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नेपाल चुनाव 2026: शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी सबसे आगे, बड़े नेताओं को कड़ी चुनौती

मतगणना के शुरुआती दौर में नेपाल की राजनीति के कई दिग्गज नेताओं को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रुझानों के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने निर्वाचन क्षेत्र में हजार से ज्यादा वोटों से पीछे चल रहे हैं।

नेपाल चुनाव 2026: शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी सबसे आगे, बड़े नेताओं को कड़ी चुनौती
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काठमांडू: Nepal Election 2026: नेपाल में हुए आम चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों ने देश की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने के संकेत दिए हैं। अब तक सामने आए रुझानों में काठमांडू के मेयर और लोकप्रिय रैपर बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) सबसे आगे दिखाई दे रही है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 50 सीटों पर मतगणना जारी है, जिनमें से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी बढ़त बनाए हुए है। अबतक की जानकारी के मुताबिक, 61 सीटों पर गिनती जारी है। इसमें से 52 सीटों पर बालेन की पार्टी को जबरदस्त बढ़त है। वहीं, नेपाली कांग्रेस 5 और यूएमएल 4 सीटों पर आगे चल रही है।


नेपाली कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी को शुरुआती रुझानों में अभी तक केवल एक-एक सीट पर बढ़त मिली है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि इस चुनाव में मतदाताओं ने पारंपरिक दलों से हटकर नए विकल्पों को प्राथमिकता दी है।

केपी ओली भी हजारों वोटों से पिछड़े

मतगणना के शुरुआती दौर में नेपाल की राजनीति के कई दिग्गज नेताओं को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रुझानों के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने निर्वाचन क्षेत्र में हजार से ज्यादा वोटों से पीछे चल रहे हैं। इसी तरह कई पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व उपप्रधानमंत्री और मौजूदा व पूर्व मंत्री भी मतगणना में काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि यही रुझान आगे भी कायम रहते हैं, तो नेपाल की संसद में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। इस बार के चुनाव को नेपाल की राजनीति में नई पीढ़ी बनाम पारंपरिक दलों की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है।

60 प्रतिशत से अधिक मतदान

नेपाल में यह आम चुनाव ऐसे समय में हुआ जब पिछले साल सितंबर में देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन और राजनीतिक तनाव देखने को मिला था। इसके बावजूद मतदान के दिन लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। चुनाव आयोग के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में मतदान इस बात का संकेत है कि जनता देश की राजनीति में बदलाव चाहती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहती है।

मतगणना में लग सकता है एक सप्ताह

नेपाल के चुनाव आयोग ने बताया है कि मतगणना की प्रक्रिया जारी है और पूरे नतीजे आने में लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है। आयोग का कहना है कि मतों की गिनती कई चरणों में हो रही है, इसलिए इसमें समय लगना स्वाभाविक है। चुनाव आयोग के अनुसार,165 प्रत्यक्ष चुनाव वाली सीटों के नतीजे मतगणना शुरू होने के लगभग 24 घंटे के भीतर जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद सभी 275 सीटों के परिणाम आने में तीन से चार दिन और लग सकते हैं। आयोग की कोशिश है कि 9 मार्च तक मतगणना पूरी कर ली जाए। मतगणना पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नई सरकार बनाने की स्थिति में कौन-सी पार्टी सबसे आगे रहती है।

प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार

इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए दो प्रमुख चेहरों को लेकर चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। पहला नाम बालेन शाह का है, जिनकी पार्टी शुरुआती रुझानों में बड़ी बढ़त बनाती नजर आ रही है। बालेन शाह काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी लोकप्रियता और प्रशासनिक फैसलों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। दूसरा प्रमुख नाम गगन थापा का माना जा रहा है, जो नेपाली कांग्रेस के एक युवा और प्रभावशाली नेता हैं। हालांकि अंतिम नतीजे आने के बाद ही यह तय होगा कि सरकार किस पार्टी या गठबंधन के नेतृत्व में बनेगी।

नेपाल की संसद और चुनाव प्रणाली

नेपाल की संसद में कुल 275 सदस्य होते हैं। इन सांसदों का चुनाव मिश्रित चुनाव प्रणाली (Mixed Electoral System) के आधार पर होता है। इस प्रणाली में सांसदों का चुनाव दो अलग-अलग तरीकों से किया जाता है—

प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली

नेपाल की संसद की 275 में से 165 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव होता है। इस प्रणाली में देश को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा जाता है। प्रत्येक क्षेत्र में मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं। जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वही उस सीट से सांसद चुना जाता है। इसे फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली कहा जाता है। यह प्रणाली भारत और ब्रिटेन जैसे कई लोकतांत्रिक देशों में भी लागू है।

आनुपातिक प्रतिनिधित्व

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़े दलों के साथ-साथ छोटे दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों को भी संसद में प्रतिनिधित्व मिल सके। प्रत्यक्ष चुनाव के अलावा बाकी 110 सीटों का आवंटन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में मतदाता किसी व्यक्ति के बजाय किसी राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। पूरे देश में किसी पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उसे संसद में सीटें मिलती हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि छोटे दलों को भी संसद में जगह मिले, विभिन्न जातीय और सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो, संसद में संतुलन बना रहे और नेपाल जैसे बहु-जातीय और बहु-सांस्कृतिक समाज के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।

नेपाल की राजनीति में बदलाव के संकेत

इस बार के चुनाव के शुरुआती रुझानों ने संकेत दिए हैं कि नेपाल की राजनीति में नए दलों और नए नेताओं का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। यदि अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में आते हैं, तो देश में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले पारंपरिक दलों के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक संदेश होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की युवा आबादी, शहरी मतदाता और बदलाव चाहने वाले वर्ग इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। अब सबकी नजरें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि आने वाले वर्षों में नेपाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।


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