ईरान बोला-हमारे विमान रोके तो किसी के उड़ने नहीं देंगे, UAE-ओमान समेत कई देशों ने उड़ानें रोकीं
अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वाली दुनिया की कई कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके बाद ईरानी यात्री विमानों पर पड़ोसी देशों में प्रतिबंध या उड़ानों में कटौती तेहरान के लिए नई चुनौती बन गई है।

तेहरान/ अबूधाबी : ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर अब उसके पड़ोसी देशों के साथ हवाई संपर्क पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान के साथ कारोबार करने वाली कंपनियों पर अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाए जाने के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान ने ईरान से आने-जाने वाली यात्री विमान सेवाओं में कटौती की है। इराक ने भी ईरान के साथ हवाई यातायात पर रोक लगाने की घोषणा की है। पड़ोसी देशों के इन कदमों पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मुहम्मद मोखबेर ने पड़ोसी देशों पर अमेरिका की कथित रणनीति में शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरानी विमानों को उड़ान भरने या दूसरे देशों के हवाई अड्डों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाती है तो क्षेत्र के अन्य देशों की विमान सेवाओं के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। मोखबेर के बयान से संकेत मिलता है कि तेहरान अपने खिलाफ उठाए जा रहे कदमों का जवाब क्षेत्रीय स्तर पर देने की तैयारी में है। ईरान के लिए हवाई संपर्क में कटौती ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसकी अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है।
प्रतिबंधों से बढ़ता अलगाव
अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वाली दुनिया की कई कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके बाद ईरानी यात्री विमानों पर पड़ोसी देशों में प्रतिबंध या उड़ानों में कटौती तेहरान के लिए नई चुनौती बन गई है। ईरान के बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही पर भी अमेरिकी दबाव पहले से बना हुआ है। ऐसे में हवाई और समुद्री संपर्क प्रभावित होने से ईरान के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और यातायात पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे देश के क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ने की आशंका भी बढ़ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने हालिया संबोधन में ईरान के खिलाफ अमेरिकी नीति को लेकर कड़ा रुख जाहिर किया था। इसके बाद प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव को लेकर क्षेत्रीय घटनाक्रम पर निगाहें बनी हुई हैं।
प्रतिबंध हटाने पर होर्मुज खोलने का संकेत
इसी बीच ईरान ने अमेरिका के सामने बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत दिया है। तेहरान का कहना है कि यदि अमेरिका ईरान पर लगाए गए सभी तरह के प्रतिबंध हटा देता है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोला जा सकता है और परमाणु मुद्दे पर वार्ता फिर शुरू हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी घटनाक्रम का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और व्यापार पर भी पड़ सकता है।
हूती हमलों पर सऊदी, पाकिस्तान और तुर्किये की बैठक
दूसरी ओर, यमन के हूती लड़ाकों की ओर से सऊदी अरब पर किए जा रहे हमलों के बीच रियाद में सऊदी, पाकिस्तान और तुर्किये के सैन्य अधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में हूती हमलों से निपटने के लिए आपसी सहयोग और मक्का सुरक्षा समझौते के प्रावधानों पर चर्चा होने की संभावना है। तुर्किये के सेना प्रमुख सेल्चुक बेराक्तारोग्लू रियाद पहुंच चुके हैं। इस बीच सऊदी अरब के सर्वोच्च मुफ्ती ने सेना से देश की सुरक्षा के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है। ईरान समर्थित हूती लड़ाके लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और उसके समर्थकों के खिलाफ संघर्ष में शामिल हैं। हूती समूह की ओर से सऊदी अरब के रियाद समेत अन्य इलाकों और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के दावे भी सामने आते रहे हैं।
एर्दोगन ने बताया मक्का समझौते का प्रावधान
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने न्यूजवीक को दिए लिखित जवाब में मक्का सुरक्षा समझौते की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समझौते में शामिल किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में अन्य दो देश सहयोगी देश को खुफिया जानकारी, हथियार और परिवहन सुविधाओं के जरिए सहायता दे सकते हैं। एर्दोगन के अनुसार, यदि किसी सहयोगी देश के लिए खतरा बढ़ता है तो सहायता का दायरा बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। मक्का सुरक्षा समझौते में सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान और तुर्किये शामिल हैं। ईरान पर बढ़ते अमेरिकी दबाव और हूती हमलों के बीच इस त्रिपक्षीय सुरक्षा सहयोग को लेकर क्षेत्रीय गतिविधियां बढ़ी हैं।


