकती है।
युवा राजनीति का संकेत
बालेन शाह का उभार नेपाल में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है। सितंबर के विद्रोह के बाद युवाओं में राजनीतिक बदलाव की मांग तेज हुई थी। ऐसे माहौल में एक अपेक्षाकृत युवा और गैर-पारंपरिक पृष्ठभूमि से आने वाले नेता का आगे आना नई राजनीति की संभावनाओं को दर्शाता है। उनका अभियान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की भावना से जुड़ा दिखाई देता है। यही वजह है कि वे पारंपरिक दलों के खिलाफ असंतोष का प्रतीक बनकर उभरे हैं।
क्या बनेगा नया राजनीतिक अध्याय?
पांच मार्च को होने वाले आम चुनाव नेपाल की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि बालेन शाह अपेक्षित समर्थन हासिल करते हैं, तो यह देश के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। हालांकि अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में है, लेकिन इतना तय है कि बालेन शाह ने नेपाल की राजनीति में नई ऊर्जा और नई बहस को जन्म दिया है। रैपर से मेयर और अब प्रधानमंत्री पद के दावेदार तक का उनका सफर नेपाल में बदलते राजनीतिक परिदृश्य की कहानी कहता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह उभार केवल एक लहर है या स्थायी बदलाव की शुरुआत।


