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मेलोनी का सख्त रुख, इटली ने इजरायल से रक्षा समझौता निलंबित किया

इटली सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उसने हाल के हफ्तों में इजरायल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई की खुलकर आलोचना की थी। इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है।

मेलोनी का सख्त रुख, इटली ने इजरायल से रक्षा समझौता निलंबित किया
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रोम: Italy Israel Defence Agreement: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इटली ने एक अहम कूटनीतिक फैसला लेते हुए इजरायल के साथ अपने रक्षा सहयोग समझौते को निलंबित कर दिया है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के इस कदम को यूरोप-इजरायल संबंधों में आए बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अब तक इटली को इजरायल का एक मजबूत सहयोगी माना जाता रहा है, लेकिन हालिया घटनाओं ने दोनों देशों के रिश्तों में खटास ला दी है।

लेबनान में सैन्य कार्रवाई बनी वजह

इटली सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उसने हाल के हफ्तों में इजरायल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई की खुलकर आलोचना की थी। इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब इजरायली बलों ने संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत तैनात इतालवी सैनिकों के पास चेतावनी के तौर पर गोलीबारी की। इस घटना में एक इतालवी सैन्य वाहन को नुकसान पहुंचा, जिससे रोम और तेल अवीव के बीच तनाव और बढ़ गया।

मेलोनी का सख्त रुख

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा, “जहां मतभेद होते हैं, वहां कदम उठाना जरूरी होता है।” उनका यह बयान इस बात का संकेत देता है कि इटली अब अपने अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में अधिक संतुलित और स्वतंत्र रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है। मेलोनी ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की भी आलोचना की थी, जिससे यह साफ है कि उनकी सरकार वैश्विक मुद्दों पर अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

इजरायल की प्रतिक्रिया: ‘सीमित असर’

इटली के इस फैसले पर इजरायल की ओर से अपेक्षाकृत शांत प्रतिक्रिया आई है। इजरायली विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक रक्षा संधि नहीं है, बल्कि एक पुराना समझौता ज्ञापन (MoU) है। मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते का वास्तविक प्रभाव सीमित है और इसके निलंबन से इजरायल की सुरक्षा या सैन्य क्षमताओं पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, विशेषज्ञ इसे प्रतीकात्मक रूप से बड़ा झटका मान रहे हैं।

घरेलू राजनीति का भी असर?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के पीछे केवल अंतरराष्ट्रीय कारण ही नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति भी अहम भूमिका निभा रही है।

रोम के लुइस विश्वविद्यालय के राजनीतिक इतिहासकार लोरेंजो कैस्टेलानी के मुताबिक, मेलोनी को आशंका है कि इजरायल-ईरान तनाव और उससे जुड़े आर्थिक प्रभावों को लेकर इटली के मतदाताओं का रुख बदल सकता है। ऐसे में उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए यह कदम उठाया है, ताकि घरेलू समर्थन बनाए रखा जा सके।

2003 का समझौता, अब रुका सिलसिला

इटली और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग का यह समझौता 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के कार्यकाल में हुआ था। यह समझौता हर पांच साल में स्वतः नवीनीकरण के तहत चलता रहा है। अब इसे निलंबित करने का फैसला इस लंबे सहयोग के सिलसिले में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर असर पड़ सकता है।

वैश्विक कूटनीति में नए संकेत

इटली का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। ऐसे में यूरोपीय देशों का रुख भी धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल इटली-इजरायल संबंधों को प्रभावित करेगा, बल्कि यह यूरोप के अन्य देशों को भी अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।


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