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ईरान में आर्थिक संकट से भड़के देशव्यापी प्रदर्शन, अब तक 39 की मौत, सरकार और अमेरिका आमने-सामने
ईरान में आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं और वे देश की धर्मतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनते नजर आ रहे हैं।

तेहरान। ईरान में आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं और वे देश की धर्मतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। बुधवार को हालात सबसे ज्यादा तनावपूर्ण रहे, जब लगभग हर प्रांत के ग्रामीण कस्बों से लेकर प्रमुख शहरों तक लोग सड़कों पर उतर आए। राजधानी तेहरान के अलावा मशहद, इस्फ़हान और अन्य बड़े शहरों में भी भारी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे। इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
ग्रैंड बाज़ार से शुरू हुई चिंगारी, पूरे देश में फैली आग
ईरान में मौजूदा विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले महीने तेहरान के ऐतिहासिक ग्रैंड बाज़ार से हुई थी। यहां व्यापारियों ने ईरानी मुद्रा रियाल की तेज गिरावट और बेकाबू होती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। देखते ही देखते यह असंतोष बेरोज़गारी, रोज़मर्रा की वस्तुओं की कमी और पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण पैदा हुए व्यापक आर्थिक संकट के खिलाफ जन आंदोलन में बदल गया। शुरुआत में आर्थिक मांगों तक सीमित रहे ये प्रदर्शन अब राजनीतिक स्वर भी लेने लगे हैं। कई जगहों पर सरकार और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ नारे लगाए गए, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
ग्रामीण इलाकों से लेकर बड़े शहरों तक उग्र प्रदर्शन
बुधवार को ईरान के लगभग सभी प्रांतों में उग्र प्रदर्शन देखने को मिले। ग्रामीण कस्बों में जहां लोग रोजगार और महंगाई को लेकर नाराज दिखे, वहीं बड़े शहरों में छात्रों, व्यापारियों और आम नागरिकों की भागीदारी ने आंदोलन को और व्यापक बना दिया। कई जगहों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हालात काबू में करने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गई हैं। हालांकि मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि मृतकों और हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या इससे अधिक हो सकती है।
निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का आह्वान
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने देश में हो रहे इन प्रदर्शनों में “अभूतपूर्व जनभागीदारी” की सराहना की है। उन्होंने इसे एक निर्णायक मोड़ बताते हुए ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। रजा पहलवी ने कहा कि ईरानी अवाम अब समन्वित और संगठित प्रदर्शनों के अगले चरण के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस बयान को सरकार के लिए एक और राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया: जमाखोरी और महंगाई पर चेतावनी
इधर, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्थिति को संभालने की कोशिश करते हुए घरेलू आपूर्तिकर्ताओं और व्यापारियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि कोई भी वस्तुओं की जमाखोरी या मनमानी मूल्य वृद्धि न करे, ताकि आम जनता को राहत मिल सके। सरकार का दावा है कि वह आर्थिक कठिनाइयों को कम करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका असर फिलहाल सीमित दिख रहा है।
अमेरिका की चेतावनी से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
ईरान में जारी अशांति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा। ट्रंप ने कहा, “किसी की भी आवाज़ दबाने की कोशिश की गई तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” इस बयान के बाद ईरान-अमेरिका तनाव और गहरा गया है।
अमेरिका पर हस्तक्षेप और ‘आर्थिक युद्ध’ का आरोप
ईरान ने अमेरिका के आरोपों और बयानों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका लगातार ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका न केवल देश में अशांति और असुरक्षा का माहौल बना रहा है, बल्कि आतंकवाद और हिंसा को भी बढ़ावा दे रहा है। विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि ईरान में मौजूदा आर्थिक समस्याओं की बड़ी वजह अमेरिका द्वारा लगाए गए “अवैध और अन्यायपूर्ण प्रतिबंध” हैं। बयान में कहा गया कि इन प्रतिबंधों के जरिए अमेरिका ने ईरान के खिलाफ “पूर्ण आर्थिक और वित्तीय युद्ध” छेड़ रखा है।
शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, लेकिन कानून के दायरे में
ईरान के विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि देश का संविधान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को मान्यता देता है। मंत्रालय ने कहा कि इस्लामी गणराज्य कानून के दायरे में लोगों की वैध मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, उसने आर्थिक कठिनाइयों को कम करने के लिए आवश्यक उपाय अपनाने पर जोर दिया। फिलहाल, ईरान में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। एक ओर जनता का गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है, तो दूसरी ओर सरकार और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के बीच बयानबाज़ी तेज होती जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह संकट किस दिशा में जाता है।
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