इजरायल-लेबनान शांति की दिशा में अहम पहल, वाशिंगटन में फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर
कई दिनों तक चली बातचीत के बाद यह फ्रेमवर्क तैयार किया गया। वाशिंगटन स्थित अमेरिकी विदेश मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में अमेरिका में लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोवाद और उनके इजरायली समकक्ष येचियल लिटर ने अमेरिकी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में इस त्रिपक्षीय दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।

यरुशलम/वॉशिंगटन : मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए इजरायल और लेबनान ने अमेरिका की मध्यस्थता में शुक्रवार को वाशिंगटन में एक शांति रूपरेखा (फ्रेमवर्क) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने और इजरायल-हिजबुल्ला संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में शुरुआती लेकिन अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, समझौते की विस्तृत शर्तों को फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार हुआ समझौता
कई दिनों तक चली बातचीत के बाद यह फ्रेमवर्क तैयार किया गया। वाशिंगटन स्थित अमेरिकी विदेश मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में अमेरिका में लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोवाद और उनके इजरायली समकक्ष येचियल लिटर ने अमेरिकी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में इस त्रिपक्षीय दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इस प्रक्रिया में अमेरिका ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने में अहम योगदान दिया। माना जा रहा है कि यह पहल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
मार्को रूबियो बोले- मुश्किल लेकिन जरूरी सफर की शुरुआत
हस्ताक्षर समारोह के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि यह समझौता शांति की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि आगे का रास्ता आसान नहीं होगा, लेकिन यह बेहद जरूरी है। रूबियो के अनुसार, "आज हमने एक ऐसे सफर की शुरुआत की है जो निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन यह क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।"
दोनों देशों के राजदूतों ने जताई सकारात्मक उम्मीद
समझौते के बाद इजरायल के राजदूत येचियल लिटर ने लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोवाद की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान बेहद दृढ़ और प्रभावी भूमिका निभाई। उन्होंने उन्हें "शेरनी" की तरह बातचीत करने वाली नेता बताया। वहीं, लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोवाद ने कहा कि यह फ्रेमवर्क लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लड़ाई को स्थायी रूप से समाप्त करना और लेबनान के नागरिकों को शांति, सुरक्षा और समृद्धि का वातावरण उपलब्ध कराना है।
समझौते की शर्तों पर फिलहाल बना हुआ है सस्पेंस
हालांकि समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन इसकी विस्तृत शर्तों का अभी खुलासा नहीं किया गया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि यह नया फ्रेमवर्क 16 अप्रैल को हुए संघर्ष विराम समझौते से किस तरह अलग है या उसमें क्या नए प्रावधान जोड़े गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस समझौते के विभिन्न पहलुओं को सार्वजनिक किया जा सकता है, जिससे इसकी वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन किया जा सकेगा।
हिजबुल्ला संघर्ष को खत्म करने की कोशिश
इजरायल और हिजबुल्ला के बीच पिछले कई महीनों से सीमा पर लगातार तनाव और हमलों का दौर चलता रहा है। इस संघर्ष में दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और सीमा क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। ऐसे में यह फ्रेमवर्क समझौता केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो सीमा पर हिंसा कम होने और विस्थापित लोगों की वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।
क्या आगे बढ़ पाएगी शांति प्रक्रिया?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शांति प्रक्रिया की सफलता केवल समझौते पर हस्ताक्षर से तय नहीं होती, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। इजरायल और लेबनान के बीच दशकों पुराने विवाद और हिजबुल्ला की भूमिका को देखते हुए आगे कई राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। फिर भी, वाशिंगटन में हुआ यह फ्रेमवर्क समझौता दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने और स्थायी समाधान की तलाश में एक महत्वपूर्ण शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यदि दोनों पक्ष इस दिशा में प्रतिबद्ध रहते हैं तो यह समझौता मध्य पूर्व में लंबे समय से चली आ रही अस्थिरता को कम करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है।


